झपटमारी पर फास्ट ट्रैक एक्शन: रंगेहाथ पकड़ा आरोपी, 14 दिन में चार्जशीट और त्वरित सजा

नई दिल्ली  शाहबाद डेयरी में 1 मई की रात पीड़ित ने पर्स छीनते हुए झपटमार को रंगेहाथ पकड़ा। पुलिस ने तेजी से जांच कर 6 मई को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। कोर्ट ने तारीख पर तारीख वाले फिल्मी जुमले को दरकिनार करते हुए रोजाना सुनवाई की और 16 मई को फैसला सुना दिया।…

झपटमारी पर फास्ट ट्रैक एक्शन: रंगेहाथ पकड़ा आरोपी, 14 दिन में चार्जशीट और त्वरित सजा

नई दिल्ली

 शाहबाद डेयरी में 1 मई की रात पीड़ित ने पर्स छीनते हुए झपटमार को रंगेहाथ पकड़ा। पुलिस ने तेजी से जांच कर 6 मई को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। कोर्ट ने तारीख पर तारीख वाले फिल्मी जुमले को दरकिनार करते हुए रोजाना सुनवाई की और 16 मई को फैसला सुना दिया।

पुलिस कमिश्नर ने दिए निर्देश
महज दो हफ्ते में आरोपी दोषी करार दिया गया, जो दिल्ली पुलिस के लिए एक नजीर बन गई। पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने सभी जिलों को ऐसे ही स्पीडी इन्वेस्टिगेशन, स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस पर काम करने के निर्देश दे दिए, जिस पर अमल होने लगा है।

दो हफ्ते में चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया
पुलिस अफसरों के मुताबिक, रंगेहाथ पकड़े गए आरोपियों के अलावा जिन केसों में संभव हो सके उनमें एक से लेकर दो हफ्ते के भीतर चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया है। इसके बाद प्रॉसिक्यूशन (सरकारी वकील) के साथ तालमेल कर फास्ट ट्रैक सुनवाई सुनिश्चित करने और जल्द से जल्द दोषी साबित करने पर जोर दिया गया है।

ज्यादातर केसों में आरोपी को मिल जाती है जमानत
दरअसल सात साल से कम सजा वाले अधिकतर केसों में आरोपी को जमानत मिल जाती है। ऐसे में जांच अधिकारी के सामने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा का बंधन नहीं रहता है। अफसर कहते हैं कि इसके बाद कोर्ट में भी ऐसे केसों की सुनवाई कई साल तक चलती है। इससे शिकायतकर्ता या गवाह के मुकरने या बयानों में विरोधाभास होने से आरोपी को सजा नहीं हो पाती है।

जल्द सजा करवाने पर दिया जा रहा जोर
तेजी से जांच, तुरंत चार्जशीट दाखिल करने और सुनवाई होने से मुकरने या बयानों में विरोधाभास की गुंजाइश कम रहती है, जिससे सजा की दर में भी इजाफा होगा। इसलिए झपटमारी, चोरी या अन्य छोटे अपराधों में आरोपी के मौके या तुरंत बाद रंगेहाथ पकड़े जाने पर दो हफ्तों में चार्जशीट करने और जल्द सजा करवाने पर जोर है।

सभी जिलों में शुरू हुआ एक्शन
पुलिस अफसरों ने बताया कि सभी जिलों ने ऐसे मामलों में अमल करना शुरू कर दिया है। सिर्फ छोटे अपराध ही नहीं बल्कि गंभीर अपराधों में भी अगर संभव हो सकता है तो उनमें भी जल्द जांच कर आरोप पत्र दाखिल करने और सजा करवाने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है 'ताबड़तोड़ न्याय' का मकसद
अगर किसी केस में आरोपी को कोर्ट बरी कर देता है तो जिलों के डीसीपी से खुद फैसले की समीक्षा करने को कहा गया है, ताकि अगर कोई कमी रह गई हो तो उसे आगे के केसों में ना दोहराई जाए। 'ताबड़तोड़ न्याय' का मकसद आरोपी को कोर्ट से सजा दिलवाना भी है।

इन केसों में हुआ ताबड़तोड़ इंसाफ
14 मई: टैक्सी ड्राइवर का पर्स छीनने वाले को सिपाही ने पीछा कर रंगेहाथ पकड़ा था। आईपी एस्टेट थाना पुलिस ने चार दिन में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। स्पीडी ट्रायल के तहत 26 मई को आरोपी को दोषी करार दिया।
16 मईः पालम गांव में 80 हजार कैश-जूलरी की चोरी हुई। पुलिस ने चार घंटे में आरोपी को अरेस्ट किया। 10 दिन की सुनवाई के बाद 26 मई को अदालत ने पेश साक्ष्यों और गवाह के बयान पर आरोपी को दोषी ठहरा दिया।
3 फरवरी: आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर 5200 रुपये निकालकर आरोपी फरार हो गया। लूट का केस दर्ज कर पहाड़गंज पुलिस ने आरोपी को पकड़ा। 23 मार्च को चार्जशीट पेश की और 23 मई को दोषी करार दिया गया।

 

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