पेट्रोल को रिप्लेस करेगा E100 Fuel? किसानों के लिए वरदान, लेकिन राह में कई बड़ी चुनौतियां

  नई दिल्ली E100 Fuel Explained- Pros & Cons: पेट्रोल महंगा है, डीजल का भविष्य धुंधला है और इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर अभी भी रेंज एंजायटी का साया मंडरा रहा है. ऐसे में सरकार ने अब एक नया दांव चला है. E100 फ्यूल को मंजूरी मिल गई है और दावा किया जा रहा है कि यह…

पेट्रोल को रिप्लेस करेगा E100 Fuel? किसानों के लिए वरदान, लेकिन राह में कई बड़ी चुनौतियां

  नई दिल्ली

E100 Fuel Explained- Pros & Cons: पेट्रोल महंगा है, डीजल का भविष्य धुंधला है और इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर अभी भी रेंज एंजायटी का साया मंडरा रहा है. ऐसे में सरकार ने अब एक नया दांव चला है. E100 फ्यूल को मंजूरी मिल गई है और दावा किया जा रहा है कि यह भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम कर सकता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई प्योर इथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियां पेट्रोल को रिप्लेस कर पाएंगी, या फिर यह भी लंबा प्रयोग साबित होगा? आइए समझते हैं कि E100 फ्यूल आखिर है क्या, इसके फायदे क्या हैं और इसकी राह में कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। 

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, E100 फ्यूल के लिए नियमों को मंजूरी दे दी गई है. इसके लिए उन्होंने रात 8 बजे फाइल पर हस्ताक्षर किए और अब E100 फ्यूल कानूनी रूप से देश में इस्तेमाल होने के लिए तैयार है। 

सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल चर्चा में है. केंद्रीय मंत्री का कहना है कि, आने वाले डेढ़-दो महीनों में हुंडई, टोयोटा और एमजी मोटर जैसी कंपनियां भी अपनी फ्लेक्स फ्यूल कारों को पेश करेंगी. हाल ही में उन्होंने मारुति सुजुकी की लोकप्रिय कार वैनगआर के फ्लेक्स फ्यूल वर्जन को पेश किया था. जिसे शुरुआत में फ्लीट ऑपरेटर्स (कैब सर्विस प्रोवाइडर्स) के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. आगे चलकर कंपनी इसे प्राइवेट व्हीकल के तौर पर भी पेश कर सकती है। 

क्या है E100 फ्यूल?
E100 एक ऐसा फ्यूल है जिसमें लगभग 100 प्रतिशत इथेनॉल होता है और इसमें पारंपरिक पेट्रोल नहीं मिलाया जाता. इथेनॉल एक ऐसा फ्यूल है, जिसे गन्ना, मक्का, चावल और और कृषि अपशिष्ट जैसी चीजों से तैयार किया जाता है. भारत में अभी E20 पेट्रोल का इस्तेमाल पहले से ही हो रहा है. जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है. E100 इसी दिशा में अगला कदम है, जिसे पूरी तरह इथेनॉल पर चलने के लिए तैयार किया गया है। 

E20 फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर पहले ही तमाम शिकायतें सामने आ चुकी हैं. कई वाहन मालिकों ने कहा है कि, E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद उनके वाहनों का माइलेज गिरा है और साथ ही मेंटनेंस कॉस्ट भी बढ़ी है. इस बात से सरकार भी इंकार नहीं कर रही है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सोशल नेटवर्किंग साइट 'X' पर अपने एक बयान में कहा है कि, "रेगुलर पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण, माइलेज में मामूली कमी आती है. जो E10 के लिए डिज़ाइन किए गए और E20 के लिए कैलिब्रेट किए गए चार पहिया वाहनों के लिए अनुमानित 1-2%, और अन्य वाहनों के लिए लगभग 3-6% है। 

E100 फ्यूल पर इतना जोर क्यों?
सरकार की मानें तो भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसे में सरकार E100 फ्यूल के जरिए इंपोर्टेड तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है. देश में तैयार होने वाला इथेनॉल के जरिए तेल आयात पर होने वाला खर्च भी घट सकता है। 

बताया जा रहा है कि, इसका एक बड़ा फायदा किसानों को भी मिलेगा. इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है. सरकार के अनुसार इथेनॉल प्रोग्राम की वजह से अब तक कच्चे तेल के आयात में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है और किसानों को करीब 80,000 करोड़ रुपये की एक्स्ट्रा इनकम हुई है। 

क्या E100 फ्यूल पेट्रोल की जगह ले सकता है?
अब एक बड़ा सवाल ये है कि, क्या E100 फ्यूल पूरी तरह से पेट्रोल को रिप्लेस कर सकता है. सैद्धांतिक रूप से E100 फ्यूल पेट्रोल की जगह ले सकता है, लेकिन यह बदलाव तुरंत संभव नहीं है. इसके लिए स्पेशली डिजाइन किए गए वाहनों की जरूरत होगी. मौजूदा समय में भारत की सड़कों पर चल रही करोड़ों पेट्रोल कारें, बाइक और स्कूटर E100 फ्यूल पर चलने के लिए तैयार नहीं हैं. ये वाहन रेगुलर पेट्रोल या E20 फ्यूल के लिए बनाए गए हैं। 

