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राजस्थान में जल संरक्षण अभियान तेज: वरुण सागर से लेकर नदियों तक डीसिल्टिंग कार्य का शुभारंभ

जयपुर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने ऎतिहासिक अजमेर जिले में वरुण सागर झील के डीसिल्टिंग कार्य का शुभारम्भ किया। लगभग 100 वर्षों बाद पहली बार झील की खुदाई का कार्य प्रारम्भ होने जा रहा है, इससे झील की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, भराव क्षेत्र का विस्तार होगा तथा अतिक्रमण…

राजस्थान में जल संरक्षण अभियान तेज: वरुण सागर से लेकर नदियों तक डीसिल्टिंग कार्य का शुभारंभ

जयपुर
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने ऎतिहासिक अजमेर जिले में वरुण सागर झील के डीसिल्टिंग कार्य का शुभारम्भ किया। लगभग 100 वर्षों बाद पहली बार झील की खुदाई का कार्य प्रारम्भ होने जा रहा है, इससे झील की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, भराव क्षेत्र का विस्तार होगा तथा अतिक्रमण हटाकर झील को उसका मूल स्वरूप प्रदान किया जाएगा।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह अजमेर के लिए ऎतिहासिक क्षण है। झील के निर्माण के बाद पहली बार इसकी खुदाई की जा रही है। इससे झील अधिक गहरी होगी, जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी और वर्षा के दौरान अतिरिक्त पानी का बेहतर प्रबंधन होने से शहर को जलभराव की समस्या से भी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटने से झील की प्राकृतिक सुंदरता में भी अभूतपूर्व निखार आएगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में अजमेर को विकास की अनेक महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं। तारागढ़ किला विकास, लैपर्ड सफारी, साइंस पार्क, आनासागर विकास, वरुण सागर विकास तथा चौरसियावास तालाब के सौन्दर्यीकरण जैसे कार्य अजमेर को पर्यटन के नए केन्द्र के रूप में स्थापित करेंगे। इन परियोजनाओं से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

देवनानी ने बताया कि वरुण सागर झील पर भगवान वरुण देव की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी तथा आसपास के उद्यान का भी व्यापक कायाकल्प किया जाएगा, इससे यह क्षेत्र धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से और अधिक आकर्षक बनेगा।

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण एवं जल स्रोतों के विकास के प्रति पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेशभर में लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से झीलों, तालाबों एवं जल आवक मार्गों की डीसिल्टिंग एवं सफाई का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। अजमेर जिले में भी जल संरचनाओं के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ष्वन्दे गंगा जल संरक्षण अभियानष् अभूतपूर्व सफलता प्राप्त कर चुका है। प्रदेश में जल संरक्षण, पेयजल उपलब्धता एवं सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं, इससे राजस्थान जल प्रबंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहा है।

कार्यक्रम के दौरान वरुण सागर झील एवं अन्य विकास कार्यों का शिलान्यास एवं अवलोकन भी किया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रमेश सोनी, मंडल अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, सीताराम शर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
वरुण सागर की भराव क्षमता बढ़ाने के लिए डीसिल्टिंग का कार्य किया जाएगा। इसके अंतर्गत वरुण सागर से गाद लगभग 188400 सीयूएम निकाली जाएगी। यह कार्य से वरुण सागर की भरात क्षमता में 6.65 एमसीएफटी वृद्धि होगी।

मुहामी से रूप नदी लगभग 62 किलोमीटर लंबाई में जंगल सफाई व डीसील्टिंग का कार्य करवाया जाएगा। इसके अंतर्गत रूप नदी में वर्षों से वर्षाकाल में बहकर आ रहे सिल्ट, मिट्टी को निकाला जाएगा। इससे नदी अपनी वास्तविक रूप में आ सकेगी व निर्बाध प्रवाह हो सकेगा। यह कार्य की लागत राशि 12.04 करोड़ रूपए आएगी।

डाई नदी, सागरमती नदी व इसकी वितरिकाओं के साथ फूलसागर कायड व बीर के प्राकृतिक नालो, कल्याणीपुरा चैनल की डीसील्टिंग का कार्य करवाया जाएगा। इसके अंतर्गत नदी नालों में पहाड़ों व शहर से आ रहे गाद, मिट्टी व सिल्ट को निकालने का कार्य करवाया जाएगा। डाई नदी, सागरमती नदी में लगातार वर्षों से जमा हो रहे गाद व सिल्ट के कारण नदी प्रवाह में कमी आई है तथा नदी क्षमता भी कम हुई है। इससे किसानों के तटबंधों की जमीन का वर्षा के दौरान लगातार कटाव होता है तथा बाढ़ की परिस्थितियों बनती है। इन परिस्थितियों के निस्तारण के लिए नदीं को अपने वास्तविक रूप में लाने का कार्य करवाया जाएंगे। इस कार्य की लागत राशि 3 करोड़ रूपए आएगी।

परियोजना के अंतर्गत सहोदरा नदी (देवरिया बाँध से मुण्डोती बाँध) के लगभग 4.50 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 15.00 मीटर (बंथली से मुण्डोती बाँध) के लगभग 7.50 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 25.00 मीटर चौड़ाई एव मुण्डोती बाँध के डाउनस्ट्रीम भाग से मनोहरपुरा ग्राम तक सहोदरा नदी के लगभग 1.35 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 40 मीटर चौड़ाई वाले भाग का डी-सिल्टिंग एवं अवांछित वनस्पतियों की सफाई कार्य प्रस्तावित है। यह कार्य के अंतर्गत वर्षों से संचित गाद, सिल्ट एवं अन्य अवसादों का निष्कासन कर नदी की जल वहन क्षमता में वृद्धि की जाएगी तथा मुण्डोती बाँध तक जल की उपलब्धता में सुधार होगा। यह कार्य से नदी की डाउनस्ट्रीम जल निकासी क्षमता में वृद्धि होगी। मानसून अवधि में जलभराव एवं बाढ़ की समस्या में प्रभावी कमी आएगी। इसके अंतर्गत सहोदरा नदी से गाद लगभग 364200 सीयूएम निकाली जाएगी। इसकी लागत राशि 5.44 करोड रूपए आएगी।

परियोजना के अंतर्गत माशी नदी में गागून्दा एनीकट से गोली एनीकट तक लगभग 4.50 किलोमीटर लम्बाई एवं औसतन 20 मीटर चौड़ाई वाले भाग सुख सागर जलाशय के फीडर चैनल की लगभग 1.80 किलोमीटर लम्बाई में डीसिल्टिंग अवांछित वनस्पतियों की सफाई एव पुलिया मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। यह कार्य के अंतर्गत नदी में वर्षों से संचित गाद, सिल्ट एवं अन्य अवसादों का निष्कासन कर नदी की मूल जल वहन क्षमता पुनस्र्थापित की जाएगी। इससे वर्षा ऋतु के दौरान जल प्रवाह सुचारु होगा तथा तटीय क्षेत्रों में कटाव एवं बाढ़ की संभावनाओं में कमी आएगी। इसके अंतर्गत माशी नदी से गाद लगभग 247200 सीयूएम निकाली जाएगी। इसकी लागत राशि 3.69 करोड रूपए आएगी।

 

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