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डिग्री में नाम का अनुवाद कर दिया! ‘गुलाब’ बने ‘Rose’, विश्वविद्यालय की लापरवाही उजागर

रांची. रांची विश्वविद्यालय एक और कारनामा सामने आया है। बैचलर ऑफ एजुकेशन की डिग्री में विवि ने हिंदी में गुलाब एक्का लिखा है और फिर नीचे अंग्रेजी में रोज एक्का लिखा हुआ है। यह सब काम परीक्षा विभाग का अंक पत्र से लेकर डिग्री देने का जिम्मा संभालने वाली निजी एजेंसी एनसीसीएफ (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स…

डिग्री में नाम का अनुवाद कर दिया! ‘गुलाब’ बने ‘Rose’, विश्वविद्यालय की लापरवाही उजागर

रांची.

रांची विश्वविद्यालय एक और कारनामा सामने आया है। बैचलर ऑफ एजुकेशन की डिग्री में विवि ने हिंदी में गुलाब एक्का लिखा है और फिर नीचे अंग्रेजी में रोज एक्का लिखा हुआ है। यह सब काम परीक्षा विभाग का अंक पत्र से लेकर डिग्री देने का जिम्मा संभालने वाली निजी एजेंसी एनसीसीएफ (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) का कमाल है।

यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। अभी फरवरी महीने में ही सिल्ली एवं वीमेंस कॉलेज के 130 से अधिक छात्र-छात्राओं का एडमिट कार्ड में भी नाम गलत प्रिंट कर दिया था।

सिल्ली के 81 छात्र-छात्राओं के गलत नाम
सिल्ली के कुल 81 छात्र-छात्राओं के एडमिट कार्ड में उनका नाम गलत प्रकाशित किया, वहीं रांची वीमेंस कालेज यूजी सत्र 22–26 के गणित एवं टीआरएल विषय के 40 से अधिक छात्राओं का नाम भी एडमिट कार्ड में गलत प्रिंट किया था। एजेंसी जब से आई है, वह लगातार ऐसी गड़बड़ियां करती आ रही हैं। सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं को फेल करना या किसी विषय में शून्य अंक अंकित कर देना इस एजेंसी के लिए बड़ी बात नहीं। इसके बाद फिर छात्र परेशान होते हैं।

एनसीसीफ को ब्लैकलिस्टेड करने की गुहार
इस निजी परीक्षा एजेंसी की कार्यशैली को लेकर बार-बार लोक भवन से गुहार लगाई गई और मांग की गई कि इसे ब्लैकलिस्टेड किया जाए। रांची विवि भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। अबुआ अधिकार मंच यूथ व स्टूडेंट वेलफेयर इंचार्ज अभिषेक शुक्ला ने कहा कि एनसीसीएफ की लापरवाह कार्यप्रणाली का सीधा एवं प्रतिकूल प्रभाव विश्वविद्यालय में पठन-पाठन करने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। छात्र-छात्राएं त्रुटि ठीक कराने के लिए विश्वविद्यालय कार्यालय का लगाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई एवं मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

रांची विवि ने 2022 में सौंपा काम
रांची विवि ने इस एजेंसी को, जिसका मुख्य काम आलू-प्याज बेचना है, उसे परीक्षा विभाग का काम 2022 में सौंप दिया गया। इसके पहले परीक्षा विभाग रांची विश्वविद्यालय के अधीन था तब उसका सालाना आय चार करोड़ व खर्च करीब दो करोड़ के अंदर ही था। एजेंसी आने के साथ ही परीक्षा शुल्क में वृद्धि की गई और रांची विवि एनसीसीएफ को इसी काम के लिए सालाना लगभग 15 करोड़ रुपये का भुगतान करता है। सबसे बड़ी बात यह है कि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्रों का डाटा सुरक्षित रखना विवि का काम है, लेकिन अब ये डाटा निजी एजेंसी के हाथों में हैं। विवि ने किसी लाभ के कारण इस एजेंसी को काम सौंपा है, पता नहीं। परीक्षा विभाग में जो कर्मचारी थे, उन्हें इधर-उधर विभागों में रख दिया।

बेकार पड़ा है एग्जामिनेशन डेटा प्रोसेसिंग सेल
रांची विवि का मोरहाबादी स्थित एग्जामिनेशन डेटा प्रोसेसिंग सेल बेकार पड़ा है। यहां रिजल्ट प्रकाशन से लेकर मार्कशीट, प्रोविजनल, माइग्रेशन, डिग्री का प्रिंटिंग होता था। सेल जब तक कार्यरत रहा, समय से रिजल्ट का प्रकाशन होता था। छात्रों को परेशानी नहीं होती थी। एक दर्जन लोग यहां काम करते थे। और इन सब कामों में वार्षिक खर्च करीब एक करोड़ से नीचे ही होता था। लेकिन तत्कालीन कुलपति डॉ अजीत कुमार सिन्हा ने एनसीसीएफ को दिसंबर 2022 काम सौंप दिया। एजेंसी सीनेट हाल से ही अपना पूरा काम ऑपरेट करता है।

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