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प्री-SIR जांच ने बढ़ाई सियासी हलचल, जालंधर की चार विधानसभा सीटों पर असर के संकेत

जालंधर. जालंधर में चल रही प्री-एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के शुरुआती चरण में बड़ी संख्या में मतदाताओं का डाटा 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा पाया है। शुरुआती फिल्ट्रेशन में 3,03,529 ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनकी पुरानी सूची में पुष्टि नहीं हो सकी। चुनावी भाषा में इन्हें “अनमैप्ड वोटर” कहा जा…

प्री-SIR जांच ने बढ़ाई सियासी हलचल, जालंधर की चार विधानसभा सीटों पर असर के संकेत

जालंधर.

जालंधर में चल रही प्री-एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के शुरुआती चरण में बड़ी संख्या में मतदाताओं का डाटा 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा पाया है। शुरुआती फिल्ट्रेशन में 3,03,529 ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनकी पुरानी सूची में पुष्टि नहीं हो सकी।

चुनावी भाषा में इन्हें “अनमैप्ड वोटर” कहा जा रहा है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी शहर की चार विधानसभा सीटों—नॉर्थ, सेंट्रल, वेस्ट और कैंट—में सामने आई है। इन चारों हलकों में कुल 1,94,339 मतदाता फिलहाल अनट्रेस बताए गए हैं।

प्री-एसआईआर की प्रगति और आंकड़े
जिले में प्री-एसआईआर का काम अब तक 81.67% पूरा हो चुका है। कुल 16,50,212 पंजीकृत मतदाताओं में से 13,46,683 के रिकॉर्ड 2003 की सूची के साथ सफलतापूर्वक मैप किए जा चुके हैं। इस दौरान करीब 2.85 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में त्रुटियां भी सामने आई हैं, जिनमें पता, उम्र या अन्य विवरण शामिल हैं।

शहरी सीटों पर घट-बढ़ से बदल सकते है खेल
जालंधर की शहरी विधानसभा सीटों पर अक्सर जीत-हार का अंतर 5 से 15 हजार वोट के बीच रहता है। ऐसे में यदि 1.94 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में संशोधन, सत्यापन या नाम कटौती होती है, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। फिलहाल सेंट्रल और वेस्ट सीट आम आदमी पार्टी के पास हैं, जबकि नॉर्थ और कैंट कांग्रेस के कब्जे में हैं। शहरी इलाकों में भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक भी प्रभावशाली माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि अनमैप्ड मतदाताओं में बड़ी संख्या प्रवासी परिवारों, किरायेदारों या नए वोटरों की हुई, तो सभी दलों की रणनीति में बदलाव तय है।

प्रवासी मतदाता बने बड़ी चुनौती
जालंधर नॉर्थ, सेंट्रल और वेस्ट इलाकों में बाहरी राज्यों से आकर बसे लोगों की संख्या काफी है। कई मतदाताओं का वोट अब भी उनके मूल राज्यों में दर्ज है, जबकि कुछ ने वर्षों में कई बार पता बदला है। ऐसे में मतदाता सूची का शुद्धिकरण आगामी चुनावों से पहले अहम राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है। यदि घर-घर सर्वे के दौरान भी अनमैप्ड मतदाताओं की पुष्टि नहीं हो पाती, तो चुनाव विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे।

7 जून को सभी पोलिंग बूथों पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे (सुबह 10 से शाम 4 बजे), जहां बीएलओ 2003 की सूची से मैपिंग में मदद करेंगे। 25 जून से 24 जुलाई 2026 तक बीएलओ घर-घर जाकर इन्यूमरेशन फॉर्म भरवाएंगे। एसआईआर के तहत यह फॉर्म भरना अनिवार्य है; फॉर्म न भरने पर नाम ड्राफ्ट वोटर सूची में शामिल नहीं होगा। मतदाता स्वयं भी जानकारी और सहायता के लिए voters.eci.gov.in का उपयोग कर सकते हैं।

पंजाब में चुनाव आयोग पंजाब ने एसआईआर प्रक्रिया की तारीखों में बदलाव किया है-
प्रारंभिक प्रकाशन:
3 अगस्त 2026
दावे व आपत्तियां: 3 अगस्त से 2 सितंबर 2026
निपटारा/नोटिस चरण: 3 अगस्त से 28 सितंबर 2026
अंतिम प्रकाशन: 1 अक्टूबर 2026

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