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जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा बने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया। भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-223 के तहत यह नियुक्ति…

जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा बने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस

चंडीगढ़.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया। भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-223 के तहत यह नियुक्ति की है।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो गया था, जिसके चलते जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के दायित्व सौंपे गए हैं। अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया है।

यह नियुक्ति तब तक प्रभावी रहेगी जब तक हाई कोर्ट को नियमित मुख्य न्यायाधीश नहीं मिल जाता। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा का न्यायिक और विधिक क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कालेज से अर्थशास्त्र में बीए (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराने के बाद उन्होंने मुख्य रूप से सिविल, संवैधानिक और सेवा संबंधी मामलों में वकालत की। अपने वकालती करियर के दौरान उन्होंने नोएडा प्राधिकरण, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन तथा उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन सहित कई सार्वजनिक और वैधानिक संस्थाओं का पक्ष रखा।

इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी महत्वपूर्ण मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पेश होते रहे। वर्ष 2013 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया गया। जस्टिस मिश्रा ने 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने। 21 जुलाई 2025 को उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हुआ था। न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट में रहते हुए उनकी पीठ ने चर्चित निठारी सीरियल किलिंग मामले में अहम निर्णय सुनाया था। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में उन्होंने अवैध खनन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश पारित किए और सेवा तथा संवैधानिक कानून से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय निर्णय दिए।

जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चार जज हो गए जिनका संबध पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जिस्टस ए जी मसीह व जस्टिस अरुण पल्ली , पंजाब एवं हरियाणा हाई के कोटे से सुप्रीम कोर्ट में है जबकि जस्टिस शील नागू पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ रहते हुए मध्य प्रदेश कोटे से सुप्रीम कोर्ट पंहुचे है।

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