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समय से पहले बारिश का असर: झज्जर के 274 ईंट भट्ठों पर संकट, करोड़ों का नुकसान

झज्जर  समय से पहले क्षेत्र में हुई बारिश ने जिले के ईंट भट्ठा उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया है। जिससे ईंटों का उत्पादन प्रभावित हुआ है, ऐसा होने से भट्ठा संचालकों को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने…

समय से पहले बारिश का असर: झज्जर के 274 ईंट भट्ठों पर संकट, करोड़ों का नुकसान

झज्जर
 समय से पहले क्षेत्र में हुई बारिश ने जिले के ईंट भट्ठा उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया है। जिससे ईंटों का उत्पादन प्रभावित हुआ है, ऐसा होने से भट्ठा संचालकों को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में ईंटों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे मकान निर्माण और अन्य निर्माण कार्य महंगे हो जाएंगे।

जानकारी के अनुसार जिले में पहले करीब 450 ईंट भट्ठे संचालित होते थे, लेकिन बढ़ती लागत, पर्यावरणीय नियमों और लगातार हो रहे घाटे के कारण अब केवल लगभग 274 भट्ठों पर ही उत्पादन हो रहा है।

इस सीजन में भी मौसम की मार के चलते अपेक्षित संख्या में ईंटें तैयार नहीं हो सकीं। अप्रैल, मई और जून के दौरान ईंट निर्माण का मुख्य कार्य होता है, लेकिन इस बार इन महीनों में कई बार हुई बारिश ने कच्ची ईंटों को नुकसान पहुंचाया और उत्पादन प्रक्रिया को बाधित कर दिया।

मौसम की मार से भट्ठा मालिक परेशान, जिले में घटकर रह गए 274 ईंट भट्ठे
भट्ठा संचालकों का कहना है कि ईंट निर्माण पूरी तरह मौसम पर निर्भर करता है। लगातार बारिश के कारण कच्ची ईंटें सूख नहीं पातीं और बड़ी संख्या में तैयार माल भी खराब हो जाता है। इससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है और नुकसान का बोझ भट्ठा मालिकों को उठाना पड़ता है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार इस बार करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

एनजीटी नियमों और बारिश की दोहरी मार, व्यवसाय घाटे का सौदा बना
ईंट भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान सुरेंद्र जौंधी ने बताया एनजीटी की गाइडलाइन, बढ़ती मजदूरी, ईंधन की लागत और अन्य खर्चों के कारण ईंट भट्ठा व्यवसाय पहले ही कठिन दौर से गुजर रहा है।

उन्होंने कहा कि भट्ठा संचालकों को वर्ष में केवल अप्रैल, मई और जून जैसे सीमित समय के लिए ही उत्पादन का अवसर मिलता है। ऐसे में यदि इसी दौरान में बारिश हो जाए तो नुकसान की भरपाई करना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस बार मौसम ने उद्योग को गहरी चोट पहुंचाई है और कई संचालकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

कम उत्पादन का सीधा असर श्रमिकों की आय पर भी पड़ा
भट्ठा ठेकेदार मामन गुलिया ने बताया कि 30 जून से पहले अधिकांश ठेकेदारों ने प्रवासी श्रमिकों का हिसाब-किताब कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा कि ईंट भट्ठा उद्योग हजारों श्रमिकों के रोजगार का आधार रहा है, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च और मौसम की मार के कारण यह व्यवसाय अब संकट में दिखाई दे रहा है। कम उत्पादन का सीधा असर श्रमिकों की आय पर भी पड़ा है।

भट्ठों को राहत की आवश्यकता, बंद होने की कगार पर कई इकाइयां
वहीं बादली के सरपंच आनंद गुलिया उर्फ नीटू ने कहा कि वे कई वर्षों से ईंट भट्ठा व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। बारिश के कारण भट्ठा मालिकों को अपेक्षा से कहीं अधिक नुकसान हुआ है।

उनका मानना है कि एनजीटी को ईंट भट्ठा संचालकों को कुछ राहत प्रदान करनी चाहिए ताकि यह उद्योग दोबारा मजबूती से खड़ा हो सके। उन्होंने कहा कि जिले में कई भट्ठे पहले ही बंद हो चुके हैं और यदि परिस्थितियां नहीं सुधरीं तो और भी इकाइयों पर संकट आ सकता है।

कम बनीं ईंटें, बढ़ सकते हैं दाम, आशियाना बनाना होगा महंगा
वर्तमान में बाजार में ईंटों का भाव करीब 8 हजार रुपये प्रति हजार ईंट बताया जा रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि उत्पादन कम रहने और मांग बढ़ने की स्थिति में आने वाले दिनों में यह भाव बढ़कर 9 हजार रुपये प्रति हजार ईंट तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है तो मकान निर्माण, दुकानों, व्यावसायिक भवनों तथा अन्य निर्माण परियोजनाओं की लागत बढ़ जाएगी।

 

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