1977 से 2026 तक भारतीय तटरक्षक बल का दम, 11,099 किमी तट की सुरक्षा से तस्करी पर कड़ा पहरा

मुंबई  भारत का समुद्री क्षेत्र देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामरिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. 11,099 किलोमीटर लंबे समुद्री तट, विशाल समुद्री क्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी और सुरक्षा आज भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है. लेकिन इस संगठन की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों…

1977 से 2026 तक भारतीय तटरक्षक बल का दम, 11,099 किमी तट की सुरक्षा से तस्करी पर कड़ा पहरा

मुंबई 

भारत का समुद्री क्षेत्र देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामरिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. 11,099 किलोमीटर लंबे समुद्री तट, विशाल समुद्री क्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी और सुरक्षा आज भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है. लेकिन इस संगठन की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ हुई थी। 

आज भारतीय तटरक्षक बल के पास 154 जहाज और 82 एयरक्राफ्ट हैं, लेकिन 1977 में इसकी शुरुआत महज सात जहाजों के साथ हुई थी. यह सफर भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के लगातार विस्तार और बदलती जरूरतों को दर्शाता है। 

भारतीय नौसेना ने क्यों उठाई अलग समुद्री बल की मांग?
1960 के दशक से ही भारतीय नौसेना सरकार से एक ऐसे अलग समुद्री बल के गठन की मांग कर रही थी जो समुद्री कानून लागू करने और भारतीय जलक्षेत्र में सुरक्षा संबंधी कार्यों को संभाल सके. नौसेना का मानना था कि इन कार्यों के लिए अत्याधुनिक और महंगे युद्धपोतों का उपयोग सबसे उपयुक्त विकल्प नहीं है. समय के साथ सरकार ने भी इस तर्क को स्वीकार किया। 

1970 के दशक की शुरुआत तक कई ऐसे कारण सामने आए जिन्होंने अलग तटरक्षक बल की आवश्यकता को और मजबूत कर दिया। 

तस्करी बनी बड़ी चुनौती
उस दौर में समुद्री मार्गों से तस्करी तेजी से बढ़ रही थी और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन चुकी थी. उस समय मौजूद समुद्री एजेंसियां, जैसे सीमा शुल्क विभाग और मत्स्य विभाग, बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी को रोकने में सक्षम नहीं थीं। 

इसी पृष्ठभूमि में 1970 में नाग समिति का गठन किया गया. समिति ने अपनी रिपोर्ट में समुद्री तस्करी से निपटने के लिए एक अलग समुद्री बल की आवश्यकता बताई। 

बॉम्बे हाई में तेल मिलने से बढ़ी जरूरत
मुंबई हाई क्षेत्र में तेल की खोज और वहां स्थापित महत्वपूर्ण अपतटीय संरचनाओं की सुरक्षा भी एक बड़ी आवश्यकता बन गई थी. इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा और किसी आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मजबूत समुद्री सुरक्षा तंत्र की जरूरत महसूस की गई। 

रुस्तमजी समिति की सिफारिश
सितंबर 1974 में सरकार ने पूर्व बीएसएफ महानिदेशक के.एफ. रुस्तमजी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया. समिति को समुद्री तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों से निपटने के मौजूदा तंत्र की समीक्षा करने और सुधार के सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई. 1975 में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में समिति ने स्पष्ट रूप से ‘कोस्ट गार्ड’ जैसी संस्था स्थापित करने की सिफारिश की। 

सिर्फ सात जहाजों के साथ हुई शुरुआत
वर्ष 1977 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना को मंजूरी दी. इसके लिए भारतीय नौसेना से दो फ्रिगेट और पांच गश्ती नौकाएं स्थानांतरित की गईं. 1 फरवरी 1977 को भारतीय तटरक्षक बल अस्तित्व में आया. उस समय भारतीय जलक्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र की निगरानी के लिए उसके पास केवल सात जहाज थे। 

बाद में 19 अगस्त 1978 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने भारतीय तटरक्षक बल का औपचारिक उद्घाटन किया। 

ICGS Kuthar बना पहला तटरक्षक जहाज
1978 में भारतीय नौसेना के INS Kuthar को भारतीय तटरक्षक बल को सौंपा गया और उसका नाम ICGS Kuthar रखा गया. उद्घाटन समारोह के दौरान जहाज से नौसेना का ध्वज उतारा गया और तटरक्षक बल का ध्वज फहराया गया. इसी के साथ यह भारतीय तटरक्षक बल का पहला जहाज बना। 

जहाजों के साथ बढ़ी हवाई क्षमता
तटरक्षक बल की क्षमता बढ़ाने के लिए 1978 में निर्माणाधीन दो नौसैनिक सीवर्ड डिफेंस बोट्स को भी तटरक्षक बल को देने का निर्णय लिया गया. इन्हें क्रमशः 1980 और 1981 में सेवा में शामिल किया गया था. इसके बाद 1982 में तटरक्षक बल ने चेतक हेलीकॉप्टरों को खोज और बचाव अभियानों के लिए शामिल किया. इन्हें सुरक्षा रिकॉर्ड के आधार पर मानक सर्च एंड रेस्क्यू हेलीकॉप्टर के रूप में चुना गया। 

22 मई 1982 को गोवा के डाबोलिम एयरफील्ड में भारतीय तटरक्षक बल के पहले एयर स्क्वाड्रन 800 स्क्वाड्रन (CG) को भी कमीशन किया गया। 

सात जहाजों से 154 जहाज और 82 एयरक्राफ्ट तक
भारतीय तटरक्षक बल की शुरुआत ऐसे समय में हुई थी जब उसके पास केवल सात जहाज थे. उसका मुख्य उद्देश्य समुद्री तस्करी पर नियंत्रण, कानून प्रवर्तन और समुद्री क्षेत्रों की निगरानी था. समय के साथ भारत के समुद्री हितों, व्यापारिक गतिविधियों और सुरक्षा आवश्यकताओं का दायरा बढ़ता गया. इसके अनुरूप तटरक्षक बल का भी विस्तार हुआ। 

आज भारतीय तटरक्षक बल 11,099 किलोमीटर लंबे भारतीय समुद्री तट की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उसके पास 154 जहाज और 82 एयरक्राफ्ट हैं, जो निगरानी, गश्त, खोज एवं बचाव और समुद्री सुरक्षा संबंधी विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। 

भारत की समुद्री सुरक्षा का अहम स्तंभ
भारतीय तटरक्षक बल का इतिहास दिखाता है कि कैसे एक छोटे समुद्री बल ने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की और धीरे-धीरे देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया. सात जहाजों से शुरू हुआ यह सफर आज 154 जहाजों और 82 एयरक्राफ्ट तक पहुंच चुका है, जो भारत के समुद्री हितों की रक्षा में लगातार सक्रिय हैं। 

 

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