शादी के कार्ड में वास्तु नियमों का रखें ध्यान, रंग और डिजाइन से बदलता है शुभ फल

 कुछ ही दिनों में मलमास (अधिकमास) का समापन होने वाला है, जिसके बाद शादियों का सीजन दोबारा शुरू हो जाएगा. दरअसल, हिंदू धर्म में शादी को सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है. इस मांगलिक कार्य की शुरुआत शादी का कार्ड छपवाने से होती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार,…

शादी के कार्ड में वास्तु नियमों का रखें ध्यान, रंग और डिजाइन से बदलता है शुभ फल

 कुछ ही दिनों में मलमास (अधिकमास) का समापन होने वाला है, जिसके बाद शादियों का सीजन दोबारा शुरू हो जाएगा. दरअसल, हिंदू धर्म में शादी को सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है. इस मांगलिक कार्य की शुरुआत शादी का कार्ड छपवाने से होती है.

वास्तु शास्त्र के अनुसार, शादी का कार्ड केवल मेहमानों को बुलाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह आपके नए जीवन में सकारात्मकता लाने का एक माध्यम भी है. इसलिए कार्ड के रंग, डिजाइन और शब्दों का चयन सीधे तौर पर होने वाले दूल्हा-दुल्हन के भविष्य और वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है. अगर आप भी घर में शहनाई गूंजने से पहले शादी का कार्ड प्रिंट करवाने जा रहे हैं, तो वास्तु के इन जरूरी नियमों को बिल्कुल न भूलें.

कार्ड के रंगों का चयन (Color Selection)
वास्तु शास्त्र में रंगों का विशेष महत्व है क्योंकि वे सीधे ऊर्जा से जुड़े होते हैं.
क्या चुनें: शादी के कार्ड के लिए लाल, पीला, केसरिया, मैरून या गोल्डन (सुनहरा) रंग सबसे शुभ माना जाता है. लाल रंग प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक है, जबकि पीला और केसरिया रंग भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति से जुड़ा है, जो वैवाहिक सुख के कारक हैं.

शुभ प्रतीकों का होना है जरूरी (Auspicious Symbols)
कार्ड पर सही और पवित्र चिह्नों का होना बेहद जरूरी है. यह कार्ड की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है.

शादी के पहले कार्ड पर भगवान गणेश, स्वास्तिक, ओम या कलश का चित्र जरूर होना चाहिए. श्रीगणेश विघ्नहर्ता हैं, इसलिए उनका चिह्न होने से विवाह निर्विघ्न संपन्न होता है. ध्यान रखें कि कार्ड पर बने देवी-देवताओं के चित्र बहुत आधुनिक या अमूर्त न हों. वे गरिमा के अंदर छपे हों.

कार्ड का आकार और डिजाइन (Shape and Design)
आजकल मार्केट में कई तरह के कस्टमाइज्ड कार्ड ट्रेंड में हैं, लेकिन वास्तु के नियम यहां सबसे ज्यादा जरूरी है.

सही आकार: शादी का कार्ड हमेशा आयत (Rectangle) या वर्गाकार (Square) होना चाहिए. ये आकार हमेशा संतुलन को दर्शाते हैं.

इनसे बचें: अंडाकार (Oval), गोल या नुकीले कोनों (Irregular/Triangular shapes) वाले कार्ड बनवाने से बचें. नुकीले कोने वास्तु में 'शूल' या नकारात्मक ऊर्जा के स्रोत माने जाते हैं.

शब्दों की शुद्धता और मंत्र (Font and Mantras)
कार्ड पर लिखे जाने वाले शब्दों की भाषा आदरपूर्ण और स्पष्ट होनी चाहिए.

कार्ड की शुरुआत हमेशा ऊं श्री गणेशाय नमः या किसी मांगलिक श्लोक से करें.

शब्द ऐसे प्रयोग करें जिसे पढ़ने में मेहमानों को कोई असुविधा न हो. धुंधले या बहुत ज्यादा घुमावदार अक्षरों से बचना चाहिए.

लेदर या चमकीले केमिकल वाले पेपर से दूरी (Paper Quality)
कार्ड का पेपर हमेशा अच्छी गुणवत्ता का और साफ होना चाहिए.

आजकल कुछ लोग कार्ड पर लेदर फिनिश या सिंथेटिक चमकीले केमिकल का इस्तेमाल करते हैं. वास्तु के अनुसार, चमड़े को अशुद्ध माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग शादी के कार्ड में बिल्कुल नहीं होना चाहिए. इको-फ्रेंडली या हैंडमेड पेपर सर्वोत्तम माने जाते हैं.

शादी के कार्ड के उपाय
शास्त्रों के अनुसार, जब शादी का कार्ड छपकर आ जाए, तो सबसे पहला कार्ड अपने घर के मंदिर में भगवान गणेश के चरणों में अर्पित करना चाहिए. इसके बाद दूसरा कार्ड कुलदेवी या कुलदेवता के नाम पर निकालें. इसके बाद ही रिश्तेदारों या दोस्तों को कार्ड बांटना शुरू करें. ऐसा करने से विवाह पर आने वाले सभी दोष दूर हो जाते हैं.

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports