अमेरिका-इजरायल रिश्तों में दरार? ईरान वार्ता को लेकर खुफिया विवाद तेज

नई दिल्ली ईरान पर साथ मिलकर हमला करने वाले अमेरिका और इजरायल अब आपस में ही उलझते हुए नजर आ रहे हैं। यह पूरा मामला अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट में इस बात के संकेत दिए हैं कि इजरायल ने ईरान और अमेरिका की बातचीत में हिस्सा…

अमेरिका-इजरायल रिश्तों में दरार? ईरान वार्ता को लेकर खुफिया विवाद तेज

नई दिल्ली
ईरान पर साथ मिलकर हमला करने वाले अमेरिका और इजरायल अब आपस में ही उलझते हुए नजर आ रहे हैं। यह पूरा मामला अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट में इस बात के संकेत दिए हैं कि इजरायल ने ईरान और अमेरिका की बातचीत में हिस्सा ले रहे अधिकारियों की निगरानी करनी शुरू कर दी है। बता दें, इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां आपस में बेहद दोस्ताना रवैया रखती हैं, लेकिन इसके बाद भी ईरान के मुद्दे पर दोनों देशों की सरकार की राय अलग-अलग होने की वजह से परेशानी बढ़ गई है।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसी, ईरान के साथ जारी बातचीत की स्थिति को समझने के लिए अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी करने की कोशिश कर रहा है। मामले से परिचित अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इजरायली जासूसी एजेंसी ने उन लोगों पर ध्यान केंद्रित किया होगा, जो ईरान के साथ शांति वार्ता में प्रमुख रूप से भूमिका निभा रहे हैं। इसमें सबसे पहले ट्रंप के प्रमुख वार्ताकार स्टीव विटकॉफ, पेंटागन के अधिकारी एल्ब्रिुज ए कोल्बी, माइकल पी. डिमिनो शामलि हो सकते हैं

गौरतलब है कि आपस में खुफिया जानकारी साझा करने वाले यह दोनों देश इस बात को भली भांति जानते कि वह एक-दूसरे की जासूसी करते हैं। लेकिन ईरान का मुद्दा अलग है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान के मुद्दे पर जानकारी निकालने के लिए इजरायली जासूस जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका की रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल में तैनात अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके मोबाइल फोन में निगरानी करने वाला साफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया है। इस खबर के बाहर आते ही अमेरिका ने अपने सभी अधिकारियों के कम्युनिकेशन डिवाइसेस की सुरक्षा कड़ी कर दी।

अमेरिका की नहीं, ट्रंप की नस पकड़ने की कोशिश में इजरायल
अमेरिका और इजरायल आपस में ज्यादातर खुफिया जानकारी साझा करते हैं। दोनों देश साथ में कई युद्ध भी लड़ चुके हैं। ऐसे में अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल की दिलचस्पी अमेरिका की रणनीति या अधिकारियों की जासूसी में नहीं हैं। इजरायल, इस समय राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से दिए जा रहे संकेतों को समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर ट्रंप ईरान के साथ वार्ता में किस हद तक जा सकते हैं।

हालांकि, खुफिया आधार पर सामने आई इस रिपोर्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यलय ने खारिज किया है। वाइट हाउस की तरफ से बताया गया कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी है। इजरायल अमेरिकी सरकारी अधिकारियों या संस्थानों की जासूसी नहीं करता है। उन्होंने आगे कहा, “इजरायल की खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिशें उसके दुश्मनों पर केंद्रित हैं न कि उसके सहयोगियों पर। इसके विपरीत कोई भी दावा या तो गलत जानकारी पर आधारित है या राजनीतिक रूप से प्रेरित है।” वहीं इजरायल की तरफ से भी इन तमाम रिपोर्ट्स को खारिज किया गया है।

ईरान पर अलग-अलग क्यों दिख रहे इजरायल और अमेरिका
28 फरवरी को ईरान पर साथ मिलकर हमला करने वाले इजरायल और अमेरिका ने इस युद्ध को कुछ दिनों का सोचा था। लेकिन बाद में हालात ऐसे बिगड़े कि ट्रंप को सीजफायर करना पड़ा। इसी सीजफायर के बाद इजरायल और अमेरिका के बीच में हालात बिगड़ने लगे। अमेरिका चाहता है कि शांति वार्ता हो और ईरान के साथ दोबारा युद्ध शुरू न हो, जबकि गाजा में लंबे युद्ध लड़ चुका इजरायल लगातार ईरान पर हमला करने के प्रयास में है। इतना ही नहीं अमेरिका को सीधे तौर पर हिज्बुल्लाह से कोई परेशानी नहीं। ऐसे में ट्रंप ने नहीं चाहते कि इजरायल लेबनान पर हमला करे। लेकिन नेतन्याहू साफ तौर पर कह चुके हैं कि अगर लेबनान में हिज्बुल्लाह उसे थोड़ा सा भी खतरा समझ आता है, तो वह हमला करेंगे। अभी हाल में ही इसी मुद्दे को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू की तीखी बहस भी हो गई थी, जिसमें ट्रंप ने बीबी को अपशब्द तक कह दिए थे।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports