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Bhopal Eastern Bypass: ₹3900 करोड़ से बनेगी 10-लेन सड़क, राजधानी की कनेक्टिविटी होगी और बेहतर

भोपाल   मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जल्द ही एक बड़ी आधारभूत सौगात मिलने जा रही है। शहर में प्रस्तावित 52 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न बायपास को अब 10-लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। करीब 3,900 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए री-डिजाइन किया…

Bhopal Eastern Bypass: ₹3900 करोड़ से बनेगी 10-लेन सड़क, राजधानी की कनेक्टिविटी होगी और बेहतर

भोपाल 

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जल्द ही एक बड़ी आधारभूत सौगात मिलने जा रही है। शहर में प्रस्तावित 52 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न बायपास को अब 10-लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। करीब 3,900 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए री-डिजाइन किया जा रहा है। नई डिजाइन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।

हाल ही में हुई एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास परियोजना को दोबारा आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने परियोजना की नई डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आने वाले वर्षों की ट्रैफिक मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।

 राजधानी को बड़ी सौगात मिली है। भोपाल में 52 किमी लंबा ईस्टर्न बायपास अब दस लेन होगा। इसे वेस्टर्न बायपास से 11 मील व भानपुर, भौंरी पर मिलना था, लेकिन अब इसमें समय लगेगा। पीडब्ल्यूडी MPPWD को इसे री-डिजाइन करने के लिए भेजा है। नई डिजाइन के साथ इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, फिर काम शुरू होगा। ये 3900 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। गौरतलब है कि हाल में एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास पर फिर से काम शुरू करना तय हुआ है। दरअसल भविष्य की अनुमानित मांग को देखते हुए मौजूदा सड़क कनेक्टविटी को मजबूत और बेहतर बनाने की आवश्यकता थी। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ईस्टर्न बायपास के लिए प्रक्रिया शुरु हो गई है।

शिक्षा-प्रशिक्षण प्रोजेक्ट होंगे किनारे पर
प्रस्तावित मार्ग पर कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, विशेष रूप से शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्रों में, विकसित की जा रही हैं। अफसरों के अनुसार, क्षेत्र में आगामी परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर कनेक्टविटी और जनता की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए इसके रूट और डिजाइन में संशोधन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग हब और एजूकेशन हब के तौर पर विकसित होगा।

वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली
वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली है। इसके अलाइनमेंट और लागत अनुमानों में बदलाव के बाद अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

एमपीआरडीसी अभी वेस्टर्न पर काम कर रहा, फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा
पीडब्ल्यूडी के जीएम कैपिटल, पीसी वर्मा बताते हैं कि अभी एमपीआरडीसी वेस्टर्न पर काम कर रहा है। फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा। इसे री-डिजाइन किया जा रहा है। अभी के बायपास से यह बेहतर होगा।

एजुकेशन और ट्रेनिंग हब से जुड़ेगा बायपास
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित ईस्टर्न बायपास के आसपास कई बड़े शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान विकसित किए जा रहे हैं। इसी वजह से इसके रूट और डिजाइन में बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके।

वेस्टर्न बायपास के बाद ईस्टर्न पर होगा काम
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल एमपीआरडीसी वेस्टर्न बायपास परियोजना पर काम कर रहा है। इसके बाद ईस्टर्न बायपास के निर्माण को गति दी जाएगी। नई डिजाइन के साथ यह परियोजना पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और उपयोगी होगी।

रिंग रोड नेटवर्क होगा पूरा
ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास बनने के बाद भोपाल का लंबे समय से लंबित रिंग रोड नेटवर्क पूरा होने की उम्मीद है। इससे दूसरे शहरों की ओर जाने वाले वाहन बिना शहर के भीतर प्रवेश किए सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, जिससे राजधानी में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।

पर्यावरण मंजूरी भी होगी जरूरी
परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरण विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से आवश्यक मंजूरी भी लेनी होगी। प्रस्तावित मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरणीय अनुमति अहम मानी जा रही है।

रिंग रोड पूरा होने की उम्मीद
ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास से भोपाल के बहुप्रतीक्षित रिंग रोड नेटवर्क के पूरा होने की उम्मीद है। एक बार चालू होने के बाद, वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे, जिससे शहर के भीतर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। देशभर में भोपाल ही एकमात्र ऐसी राजधानी है, जिसकी पूरी रिंग रोड नहीं है। ईस्टर्न कॉरिडोर के साथ पश्चिमी का काम पूरा होने पर ये रोड भी पूरी हो जाएगी।

प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण के साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) एनजीटी की मंजूरी की भी दरकार हो सकती है। मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर NGT में मामला जा सकता है।

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