,

वन विभाग ने हटाया अवैध निर्माण, इटावा सफारी के पास जमीन पर किया वृक्षारोपण

इटावा इटावा में एक ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जिसकी चर्चा शहर से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है. वजह सिर्फ एक ध्वस्तीकरण अभियान नहीं, बल्कि वह तस्वीर है जिसने लोगों को चौंका दिया. जिन लोगों ने रात तक एक मजार देखा था, सुबह जब वे उसी स्थान पर पहुंचे तो पूरा दृश्य…

वन विभाग ने हटाया अवैध निर्माण, इटावा सफारी के पास जमीन पर किया वृक्षारोपण

इटावा
इटावा में एक ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जिसकी चर्चा शहर से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है. वजह सिर्फ एक ध्वस्तीकरण अभियान नहीं, बल्कि वह तस्वीर है जिसने लोगों को चौंका दिया. जिन लोगों ने रात तक एक मजार देखा था, सुबह जब वे उसी स्थान पर पहुंचे तो पूरा दृश्य बदल चुका था. जहां पहले मजार दिखाई देती थी, वहां अब पेड़-पौधे और हरियाली नजर आ रही थी.

मामला इटावा सफारी पार्क के पीछे बीहड़ क्षेत्र में स्थित सैयद बाबा की मजार से जुड़ा है. वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में इस मजार से जुड़े निर्माण को हटाकर जमीन को खाली कराया गया. इसके बाद उसी स्थान पर वृक्षारोपण कर दिया गया. बताया जा रहा है कि कार्रवाई इतनी गोपनीय और शांतिपूर्ण तरीके से की गई कि आसपास के अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी तब हुई, जब काम पूरा हो चुका था.

रात में चला अभियान, सुबह बदली तस्वीर
स्थानीय लोगों के अनुसार देर रात प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुईं. सुरक्षा व्यवस्था के बीच सबसे पहले मजार परिसर में मौजूद सामग्री और अवशेषों को हटाया गया. इसके बाद बुलडोजर की मदद से वहां बने कमरे और अन्य निर्माण को ध्वस्त किया गया. कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया. प्रशासन ने कोशिश की कि प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और किसी तरह की अव्यवस्था न हो. सुबह जब लोगों ने इलाके का रुख किया तो वहां का नजारा बदल चुका था. ध्वस्तीकरण के बाद मलबा भी हटा दिया गया था और जमीन को समतल कर वन विभाग की ओर से वृक्षारोपण शुरू कर दिया गया था. कई बड़े पौधों के साथ सैकड़ों छोटे पौधे भी लगाए गए. इसी बदलाव ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. सोशल मीडिया पर भी तस्वीरें और वीडियो साझा किए जाने लगे, जिनमें रात और सुबह के दृश्य का अंतर साफ दिखाई दे रहा था.

आखिर क्यों हुई कार्रवाई?
जानकारी के अनुसार वन विभाग काफी समय से इस मामले की जांच कर रहा था. विभाग का कहना था कि जिस भूमि पर मजार और उससे जुड़े निर्माण मौजूद थे, वह वन विभाग की भूमि है. ऐसे में निर्माण की वैधता से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे. वन विभाग की ओर से मजार के केयरटेकर फजले इलाही को नोटिस जारी किया गया था. नोटिस में भूमि और निर्माण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था. सूत्रों के अनुसार कई महीनों तक सुनवाई चलती रही. इस दौरान अलग-अलग तारीखों पर पक्षकारों को दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया. लेकिन वन विभाग का दावा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके. यहीं से मामला आगे बढ़ा और विशेष वन न्यायालय तक पहुंच गया.

तीन महीने चली प्रक्रिया
बताया जा रहा है कि कार्रवाई अचानक नहीं हुई. इसके पीछे करीब तीन महीने तक चली प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया रही. वन विभाग की ओर से लगातार यह पूछा जाता रहा कि जिस भूमि पर निर्माण है, उसके स्वामित्व और वैधता से जुड़े कागजात प्रस्तुत किए जाएं. विभाग का कहना था कि यदि निर्माण वैध है तो संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं. सुनवाई के दौरान कई अवसर दिए गए, लेकिन कथित तौर पर कोई ऐसा दस्तावेज सामने नहीं आया जो निर्माण को वैध साबित कर सके.  इसके बाद विशेष वन विभाग की अदालत ने मामले में आदेश जारी किया, जिसके आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ.

मीडिया से दूर रखी गई पूरी कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि कार्रवाई को मीडिया की नजरों से काफी हद तक दूर रखा गया. आमतौर पर इस तरह के अभियानों के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के बयान सामने आते हैं और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाती है. लेकिन इस मामले में अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए. ध्वस्तीकरण के बाद भी जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया. यही वजह है कि कार्रवाई को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई. स्थानीय स्तर पर चर्चा यह भी रही कि प्रशासन किसी भी प्रकार के विवाद या तनाव से बचना चाहता था. इसलिए पूरे अभियान को बेहद शांत और नियंत्रित तरीके से अंजाम दिया गया.

रेंजर ने पहले ही दिए थे संकेत
इस मामले में पहले बढ़पुरा वन रेंज के रेंजर अशोक शर्मा ने बातचीत के दौरान संकेत दिए थे कि विभाग भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है. उन्होंने बताया था कि संबंधित पक्ष से लगातार कागजात मांगे जा रहे हैं और वन भूमि पर अनधिकृत निर्माण को लेकर नोटिस भी जारी किया गया है. रेंजर के अनुसार यदि वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं तो नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी. उस समय यह बयान सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना गया था, लेकिन अब ध्वस्तीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया कि विभाग कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा था.

वृक्षारोपण बना चर्चा का विषय
ध्वस्तीकरण के बाद जिस तेजी से वृक्षारोपण किया गया, वह भी चर्चा का विषय बना हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई पूरी होते ही वन विभाग की टीम ने क्षेत्र को हरित स्वरूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी. बड़े पौधों के साथ-साथ बड़ी संख्या में नए पौधे रोपे गए. वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि भूमि को उसके मूल स्वरूप में विकसित करने की योजना के तहत यह कदम उठाया गया. चूंकि क्षेत्र सफारी पार्क और वन क्षेत्र के नजदीक स्थित है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को प्राथमिकता दी गई. यही वजह है कि जिस स्थान पर कुछ घंटे पहले तक निर्माण मौजूद था, वहां अब हरियाली दिखाई दे रही है.

लोगों के बीच चर्चा तेज
कार्रवाई के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कुछ लोग इसे वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं. हालांकि प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार कार्रवाई न्यायालय के आदेश और विभागीय प्रक्रिया के बाद की गई है. इसलिए अधिकारियों का जोर कानूनी पहलुओं पर है. उधर, सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा उस बदलाव की हो रही है जो कुछ घंटों के भीतर दिखाई दिया. लोगों का कहना है कि रात और सुबह के बीच इतनी बड़ी तस्वीर बदल जाना अपने आप में चर्चा का विषय है.

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports