केंद्र सरकार में संभावित बदलाव, पिछड़ी जातियों और क्षेत्रीय संतुलन पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली  केंद्र सरकार में फेरबदल की अटकलें तेज हो चली हैं। बताया जा रहा है कि इस फेरबदल के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक संदेश के नजरिए से इस फेरबदल में तीन अहम मतदाता…

केंद्र सरकार में संभावित बदलाव, पिछड़ी जातियों और क्षेत्रीय संतुलन पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली
 केंद्र सरकार में फेरबदल की अटकलें तेज हो चली हैं। बताया जा रहा है कि इस फेरबदल के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक संदेश के नजरिए से इस फेरबदल में तीन अहम मतदाता समूहों युवा, पिछड़ी जातियों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कई सांसदों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।

फेरबदल के जरिये बड़ा संदेश देने की कोशिश
विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में विधानसभा चुनावों और नीट पेपर लीक मामले पर सरकार के खिलाफ रुख के मद्देनजर इस फेरबदल के जरिये बड़ा संदेश देने की कोशिश की जाएगी। बताया जा रहा है कि जहां एक दर्जन से ज्यादा राज्य मंत्रियों की जगह युवा सांसदों (शायद कुछ अपने पहले कार्यकाल वाले भी) को लाया जा सकता है, वहीं मोदी लोकसभा में महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की अपनी कोशिश के तहत मंत्रिपरिषद में महिलाओं की हिस्सेदारी भी बढ़ा सकते हैं।

यूपी में कायम रखना चाहेंगे पिछड़ी जातियां को समर्थन आधार
उत्तर प्रदेश में किसी भी चुनावी जीत के लिए पिछड़ी जातियां आधार होती हैं, इसलिए उम्मीद है कि प्रधानमंत्री जुलाई 2021 के फेरबदल वाले तरीके को ही अपनाएंगे और अलग-अलग पिछड़ी जातियों के सांसदों को शामिल करेंगे, ताकि अगले साल की शुरुआत में होने वाले चुनावों में उनके बीच पार्टी का समर्थन आधार बना रहे।

राजनीतिक विजन और नैरेटिव तय करना चाहेगी बीजेपी
वहीं बीजेपी और उसके NDA गठबंधन के सूत्रों का कहना है कि इस कवायद से राजनीतिक विजन और नैरेटिव तय हो सकता है, जो मोदी के तीसरे कार्यकाल के बाकी समय में केंद्र के कामकाज और उससे भी अहम, 2029 के लोकसभा चुनावों और उससे पहले होने वाले कई विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी की चुनावी रणनीति को आकार देगा। हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या इसमें बेरोजगारी पर काबू पाने, ईंधन की बढ़ती कीमतों और बार-बार परीक्षा के पेपर लीक होने जैसे मामलों में केंद्र के खराब रिकॉर्ड के लिए जवाबदेही भी तय की जाएगी या नहीं।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports