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हरियर छत्तीसगढ़’ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण सबकी जिम्मेदारी: वन मंत्री केदार कश्यप

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप विश्व पर्यावरण दिवस पर वन मंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बधाई, पौधा लगाने का किया आह्वान एक पेड़ मां के नाम अभियान बना जनआंदोलन उदंती-सीतानदी में दूधराज का घोंसला समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक रायपुर विश्व पर्यावरण दिवस के गरिमामय अवसर पर वन…

हरियर छत्तीसगढ़’ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण सबकी जिम्मेदारी: वन मंत्री केदार कश्यप

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप

विश्व पर्यावरण दिवस पर वन मंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बधाई, पौधा लगाने का किया आह्वान

एक पेड़ मां के नाम अभियान बना जनआंदोलन उदंती-सीतानदी में दूधराज का घोंसला समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक

रायपुर
विश्व पर्यावरण दिवस के गरिमामय अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, अनुपम जैव विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक संसाधनों के कारण देश का एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। वर्तमान में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है।

जनआंदोलन बना एक पेड़ मां के नाम अभियान

         वन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण सहित हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कई प्रभावी योजनाएं चलाई जा रही हैं। ष्एक पेड़ मां के नामष् अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में राज्य में करोड़ों पौधों का रोपण किया गया है। आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से अब यह अभियान एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पूंजी

        मंत्री  कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका है, जो हमारी सबसे बड़ी प्राकृतिक संपदा है। वन विभाग द्वारा वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक पुनर्जनन और व्यापक वृक्षारोपण के माध्यम से इस हरित आवरण को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

सुरक्षित हुए प्राकृतिक आवास, बढ़ा जल स्तर

      कश्यप ने वन्यजीवों के संरक्षण पर बात करते हुए बताया कि राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में वन्यप्राणियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज द्वारा घोंसला बनाने का दुर्लभ दृश्य देखा गया है, जो हमारी सुरक्षित एवं अनुकूल पर्यावरण प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके अलावा, वन क्षेत्रों में हज़ारों जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से वन्यजीवों को सालभर पानी मिल रहा है और भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका को बढ़ावा

         वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य के लिए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी लें।

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