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डॉ. कीर्ति की दोहरी उपलब्धि, NEET PG में टॉप और सेना में कैप्टन बनकर बढ़ाया रोहतक का मान

रोहतक. कभी भारतीय सेना के अधिकारियों के कंधों पर चमकते सितारों को देखकर उनके जैसी वर्दी पहनने का सपना देखने वाली गांव गरनावठी की बेटी डा. कीर्ति बड़क आज खुद भारतीय सेना में कैप्टन बन गई है। खास बात यह है कि कीर्ति बड़क गांव की पहली बेटी के रूप में कैप्टन बनी है। किसान…

डॉ. कीर्ति की दोहरी उपलब्धि, NEET PG में टॉप और सेना में कैप्टन बनकर बढ़ाया रोहतक का मान

रोहतक.

कभी भारतीय सेना के अधिकारियों के कंधों पर चमकते सितारों को देखकर उनके जैसी वर्दी पहनने का सपना देखने वाली गांव गरनावठी की बेटी डा. कीर्ति बड़क आज खुद भारतीय सेना में कैप्टन बन गई है।
खास बात यह है कि कीर्ति बड़क गांव की पहली बेटी के रूप में कैप्टन बनी है।

किसान परिवार से संबंध रखने वाली कीर्ति के पिता महावीर खेती करते हैं, जबकि उनकी माता सुनीता रानी गृहिणी है। बचपन से ही कीर्ति का सपना डाक्टर बनने का था। बता दें कीर्ति ने कक्षा 11वीं व 12वीं की पढ़ाई रोहतक के सरकारी स्कूल से की है। वहीं इसके बाद उन्होंने नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर मेडिकल क्षेत्र में कदम रखा, लेकिन इसी दौरान उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। कीर्ति ने बताया कि इस दौरान उन्होंने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) की परीक्षा भी पास की थी।

किस वजह से सेना में गईं कीर्ति?
इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों के साथ संवाद करने का अवसर मिला और सेना के अधिकारियों के कंधों पर लगे सितारों ने उन्हें आकर्षित किया। सेना का अनुशासन, सेवा भाव और अधिकारियों के कंधों पर लगे सितारे उन्हें इतने प्रभावित कर गए कि उन्होंने उसी समय तय कर लिया कि एक दिन वह भी सेना में अधिकारी बनेंगी। हालांकि इसके बाद उन्होंने एमएनएस के माध्यम से नर्सिंग क्षेत्र में जाने के बजाय केएमसी मणिपाल से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की, लेकिन डाक्टर बनने के बाद भी उनका लक्ष्य सेना की वर्दी पहनना ही रहा। इंटर्नशिप के साथ-साथ उन्होंने आर्मी मेडिकल कोर शार्ट सर्विस कमीशन की तैयारी शुरू की और अपने सपने को साकार करने के लिए लगातार मेहनत की। उन्होंने नीट पीजी में आल इंडिया 65वीं रैंक हासिल की।

डॉक्टर बनना उनके जीवन का पहला सपना था
इसके बाद उनका चयन भारतीय सेना में हुआ। कीर्ति का कहना है कि डॉक्टर बनना उनके जीवन का पहला सपना था, लेकिन भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश के सैनिकों की सेवा करना उनका सबसे बड़ा लक्ष्य था। वह चाहती है कि सीमाओं पर देश की रक्षा करने वाले जवानों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने में अपना योगदान दे सकें। बता दें कि उनके चचेरे चाचा भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके है। जबकि दादा पंजाब पुलिस में अपनी सेवाएं दे चुके है।

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