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तत्काल टिकट जालसाजी का खुलासा, दलाल बना रहे फर्जी प्रिंट और बेच रहे महंगे दामों पर

गोरखपुर रेलवे ने तत्काल टिकट के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किया तो दलालों ने जालसाजी का नया तरीका खोज लिया। अब वे मुंबई से असली तत्काल टिकट बुक कर उसका स्कैन लेकर दूसरे शहरों में भेज रहे हैं, जहां हूबहू विंडो टिकट जैसा प्रिंट निकालकर यात्रियों को ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है। यह…

तत्काल टिकट जालसाजी का खुलासा, दलाल बना रहे फर्जी प्रिंट और बेच रहे महंगे दामों पर

गोरखपुर
रेलवे ने तत्काल टिकट के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किया तो दलालों ने जालसाजी का नया तरीका खोज लिया। अब वे मुंबई से असली तत्काल टिकट बुक कर उसका स्कैन लेकर दूसरे शहरों में भेज रहे हैं, जहां हूबहू विंडो टिकट जैसा प्रिंट निकालकर यात्रियों को ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है। यह पूरा खेल 10 सेकेंड का है।

मुंबई में रेलवे का पीआरएस सिस्टम मुंबई में बाकी स्टेशनों से 10 से 12 सेकेंड पहले खुल जाता है। इसी तकनीकी अंतर का फायदा उठाकर दलाल मुंबई के अलग-अलग काउंटरों से तत्काल टिकट तुरंत बुक कर लेते हैं। फिर उस टिकट का स्कैन लेकर व्हाट्सएप या अन्य माध्यम से गोरखपुर, लखनऊ, पटना, मुजफ्फरपुर जैसे दूर के शहरों में अपने एजेंटों को भेजते हैं।

गोरखपुर में मामला सामने आया
इसका खुलासा कुशीनगर एक्सप्रेस के एक यात्री के पास से मिले स्कैन टिकट से हुआ। इसके बाद इस नेटवर्क को पकड़ने के लिए रेलवे ने अपने वाणिज्य विभाग को अलर्ट किया है। साथ ही स्कैन टिकट के लिए इस्तेमाल हो रहे रेलवे जैसे मिलते-जुलते कागज कहां से उपलब्ध हो रहे हैं, इसकी गोपनीय जांच शुरू की गई है। आरपीएफ गोरखपुर के प्रभारी दशरथ प्रसाद ने बताया कि टिकट दलालों का संगठित गिरोह यात्रियों को दूसरे राज्य से टिकट बुक कर भेज रहा है। उक्त टिकट भी स्कैन किया गया बताया गया है। गोरखपुर में मामला सामने आया है। इनका एक बड़ा नेटवर्क है। इसकी कई स्तर पर पूरे देश में जांच हो रही है।

कुशीनगर के यात्री के पास मिला स्कैन टिकट
गोरखपुर से एलटीटी जा रही कुशीनगर एक्सप्रेस में एक यात्री स्कैन टिकट के साथ पकड़ा गया। टीटीई को चेकिंग के दौरान टिकट पर बार कोड नहीं दिखा। बारीकी से जांच में पता चला कि असली नहीं है। इसे कंप्यूटर से स्कैन कर निकाला गया है। पूछताछ में यात्री ने माना कि उसने एक दलाल से टिकट खरीदा था। फिर इसकी जानकारी गोरखपुर आरपीएफ को दी गई।

सैकड़ों यात्रियों को उपलब्ध करा चुका स्कैन टिकट
जांच में खुलासा हुआ कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है। यह नेटवर्क अब तक सैकड़ों यात्रियों को स्कैन टिकट उपलब्ध करा चुका है। तत्काल टिकट एक दिन पहले ही बनता है। मुंबई से यूपी या बिहार टिकट की हार्ड कॉपी भेजना संभव नहीं है, इसलिए दलालों ने स्कैन-प्रिंट वाला फार्मूला निकाला। मुंबई से बुक टिकट का पीडीएफ बना कर अपने नेटवर्क के एजेंट को भेज देते हैं। स्थानीय एजेंट आरक्षित टिकट प्रिंट करने के लिए इस्तेमाल हो रहे कागज से मिलते जुलते कागज पर कलर प्रिंट निकालकर दे देते हैं। यह देखने में असली विंडो टिकट जैसा ही लगता है।

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