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हाई कोर्ट ने दिए निर्देश, MPHW भर्ती में अनुभव अंक जोड़कर तैयार की जाए नई मेरिट लिस्ट

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा में मल्टी-पर्पज हेल्थ वर्कर (पुरुष) भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत कर्मचारियों के अनुभव को केवल पदनाम के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) और पैरा मेडिकल…

हाई कोर्ट ने दिए निर्देश, MPHW भर्ती में अनुभव अंक जोड़कर तैयार की जाए नई मेरिट लिस्ट

चंडीगढ़.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा में मल्टी-पर्पज हेल्थ वर्कर (पुरुष) भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत कर्मचारियों के अनुभव को केवल पदनाम के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) और पैरा मेडिकल वर्कर (पीएमडब्ल्यू) के रूप में प्राप्त अनुभव को अनुभव अंक देने से इनकार करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित अधिकारियों को अभ्यर्थियों के अनुभव अंक जोड़कर उनकी मेरिट स्थिति दोबारा तय करने का निर्देश दिया है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने वर्ष 2015 के विज्ञापन के तहत एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) पदों की भर्ती से संबंधित याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने एनएचएम की विभिन्न योजनाओं के तहत कार्य किया था और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के समक्ष अनुभव प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किए थे, लेकिन उन्हें चयन मानदंडों के अनुसार अनुभव अंक नहीं दिए गए। उनका तर्क था कि यदि अनुभव अंक जोड़ दिए जाते तो वे अपने-अपने वर्ग में चयन क्षेत्र में आ जाते।राज्य सरकार और आयोग ने अदालत को बताया कि अनुभव अंक केवल उसी क्षमता में कार्य करने वाले उम्मीदवारों को दिए जा सकते हैं, जिन्होंने आरसीएच, एनआरएचएम, एनएचएम परियोजनाओं अथवा स्वास्थ्य विभाग में समान पद पर कार्य किया हो।

चूंकि याचिकाकर्ता एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के बजाय एसटीएस, डीआर-टीबी/एचआईवी समन्वयक, टीबीएचवी अथवा पीएमडब्ल्यू पदों पर कार्यरत रहे थे, इसलिए उन्हें अनुभव अंक देने का प्रश्न नहीं उठता। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति मौदगिल ने कहा कि इसी भर्ती प्रक्रिया में अन्य अभ्यर्थियों को एसटीएस के अनुभव के आधार पर अंक दिए जा चुके हैं। ऐसे में समान परिस्थितियों वाले याचिकाकर्ताओं को इससे वंचित रखना तर्कसंगत नहीं है।

अदालत ने स्वास्थ्य विभाग की 12 अगस्त 2024, 29 नवंबर 2024 और 31 जनवरी 2025 की स्पष्टीकरण रिपोर्टों का भी उल्लेख किया, जिनमें एसटीएस और पीएमडब्ल्यू के कार्यों को एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के दायित्वों के समान बताया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि जब स्वयं विभाग ने कार्यों और जिम्मेदारियों में समानता स्वीकार कर ली है तो केवल पदनाम के आधार पर अनुभव को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि एसटीएस पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) से अधिक है और दोनों पदों की जिम्मेदारियां काफी हद तक समान हैं।

अदालत ने 5 जून 2019 के परिणाम को याचिकाकर्ताओं के अनुभव अंक नहीं देने की सीमा तक निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि उनके एनएचएम अनुभव को जोड़कर मेरिट सूची का पुनर्गणना किया जाए। यदि संशोधित मेरिट में याचिकाकर्ता चयन क्षेत्र में आते हैं तो उन्हें नियुक्ति सहित सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। पूरी प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी करने के आदेश दिए गए हैं।

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