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हरियाली बढ़ाने के लिए मनरेगा से पहाड़ियों पर हरित मॉडल विकसित करेगा प्रशासन

सोनभद्र सोनांचल की सूखी और बंजर पहाड़ियां अब हरियाली की नई कहानी लिखने जा रही हैं। इस वर्ष पौधारोपण अभियान को नवाचार से जोड़ते हुए जिले की छह प्रमुख पहाड़ियों को हरित माडल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। मनरेगा के माध्यम से जुड़वानी पहाड़ी, गड़ही पहाड़ी, अंबेडकर नगर पहाड़ी,…

हरियाली बढ़ाने के लिए मनरेगा से पहाड़ियों पर हरित मॉडल विकसित करेगा प्रशासन

सोनभद्र
सोनांचल की सूखी और बंजर पहाड़ियां अब हरियाली की नई कहानी लिखने जा रही हैं। इस वर्ष पौधारोपण अभियान को नवाचार से जोड़ते हुए जिले की छह प्रमुख पहाड़ियों को हरित माडल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है।

मनरेगा के माध्यम से जुड़वानी पहाड़ी, गड़ही पहाड़ी, अंबेडकर नगर पहाड़ी, रासपहाड़, सरहद पहाड़ी और भवरहवा पहाड़ी पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण कराया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखते हुए स्थायी हरित आवरण तैयार करना है।

पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को साथ लेकर चल रही इस पहल में आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। पहाड़ियों की ढलानों पर ट्रेंच (खाई) बनाई जाएंगी, जिनमें वर्षा का पानी संचित होगा। इससे पौधों को लंबे समय तक नमी मिलती रहेगी और भूजल स्तर को भी मजबूती मिलेगी।

अभियान में स्थानीय ग्रामीणों और सामुदायिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे पौधों की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी साझा हो सके।

ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था होगी समृद्ध
जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने की तैयारी है। इसके तहत प्रत्येक विकास खंड में 10-10 फलोद्यान विकसित किए जाएंगे। इन फलोद्यानों की देखभाल स्वयं सहायता समूहों को सौंपी जाएगी। इससे जहां महिलाओं को रोजगार और आय के अवसर मिलेंगे, वहीं गांवों में फल उत्पादन बढ़ने से पोषण और पर्यावरण दोनों को लाभ पहुंचेगा। यह पहल आने वाले वर्षों में जिले की पहचान को नई हरित दिशा देगी।

क्या है ट्रेंच तकनीक
पौधारोपण को सफल बनाने में ट्रेंच तकनीक को काफी प्रभावी माना जाता है। इसके अंतर्गत पहाड़ियों पर लंबी और संकरी खाइयां बनाई जाती हैं, जिनमें वर्षा जल एकत्र होता है। धीरे-धीरे यह पानी मिट्टी में समाहित होकर पौधों की जड़ों तक नमी पहुंचाता है। इससे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी पौधों की जीवितता बढ़ती है। साथ ही मिट्टी का कटाव रुकता है और भूजल पुनर्भरण को भी गति मिलती है।

हरियाली के साथ बढ़ेगी आजीविका
फलोद्यान विकास योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण का भी माध्यम बनेगी। स्वयं सहायता समूहों को फलोद्यानों की देखभाल और प्रबंधन की जिम्मेदारी मिलने से उन्हें नियमित आय का अवसर मिलेगा। आंगनबाड़ी केंद्र व परिषदीय विद्यालयों में इसे भेजा जाएगा। यह माडल हरित विकास और ग्रामीण आर्थिक सुदृढ़ीकरण का संतुलित उदाहरण बन सकता है।

जनपद के छह पहाड़ियों पर ट्रेंच बनाकर पौधारोपण किया जाएगा। इसको लेकर सभी तैयारी अपने अंतिम चरण में है। निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण को लेकर ऐसी पहल की जरूरत है। आमजन भी अधिक से अधिक पौधा रोपण के कार्य में आगे आएं।

    चर्चित गौड़, जिलाधिकारी, सोनभद्र

 

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