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मेहकप्रीत कौर की सफलता से बढ़ा उत्साह, NDA 2026 में लड़कियों के लिए क्या हैं नियम और मौके

 रूपनगर पंजाब के रूपनगर (रोपड़) जिले के पपराली गांव की मेहकप्रीत कौर ने एयर फोर्स अकादमी (AFA) मेरिट लिस्ट में ऑल इंडिया रैंक (AIR)-1 हासिल कर न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारतीय रक्षा सेवाओं में महिलाओं के लिए सीटों की संख्या…

मेहकप्रीत कौर की सफलता से बढ़ा उत्साह, NDA 2026 में लड़कियों के लिए क्या हैं नियम और मौके

 रूपनगर
पंजाब के रूपनगर (रोपड़) जिले के पपराली गांव की मेहकप्रीत कौर ने एयर फोर्स अकादमी (AFA) मेरिट लिस्ट में ऑल इंडिया रैंक (AIR)-1 हासिल कर न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारतीय रक्षा सेवाओं में महिलाओं के लिए सीटों की संख्या अब भी बेहद सीमित है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करना एक असाधारण उपलब्धि माना जा रहा है।

क्या है NDA और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA), पुणे के खड़कवासला में स्थित दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यहां भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अधिकारी तैयार किए जाते हैं।

एनडीए में 12वीं के बाद प्रवेश लिया जा सकता है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) साल में दो बार इसकी परीक्षा आयोजित करता है। परीक्षा में गणित और जनरल एबिलिटी टेस्ट (GAT) के दो पेपर होते हैं। कुल 1800 अंकों में से 900 अंक लिखित परीक्षा और 900 अंक एसएसबी (SSB) इंटरव्यू के लिए निर्धारित हैं।

लिखित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को पांच दिवसीय एसएसबी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, जिसमें नेतृत्व क्षमता, मानसिक कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और शारीरिक फिटनेस का आकलन किया जाता है।

वायुसेना में जाने के इच्छुक उम्मीदवारों को इसके अलावा कम्प्यूटरीकृत पायलट चयन प्रणाली (CPSS) परीक्षा भी पास करनी होती है, जिसे जीवन में केवल एक बार दिया जा सकता है।

महिलाओं के लिए सीटें अब भी सीमित
साल 2021 तक महिलाओं को एनडीए परीक्षा के माध्यम से प्रवेश की अनुमति नहीं थी। अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए महिलाओं को भी एनडीए परीक्षा में शामिल होने का अधिकार दिया। अदालत ने महिलाओं को बाहर रखने की नीति को लैंगिक भेदभावपूर्ण बताया था।

इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने महिलाओं के लिए सीमित सीटें निर्धारित कीं। शुरुआती चरण में सेना में 10, नौसेना में 3 और वायुसेना फ्लाइंग ब्रांच में केवल 2 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई थीं। हालांकि समय के साथ इनकी संख्या बढ़ी है, लेकिन कुल सीटों में महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी बहुत कम है।

यही वजह है कि एयर फोर्स अकादमी मेरिट लिस्ट में AIR-1 हासिल करना बेहद बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

क्या है माई भागो AFPI?
माई भागो आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट (AFPI) पंजाब सरकार की एक अनूठी पहल है, जिसे विशेष रूप से लड़कियों को रक्षा सेवाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

संस्थान का NDA प्रिपरेटरी विंग 2023 में शुरू किया गया था और यह देश का पहला ऐसा संस्थान है जो केवल लड़कियों को एनडीए प्रवेश के लिए प्रशिक्षण देता है।

यहां प्रवेश के लिए उम्मीदवार का पंजाब का निवासी होना और कम से कम 10वीं पास होना जरूरी है। 11वीं में पढ़ रही छात्राएं भी आयु मानदंड पूरा करने पर आवेदन कर सकती हैं। प्रशिक्षण, हॉस्टल और भोजन का पूरा खर्च पंजाब सरकार वहन करती है।

संस्थान में अत्याधुनिक साइबर लैब, इंडोर शूटिंग रेंज, फिटनेस सेंटर और फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के नाम पर समर्पित विशेष हॉस्टल भी बनाया गया है।

चयन के बाद क्या होता है?
एनडीए में चयनित उम्मीदवार तीन वर्ष तक खड़कवासला (पुणे) या भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला (केरल) में सैन्य और शैक्षणिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इसके बाद उन्हें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से स्नातक की डिग्री प्रदान की जाती है।

फिर सेना के उम्मीदवार देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), नौसेना के उम्मीदवार एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी और वायुसेना के उम्मीदवार हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को 56,100 रुपये प्रतिमाह का स्टाइपेंड भी मिलता है।

मेहकप्रीत और कोमलप्रीत की सफलता बनी प्रेरणा
एयर फोर्स अकादमी मेरिट लिस्ट में AIR-1 हासिल करने वाली मेहकप्रीत कौर अब हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में प्रशिक्षण लेंगी। वहीं NDA मेरिट में AIR-18 हासिल करने वाली कोमलप्रीत कौर खड़कवासला में तीन वर्षों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी।

इन दोनों छात्राओं की सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि अवसर और सही प्रशिक्षण मिले तो पंजाब के गांवों की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च स्थान हासिल कर सकती हैं। यह उपलब्धि न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है, बल्कि रक्षा सेवाओं में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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