,

प्रदूषण पर चंडीगढ़ का बड़ा कदम! 2×2 KM ग्रिड में मापा जाएगा कार्बन फुटप्रिंट, हॉटस्पॉट्स की होगी पहचान

चंडीगढ़ पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में चंडीगढ़ प्रशासन बड़ा कदम उठाने जा रहा है। शहर में पहली बार व्यापक और वैज्ञानिक कार्बन फुटप्रिंट एवं कार्बन स्टॉक असेसमेंट किया जाएगा। इस अध्ययन के जरिए यह पता लगाया जाएगा। प्रशासन पूरे शहर को 2×2 किलोमीटर के ग्रिड में बांटकर अध्ययन करेगा। हाई-रिजॉल्यूशन…

प्रदूषण पर चंडीगढ़ का बड़ा कदम! 2×2 KM ग्रिड में मापा जाएगा कार्बन फुटप्रिंट, हॉटस्पॉट्स की होगी पहचान

चंडीगढ़

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में चंडीगढ़ प्रशासन बड़ा कदम उठाने जा रहा है। शहर में पहली बार व्यापक और वैज्ञानिक कार्बन फुटप्रिंट एवं कार्बन स्टॉक असेसमेंट किया जाएगा। इस अध्ययन के जरिए यह पता लगाया जाएगा।

प्रशासन पूरे शहर को 2×2 किलोमीटर के ग्रिड में बांटकर अध्ययन करेगा। हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी और जीआईएस मैपिंग के जरिए इलाकेवार प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की पहचान की जाएगी। इस आधार पर भविष्य की पर्यावरण और जलवायु संबंधी नीतियां तैयार की जाएंगी।

2030 तक क्लाइमेट प्लान तैयार:-
    सात प्रमुख क्षेत्रों का होगा मूल्यांकन: अध्ययन के दौरान ऊर्जा खपत, परिवहन, भवन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर, कचरा प्रबंधन, उद्योग, कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही शहर के हरित क्षेत्रों की कार्बन अवशोषण क्षमता का भी वैज्ञानिक मूल्यांकन होगा।

    पेड़ों के साथ मिट्टी और जड़ों का भी होगा सर्वे: अध्ययन में केवल पेड़ों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी जड़ों के बायोमास और मिट्टी में मौजूद ऑर्गेनिक कार्बन की भी गणना की जाएगी। शहर के लगभग 4,500 हेक्टेयर ग्रीन कवर, जिसमें 3,200 हेक्टेयर अधिसूचित वन क्षेत्र और 26 वर्ग किलोमीटर में फैली सुखना वाइल्डलाइफ सेंचुरी शामिल है, का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। सुखना सेंचुरी के लिए अलग से कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन डेटाबेस तैयार होगा।

    2030 तक का तैयार होगा जलवायु रोडमैप: यह अध्ययन पिछले 5 से 10 वर्षों के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के रुझानों का विश्लेषण करेगा। इसके आधार पर 2030 और उससे आगे के लिए कार्बन उत्सर्जन का अनुमान लगाया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, साइकिलिंग और कचरा प्रबंधन से जुड़ी नई रणनीतियां तैयार की जाएंगी।

    सौर ऊर्जा से हर साल बच रहे 57,960 टन CO₂: प्रशासन के अनुसार शहर में सरकारी गैर-आवासीय भवनों पर बड़े स्तर पर सोलर पैनल लगाए गए हैं।
 वर्तमान में 377 सरकारी इमारतों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित है, जिससे हर वर्ष करीब 8.4 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन हो रहा है। इससे सालाना लगभग 57,960 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हो रहा है।

    EV और साइकिलिंग से भी घटा कार्बन उत्सर्जन: चंडीगढ़ में पिछले पांच वर्षों के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में 16 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। 

इससे वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है और कार्बन बचत 26 गुना तक बढ़ी है। वहीं, पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग सिस्टम के जरिए प्रतिवर्ष लगभग 36 हजार किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम हो रहा है, जो करीब 1,600 पेड़ लगाने के बराबर माना जाता है।

4 साल में कार्बन बचत में बड़ा उछाल
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में शहर की कुल कार्बन बचत करीब 5.65 किलोटन CO₂ समतुल्य थी, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर लगभग 150 किलोटन CO₂ समतुल्य पहुंच गई है। प्रशासन का मानना है कि नया वैज्ञानिक अध्ययन चंडीगढ़ को देश के अग्रणी लो-कार्बन शहरों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports