पेट्रोल-डीजल से लेकर LPG तक असर! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव ने बढ़ाई भारत की चिंता

नई दिल्ली  भारत पर एक बार फिर तेल-एलपीजी वाला नया खतरा मंडराने लगा है. भारत से कोसों दूर हुई घटना ने एक बार फिर सबके कान खड़े कर दिए हैं. जी हां, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है. ईरान ने एक बार…

पेट्रोल-डीजल से लेकर LPG तक असर! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव ने बढ़ाई भारत की चिंता

नई दिल्ली

 भारत पर एक बार फिर तेल-एलपीजी वाला नया खतरा मंडराने लगा है. भारत से कोसों दूर हुई घटना ने एक बार फिर सबके कान खड़े कर दिए हैं. जी हां, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है. ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है. ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है. इससे भारत की एलपीजी और तेल सप्लाई पर एक बार फिर असर पड़ सकता है। 

दरअसल, अपाचे हेलिकॉप्टर के गिराए जाने से अमेरिका गुस्से में है. अमेरिका दो दिनों से ईरान पर लगातार अटैक कर रहा है. इसके जवाब में ईरान ने अब होर्मुज को बंद करने का फैसला लिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है. होर्मुज के रास्ते भारत का करीब 60 फीसदी से अधिक एलपीजी और तेल आता है. इतना ही नहीं, वैश्विक स्तर पर करीब 20% तेल और बड़ी मात्रा में LNG इसी होर्मुज के रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ता है। 

होर्मुज बंद होने से मचेगा हाहाकार
होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचेगा. इसकी झलक पूरी दुनिया पिछले कुछ समय में देख चुकी है. ईरान ने जब पहली बार होर्मुज बंद किया तो पूरी दुनिया में एलपीजी से लेकर तेल की किल्लत हो गई. मगर बात में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने के बाद होर्मुज खुल गया था. मगर अब अमेरिकी हमलों के कारण ईरान ने फिर इसे बंद करने का फैसला किया है. अगर होर्मुज फिर से लंबे वक्त तक बंद रहता है तो इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा. भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। 

भारत के लिए कितनी चिंता की बात
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल का करीब 40-50% हिस्सा, LNG का करीब 60% हिस्सा और LPG की बड़ी मात्रा इसी समुद्री मार्ग से होकर आती है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं. भारत क्योंकि एलपीजी और तेल का आयातक देश है, तो इसकी भी निर्भरता होर्मुज पर ही है। 

एलपीजी सप्लाई पर बढ़ेगा दबाव
अगर होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो भारत में सबसे पहले LPG सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है. भारत में करोड़ों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं और LPG का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है.  ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ सकता है. वैसे भी अब भी भारत में एलपीजी सप्लाई पहले की तरह नॉर्मल नहीं हो पाया है। 

तेल के भी बढ़ेंगे दाम?
इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है. होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल और महंगा हो सकता है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और घरेलू ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है. हालांकि, भारत के पास अब भी तेल और गैस का भंडार है। 

फर्टिलाइजर की आपूर्ति भी होगी प्रभावित
इतना ही नहीं, होर्मुज के बंद होने से सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है. भारत यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए भी खाड़ी क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में लंबे समय तक संकट रहने पर कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों के पास कुछ समय के लिए रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मौजूद हैं, जिससे तत्काल संकट की संभावना कम मानी जा रही है। 

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