इन वाहनों में एक बड़ी संख्या उनकी भी है, जो पूरी तरह से E20 फ्यूल के लिए भी तैयार नहीं है. यही कारण है कि, पुराने वाहन मालिकों को नए फ्यूल के इस्तेमाल के बाद तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. एक अनुमान है कि, आने वाले सालों में E20 और E100 फ्यूल दोनों साथ-साथ मौजूद रहेंगे. धीरे-धीरे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ने के बाद ही E100 का इस्तेमाल बड़े स्तर पर संभव हो पाएगा। 

किन वाहनों में इस्तेमाल होगा E100?
E100 फ्यूल हर वाहन में नहीं डाला जा सकता. इथेनॉल का गुण और व्यवहार पेट्रोल से बिल्कुल अलग होता है, इसलिए इंजन, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और फ्यूल लाइन में विशेष बदलाव करने पड़ते हैं. इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहन जरूरी होते हैं. मारुति सुजुकी ने वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप पेश किया है, जिसे E100 जैसे हाई इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पर चलाया जा सकता है. दोपहिया सेगमेंट में हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन भी पेश किए हैं. इसके अलावा सुजुकी के पोर्टफोलियो में भी एक मॉडल है और होंडा ने भी अपनी सीबी 350 के फ्लेक्स फ्यूल मॉडल को पेश किया था, जिसे अब डिस्कंटीन्यू किया जा चुका है। 

फ्लेक्स-फ्यू वाले वाहन और उनकी कीमत
वाहन     कीमत (एक्स-शोरूम)
HF Deluxe Flex Fuel     72,792 रुपये 
Splendor+ Flex Fuel     82,710 रुपये 
Suzuki Gixxer SF 250 Flex Fuel     2,26,382 रुपये
Maruti Wagon R Flex Fuel     बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं

 E100 फ्यूल के बड़े फायदे
E100 फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो सकती है. चूंकि इथेनॉल देश में ही तैयार किया जा सकता है, इसलिए इसका इसका इस्तेमाल बढ़ा कर पेट्रोल की कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद की जा रही है. हाल ही में E85 फ्यूल को दिल्ली में लॉन्च किया गया है, जिसकी कीमत 82.12 रुपये प्रतिलीटर है जो रेगुलर पेट्रोल के मुकाबले (102.12 रुपये प्रतिलीटर) तकरीबन 20 रुपये सस्ता है. पर्यावरण के लिहाज से भी इथेनॉल को बेहतर माना जाता है. यह ट्रेडिशनल फॉसिल फ्यूल की तुलना में ज्यादा क्लीन तरीके से जलता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है। 

E100 फ्यूल के नुकसान
जहां E100 फ्यूल के फायदे हैं वहीं कुछ नुकसान भी हैं. पेट्रोल की तुलना में E100 फ्यूल की एनर्जी डेंसिटी कम होती है. इसका मतलब है कि समान दूरी तय करने के लिए वाहन को अधिक फ्यूल की जरूरत पड़ सकती है. दूसरी बड़ी समस्या व्हीकल कंम्पैटिबिलिटी है. मौजूदा पेट्रोल वाहन सीधे E100 पर नहीं चल सकते. इसके लिए ग्राहकों को फ्लेक्स-फ्यूल वाहन खरीदने होंगे. जो एक बड़ा निवेश होगा, क्योंकि ऐसे वाहन रेगुलर पेट्रोल वाहनों की तुलना में ज्यादा महंगे होंगे. इसके अलावा हर कोई एक बड़े इन्वेस्टमेंट के लिए तैयार नहीं होगा. ख़ासकर तब, जब उसने हाल ही में नई कार खरीदी हो. इसके अलावा पेट्रोल पंपों को भी E100 फ्यूल के स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए नई सुविधाएं डेवलप करनी होंगी, जिससे शुरुआती लागत बढ़ सकती है। 

राह नहीं… आसान
E100 फ्यूल के फायदे कई हैं, लेकिन इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल रातोंरात संभव नहीं होगा. सबसे बड़ी चुनौती देशभर में पर्याप्त इथेनॉल फ्यूल स्टेशन तैयार करना है. जब तक मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनेगा, तब तक लोग E100 आधारित वाहन खरीदने में झिझक सकते हैं. दूसरी चुनौती फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की उपलब्धता है. फिलहाल ऐसे वाहन सीमित संख्या में हैं या अभी डेवलपिंग फेज में हैं। 

सरकार को आने वाले समय में ग्राहकों को फ्यूल के लिए ज्यादा विकल्प देने होंगे. मसलन, पेट्रोल पंपों पर E20 से लेकर E100 फ्यूल तक के अलग-अलग ऑप्शन मौजूद होने चाहिए और इन सभी फ्यूल के डिस्पेंसर भी भिन्न रंग-रूप में होने चाहिए. ताकि एक आम ग्राहक आसानी से ये समझ सके कि, उसे अपने वाहन के फ्यूल टाइप के अनुसार किस तरह का ईंधन लेना चाहिए. इसके लिए पेट्रोल पंपों पर मौजूद कर्मचारियों को भी बाकायदा ट्रेंनिंग देनी होगी, ताकि वो ग्राहकों को सही फ्यूल बेच सकें। 

E100 फ्यूल भारत के लिए केवल एक नया फ्यूल नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे तेल आयात घट सकता है, किसानों को फायदा मिल सकता है और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, वाहन तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्पादन क्षमता जैसी चुनौतियों को पार किए बिना इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल संभव नहीं होगा. आने वाले सालों में यह देखना दिलचस्प होगा कि E100 फ्यूल भारत की सड़कों पर कितना बड़ा बदलाव ला पाता है। 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports