,

तलाक के एक दशक बाद हुआ पुनर्मिलन, बेटियों की खातिर फिर साथ आए पति-पत्नी

10 साल पहले हुआ था तलाक सखी की समझाइश से बेटियों के लिए फिर एक हुआ परिवार भोपाल  मध्यप्रदेश में संकटग्रस्त, पीड़ित और असहाय महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए संचालित 'वन स्टॉप सेंटर' (सखी) मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। ऐसा ही एक अविश्वसनीय और दिल को छू लेने वाला मामला मध्यप्रदेश के…

तलाक के एक दशक बाद हुआ पुनर्मिलन, बेटियों की खातिर फिर साथ आए पति-पत्नी

10 साल पहले हुआ था तलाक

सखी की समझाइश से बेटियों के लिए फिर एक हुआ परिवार

भोपाल 

मध्यप्रदेश में संकटग्रस्त, पीड़ित और असहाय महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए संचालित 'वन स्टॉप सेंटर' (सखी) मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। ऐसा ही एक अविश्वसनीय और दिल को छू लेने वाला मामला मध्यप्रदेश के दतिया जिले से सामने आया है, जहां कानूनी तौर पर तलाक होने के 10 वर्ष बाद वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से एक परिवार को पुनः मिलाया गया। इस पहल ने न सिर्फ दो मासूम बच्चियों को उनके पिता का साया वापस दिलाया, बल्कि टूट चुके एक वैवाहिक रिश्ते में फिर से खुशियों के रंग भर दिए।

यह कहानी दतिया की रहने वाली 36 वर्षीय उर्मिला (बदला हुआ नाम) की है। 10 वर्ष पूर्व न्यायालय द्वारा पति से तलाक होने के बाद उर्मिला अपनी दो मासूम बच्चियों के साथ मायके में रह रही थी। उर्मिला के वृद्ध पिता मजदूरी करके किसी तरह अपनी बेटी और दोनों नातिनों का पेट पाल रहे थे और तंगहाली के बावजूद बच्चियों को अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे। वर्तमान समय में महंगाई और बढ़ती उम्र के कारण वृद्ध पिता के लिए पूरे परिवार का खर्च उठाना असंभव हो गया। अपनी बच्चियों के भविष्य को अंधकार में डूबता देख, उर्मिला ने हिम्मत जुटाई और दतिया कलेक्टर की जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाते हुए एक शिकायती पत्र सौंपा।

वन स्टॉप सेंटर से मिली मदद

महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया के जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार उपाध्याय के माध्यम से यह संवेदनशील मामला तुरंत 'वन स्टॉप सेंटर' को ट्रांसफर किया गया। सेंटर पर जब उर्मिला को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया, तो 10 साल का दर्द और भविष्य की चिंता उसकी आँखों से बह निकली। उसकी बस यही चिंता थी कि क्या तलाक के इतने सालों बाद उसका पति उसे और बच्चियों को स्वीकार करेगा? वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक सुरीना गौतम ने उर्मिला को ढांढस बंधाया और हर संभव प्रयास कर उसका हक दिलाने का अटूट विश्वास दिलाया।

कानूनी पेचीदगियों पर भारी पड़ी 'समझाइश'

वन स्टॉप सेंटर की टीम ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मदद से उर्मिला के पति और उसके परिवारजनों को कार्यालय आमंत्रित किया। काउंसलिंग के दौरान पति ने 10 साल पुराने तलाक के कानूनी दस्तावेज पेश किए। कानूनी रूप से रिश्ता खत्म हो चुका था, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अभी बाकी था। विभाग के अधिकारियों और वन स्टॉप सेंटर की टीम ने कड़े वैधानिक रुख के बजाय बेहद संवेदनशील तरीके से संयुक्त काउंसलिंग की। उन्होंने पति और उसके परिवार को बच्चियों के भरण-पोषण, शिक्षा और उनके सुरक्षित भविष्य का अहसास कराया।

और खिल उठे चेहरे, लौट आई खुशियां

इस मैराथन काउंसलिंग और मानवीय समझाइश का असर यह हुआ कि पति और उसके भाइयों का दिल पिघल गया। पति न केवल कानूनी तलाक को भुलाकर उर्मिला को पत्नी के रूप में दोबारा स्वीकार करने को राजी हुआ, बल्कि दोनों बच्चियों की पढ़ाई और पूरी जिम्मेदारी उठाने की सहर्ष सहमति दे दी। 10 साल से मायूसी का जीवन जी रही उर्मिला का चेहरा उम्मीद की नई किरण से खिल उठा। वन स्टॉप सेंटर के दफ्तर में जो परिवार कभी कानूनी तौर पर अलग हुआ था, वह एक-दूसरे का हाथ थामकर, खुशी-खुशी अपने घर के लिए रवाना हुआ। उर्मिला ने नम आंखों से दतिया प्रशासन और वन स्टॉप सेंटर का आभार व्यक्त किया।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports