,

डराने वाले आंकड़े: MP में HIV संक्रमण तेजी से बढ़ा, मां से बच्चों तक पहुंच रहा खतरा

इंदौर.  मध्य प्रदेश में एचआईवी संक्रमण को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य तंत्र की चिंता बढ़ा दी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस समय संक्रमण दर लगातार बढ़ रही है, उसी समय जांचों की संख्या में कमी क्यों आ रही है. इंदौर जैसे बड़े शहर में वर्ष 2022 में जहां करीब…

डराने वाले आंकड़े: MP में HIV संक्रमण तेजी से बढ़ा, मां से बच्चों तक पहुंच रहा खतरा

इंदौर.
 मध्य प्रदेश में एचआईवी संक्रमण को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य तंत्र की चिंता बढ़ा दी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस समय संक्रमण दर लगातार बढ़ रही है, उसी समय जांचों की संख्या में कमी क्यों आ रही है. इंदौर जैसे बड़े शहर में वर्ष 2022 में जहां करीब 1.47 लाख लोगों की एचआईवी जांच की गई थी, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 85 हजार रह गई है. इसके बावजूद पॉजिटिव मरीजों की संख्या 492 से बढ़कर 615 तक पहुंच गई है. संक्रमण दर भी 0.33 प्रतिशत से बढ़कर 0.72 प्रतिशत हो गई है. यानी कम जांच के बावजूद ज्यादा संक्रमित सामने आ रहे हैं. यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर संक्रमण की वास्तविक स्थिति आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। 

स्थिति केवल इंदौर तक सीमित नहीं है. राज्य एड्स नियंत्रण समिति के आंकड़े बताते हैं कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2020-21 में जहां 3771 संक्रमित गर्भवती महिलाएं दर्ज थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या 7167 तक पहुंच गई. इसी अवधि में 200 से अधिक नवजात बच्चों में संक्रमण मां से पहुंचने के मामले सामने आए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, नियमित दवा और चिकित्सकीय निगरानी से इस तरह के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है. इसके बावजूद बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। 

इंदौर में क्यों बढ़ रही संक्रमण दर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में एचआईवी पॉजिटिविटी रेट लगभग दोगुना हो गया है. वर्ष 2022 में यह दर 0.33 प्रतिशत थी, जो 2023 में 0.67 प्रतिशत, 2024 में 0.70 प्रतिशत और 2025 में 0.72 प्रतिशत तक पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि असुरक्षित यौन संबंध और नशे के दौरान संक्रमित सुइयों का उपयोग संक्रमण फैलने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। 

जांच कम होने से छिप रही असली तस्वीर
एचआईवी नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका व्यापक स्क्रीनिंग और समय पर पहचान है. लेकिन इंदौर में जांचों की संख्या लगातार कम हो रही है. इससे कई संक्रमित व्यक्ति समय पर सामने नहीं आ पा रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कम स्क्रीनिंग के कारण संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो रहा है। 

गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर बढ़ता खतरा
राज्य में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ना सबसे चिंताजनक पहलू माना जा रहा है. वर्ष 2025-26 में 743 एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी दर्ज की गई. कई मामलों में गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच नहीं हुई या उपचार बीच में छूट गया. परिणामस्वरूप संक्रमण मां से बच्चे तक पहुंचने का जोखिम बढ़ गया। 

क्यों नहीं रुक रहा संक्रमण
विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण संक्रमण नियंत्रण में बाधा बन रहे हैं. इनमें समय पर जांच न होना, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी बीच में छोड़ देना, संक्रमण की जानकारी छिपाना, नवजात को आवश्यक दवा न देना और संक्रमित मां द्वारा चिकित्सकीय सलाह के बिना स्तनपान कराना शामिल है। 

केस स्टडी ने बढ़ाई चिंता
एक मामले में महिला की पहली गर्भावस्था के दौरान एचआईवी जांच ही नहीं हुई. दूसरी गर्भावस्था में संक्रमण का पता चला. इसके बाद पति और पहला बच्चा भी संक्रमित पाए गए. दूसरे मामले में मां ने उपचार पूरा नहीं लिया और नवजात को निर्धारित दवा भी नहीं दी गई. बाद में बच्चा एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। 

कमलनाथ ने जांच और निगरानी का मुद्दा उठाया
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से विशेष कदम उठाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और दवा उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है. वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी को केवल चिकित्सा नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता के माध्यम से भी नियंत्रित किया जा सकता है। 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports