18 साइबर ठगी मामलों से जुड़ा फर्जी सिम रैकेट उजागर, ‘शिवम टेलीकॉम’ पर कार्रवाई

नई दिल्ली  सेंट्रल जिला साइबर थाना पुलिस ने साइबर अपराधियों को अवैध रूप से प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक लाइसेंसधारी टेलीकॉम पॉइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंट को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी द्वारा एक्टिव किए गए सिम कार्ड देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 18 से अधिक साइबर…

18 साइबर ठगी मामलों से जुड़ा फर्जी सिम रैकेट उजागर, ‘शिवम टेलीकॉम’ पर कार्रवाई

नई दिल्ली
 सेंट्रल जिला साइबर थाना पुलिस ने साइबर अपराधियों को अवैध रूप से प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक लाइसेंसधारी टेलीकॉम पॉइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंट को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी द्वारा एक्टिव किए गए सिम कार्ड देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 18 से अधिक साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल किए गए थे। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बलजीत नगर निवासी शिवा के तौर पर हुई है। आरोपी रोड किनारे स्टॉल लगाकर 'शिवम टेलीकॉम' के नाम से सिम बेचता था।

डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि दिल्ली में कार्यरत ऐसे टेलीकॉम PoS एजेंटों के बारे में पता किया जा रहा था, जिनसे जारी सिम कार्ड बार-बार साइबर अपराधों में उपयोग हो रहे थे। जांच के दौरान शिवा सिम्स, नीतीश टेलीकॉम और शिवम टेलीकॉम संदेह के दायरे में आए।

2 जुलाई को आरोपी को पकड़ा
जांच में पता चला कि आम लोगों के नाम पर एक्टिवेट किए गए सिम साइबर अपराधियों तक पहुंचाए जा रहे थे। एसएचओ इंस्पेक्टर योगराज दलाल के नेतृत्व में टीम बनाई गई। जांच में सामने आया कि शिवम टेलीकॉम के माध्यम से अवैध रूप से एक्टिव किए गए 11 सिम कार्ड देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 18 साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल हुए थे। इसके बाद 2 जुलाई को आरोपी को हिंदूराव अस्पताल के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।
    आरोपी के सिम कार्डों से देश के अलग-अलग राज्यों में हुई 18 से ज्यादा साइबर ठगियां
    सड़क किनारे स्टॉल लगाकर बेचता था सिम, 11 सिम कार्डों से खुली बड़ी साजिश की पोल

500-600 रुपये में बेचता था एक सिम
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह आम ग्राहकों के आईडी प्रूफ और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर उनकी जानकारी और सहमति के बिना अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट करता था। इसके बाद वह इन प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्डों को 500 से 600 रुपये प्रति सिम के हिसाब से बिचौलियों और साइबर अपराधियों को बेच देता था। आरोपी जानबूझकर केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन के नियमों का उल्लंघन करता था। वह असली ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट करता और उन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाता था।

 

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