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मध्य प्रदेश में UCC बिल की तैयारी, क्या इंटरकास्ट मैरिज से प्रभावित होंगे आदिवासी अधिकार?

भोपाल   मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट अगले 10 दिनों में तैयार हो जाएगा. देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में यूसीसी के दायरे में आदिवासी समाज को कुछ मामलों में लाने की तैयार की जा रही है. आदिवासी समाज में अंतरजातीय विवाह करने पर उन्हें मिलने वाले आदिवासी अधिकारों…

मध्य प्रदेश में UCC बिल की तैयारी, क्या इंटरकास्ट मैरिज से प्रभावित होंगे आदिवासी अधिकार?

भोपाल 
 मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट अगले 10 दिनों में तैयार हो जाएगा. देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में यूसीसी के दायरे में आदिवासी समाज को कुछ मामलों में लाने की तैयार की जा रही है. आदिवासी समाज में अंतरजातीय विवाह करने पर उन्हें मिलने वाले आदिवासी अधिकारों को खत्म किया जा सकता है. इसे लेकर आए सुझावों पर गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी विचार कर ही है. उधर आदिवासियों के लिए भी विवाह का रजिस्ट्रेशन का विकल्प खुला रखा जा सकता है। 

आदिवासियों की संपत्ति बंटवारे पर भी विचार
समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने भोपाल में अलग-अलग वर्गों से सुझाव लिए हैं. समिति सभी जिलों से सुझाव प्राप्त कर चुकी है. उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक, '' उम्मीद है कि अगले दस दिनों में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तय कर लिया जाएगा. यूसीसी के दायरे में अंतरजातीय विवाह करने वाले आदिवासी युवक-युवतियों को भी लाया जा सकता है. ऐसे मामलों में उनके संपत्ति बंटवारे को भी यूसीसी के दायरे में लाए जाने पर विचार किया जा रहा है. यूसीसी में बहु विवाह पर रोक लगाने, विवाह के रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के साथ आदिवासियों के लिए विवाह रजिस्ट्रेशन का विकल्प रखा जाएगा। 

आदिवासियों का मिल सकती है ये राहत
यूसीसी के दायरे में आदिवासियों को भी लाए जाने पर सुझाव आए हैं. समिति सदस्य और उत्तरखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा, '' एक विचार बिलकुल साफ है कि संविधान में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. उनकी परंपराओं, संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संविधान में अलग से व्यवस्था की गई है, इस व्यवस्था को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते. लेकिन क्या उसके अंतर्गत रहते हुए यूसीसी के प्रावधानों का लाभ उनको दिया जाय या न दिया जाए इसको लेकर चर्चा हुई है. यदि कोई स्वैच्छिक रूप से वैवाहिक पंजीयन कराना चाहे तो करें और यदि कोई न चाहे कि उनकी संपत्ति का अधिकार यूसीसी के नियमों के तहत मिलना चाहिए, इस प्रावधान को शामिल किया जाए या न किया जाए इसको लेकर विचार चल रहा है।
 
गैर आदिवासी समुदाय में विवाह करने पर छिनेंगे अधिकार
अनुसूचित समुदाय का कोई व्यक्ति गैर अनुसूचित समुदाय में विवाह करता है, तो उसे फैमिली लाॅ में जो अधिकार मिलते हैं वह यूसीसी से तय होंगे या उनकी पारंपरिक नियमों से तय होंगे इसको लेकर कुछ विचार आए हैं. यदि आदिवासी समाज की महिला गैर अनुसूचित जनजाति में विवाह करती है तो ऐसे में आदिवासी को मिलने वाले अधिकार को समाप्त माना जाए, क्योंकि विवाह के बाद महिला आदिवासी कल्चर को फाॅलो नहीं करेगी. इसी तरह यदि कोई आदिवासी पुरुष गैर आदिवासी महिला से विवाह करता है तो क्या उस पर भी यह नियम लागू किया जाए? इस पर समिति विचार करेगी। 

मानूसन सत्र में आ सकता है विधेयक
शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि यूसीसी के फाइनल ड्राफ्ट के साथ दो रिपोर्ट तैयार होंगी, इसमें एक में व्यक्तियों, विशेषज्ञों और समूहों से लिए गए सुझावों को रखा जाएगा, जबकि दूसरे में इन सुझावों का निचोड़ होंगे, जिसे ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार यूसीसी के इस विधेयक को आगामी मानसून सत्र में पेश कर सकती है. मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव इसे लेकर पहले ही इशारा कर चुके हैं। 

लिव इन रिलेशनशिप
गुजरात और उत्तराखंड दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेषन अनिवार्य किया गया है.गुजरात में प्रावधान किया गया है कि 21 साल से कम आयु की स्थिति में अभिभावक को सूचित किया जाएगा. 30 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. बिना रजिस्ट्रेशन एक माह से अधिक समय तक लिव इन में रहने पर 3 माह की कैद या 10 हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान है. दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे को वैध माना जाएगा और दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा। 

संपत्ति का अधिकार
गुजरात में संपत्ति के अधिकार में प्रावधान किया गया है कि वसीयत न करने की स्थिति में पति-पत्नी और बच्चों को संपत्ति समान रूप से बांटी जाएगी. उत्तराखंड में संपत्ति पर पति या पत्नी (जो भी जीवित हो) के अलावा पुत्र के साथ पुत्री का भी समान अधिकार दिया गया है. मृतक की संपत्ति में भी दोनों के समान अधिकार दिए गए हैं. पहले उत्तराखंड में प्रावधान था कि मृतक की पत्नी को ही संपत्ति दी जाएगी। 

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