राफेल, S-400 और Su-30 बेसों को मिलेगा नया बूस्ट, बंगाल सरकार ने एयरबेस के लिए दी अतिरिक्त जमीन

कलकत्ता पूर्वी भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने हसीमारा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 37 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला किया है।  यह जमीन दोनों एयरबेस…

राफेल, S-400 और Su-30 बेसों को मिलेगा नया बूस्ट, बंगाल सरकार ने एयरबेस के लिए दी अतिरिक्त जमीन

कलकत्ता

पूर्वी भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने हसीमारा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 37 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला किया है। 

यह जमीन दोनों एयरबेस के बुनियादी ढांचे के विस्तार, नई सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होगी. यह कदम भारत की पूर्वी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत देगा, खासकर चीन की सीमा के करीब। 

हसीमारा एयरबेस: राफेल और S-400 का गढ़
हसीमारा एयरबेस अलीपुरद्वार जिले में भूटान सीमा के पास स्थित है. यह भारतीय वायुसेना का बेहद महत्वपूर्ण फॉरवर्ड बेस है. यहां राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात है, जो पूर्वी क्षेत्र और भारत-चीन सीमा पर भारत की लड़ाकू क्षमता को बहुत बढ़ाती है। 

राफेल बेहद आधुनिक मल्टीरोल फाइटर है जो लंबी दूरी तक हमला कर सकता है. दुश्मन के रडार से बच सकता है. हवा से हवा, हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन कर सकता है. सूत्रों के अनुसार इस बेस पर S-400 ट्रायम्फ लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं. सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। 

1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 1963 में इस बेस को सक्रिय किया गया था. चुम्बी घाटी त्रिजंक्शन के पास होने के कारण यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है. अतिरिक्त जमीन मिलने से यहां रनवे सुविधाएं, हैंगर, रखरखाव कार्यशालाएं और सैनिकों की आवास व्यवस्था बेहतर होगी.

कलाईकुंडा एयरबेस: ट्रेनिंग और ऑपरेशन का प्रमुख केंद्र
पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित कलाईकुंडा एयरबेस पूर्वी एयर कमांड के तहत एक बड़ा फाइटर और ट्रेनिंग हब है. यहां Su-30 MKI और हॉक ट्रेनर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं. यह बेस अंतरराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज के लिए भी प्रसिद्ध है, खासकर सिंगापुर एयर फोर्स के साथ हुए कई द्विपक्षीय अभ्यास यहां हो चुके हैं। 

कलाईकुंडा की रनवे लगभग 10,000 फीट लंबी है, जो फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दोनों को संभाल सकती है. मिली 37 एकड़ जमीन से यहां लॉजिस्टिक्स, आवास, रखरखाव और सपोर्ट सुविधाएं बढ़ेंगी. यह विकास गेम चेंजर साबित होगा क्योंकि शांति और युद्धकाल दोनों में यहां तैनाती बदलती रहती है। 

राफेल और S-400 का संयोजन हसीमारा को दुश्मन के लिए बहुत खतरनाक बना देता है. S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है. राफेल इस डिफेंस को आक्रामक ताकत देता है। 

पूर्वी क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच इन बेसों का विस्तार जरूरी है. दोनों बेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है। 

पूर्वी कमान की तैयारियों में तेजी
भारतीय वायुसेना पूर्वी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है. हसीमारा और कलाईकुंडा के विस्तार के साथ-साथ नए रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और लॉजिस्टिक सपोर्ट को मजबूत किया जा रहा है. यह विकास न सिर्फ चीन बल्कि समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने में मदद करेगा। 

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जमीन आवंटन से रक्षा मंत्रालय और वायुसेना को तेजी से काम करने में आसानी होगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा क्योंकि बुनियादी ढांचे के निर्माण में स्थानीय कंपनियां और मजदूर शामिल होंगे। 

पूर्वी भारत की भौगोलिक स्थिति काफी संवेदनशील है. भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और चीन की सीमाएं यहां करीब हैं. इन बेसों का मजबूत होना न सिर्फ हवाई श्रेष्ठता बल्कि थल सेना और नौसेना के साथ समन्वय में भी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में एयरबेस सिर्फ विमान उड़ाने के स्थान नहीं रह गए हैं. ये कमांड सेंटर, ड्रोन बेस, लॉजिस्टिक हब और इंटेलिजेंस यूनिट का काम भी करते हैं. अतिरिक्त जमीन इन बहु-उद्देशीय क्षमताओं को विकसित करने में उपयोगी होगी। 

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हसीमारा और कलाईकुंडा एयरबेस के लिए जमीन आवंटित करना पूर्वी भारत की सुरक्षा दृष्टि से एक महत्वपूर्ण फैसला है. राफेल और S-400 जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों के साथ इन बेसों का विस्तार भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मजबूती देगा. आने वाले समय में इन बेसों की क्षमता बढ़ने से वायुसेना की तैयारियां और बेहतर होंगी तथा देश की समग्र रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई मिलेगी। 

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