जालंधर
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक पंजाबी मूल की पूर्व महिला जेल गार्ड को एक कैदी के साथ प्रेम संबंध बनाने और अपने पद का दुरुपयोग करने के मामले में अदालत ने दो साल की सशर्त सजा सुनाई है। सजा के तहत उसे निर्धारित अवधि तक घर में नजरबंद रहना होगा और अदालत की शर्तों का पालन करना होगा।
31 वर्षीय रमनदीप एबॉट्सफोर्ड की रहने वाली हैं। रमनदीप ने मार्च 2021 में नॉर्थ फ्रेजर प्रीट्रायल सेंटर में करेक्शनल ऑफिसर (जेल गार्ड) के रूप में नौकरी शुरू की थी। सितंबर 2021 से लगभग एक वर्ष तक उनका एक कैदी के साथ गुप्त प्रेम संबंध रहा। कैदी जेल के भीतर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था। रमनदीप को इस बात की जानकारी थी और वह तलाशी अभियान से पहले कैदी को सतर्क कर देती थीं।
रमनदीप ने अदालत में कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि कैदी के पास मोबाइल कैसे पहुंचा, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। 24 जून को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश दिबा माज्जुब ने कहा कि रमनदीप ने अपने कृत्य से जेल के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरे में डाला। अदालत ने माना कि आरोपी ने अपराध स्वीकार किया है, लेकिन यह केवल एक साधारण गलती नहीं बल्कि सार्वजनिक विश्वास का गंभीर उल्लंघन था।
पूरा मामला तब सामने आया, जब एक वरिष्ठ जेल अधिकारी के घर पर जानलेवा हमले की साजिश की जांच शुरू हुई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जालंधर मूल की महिला अधिकारी ने ही उस अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो कैदी तक पहुंचाई थी। इसके बाद कथित तौर पर उसी जानकारी के आधार पर अधिकारी की पहचान कर पूरी साजिश रची गई। यह मामला बाद में कनाडा पुलिस की प्रोजेक्ट साउथ जांच का अहम हिस्सा बना।
3 जुलाई को ऑन्टारियो सुपीरियर कोर्ट की अनुमति के बाद 563 पन्नों वाले ITO (इन्फॉर्मेशन टू ऑब्टेन) के कुछ हिस्से सार्वजनिक किए गए, जिनसे पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। महिला अधिकारी पेड लीव पर हैं, जबकि कैदी अब भी जेल में बंद है। जांच एजेंसियों ने उसका नाम अमेरिका के वांटेड ड्रग तस्कर रॉयन वेडिंग के कथित ड्रग नेटवर्क से भी जोड़ा है।
दोसांझ गांव की निशवंत, कैदी ड्राइवर के तौर पर कनाडा गया कनाडा पुलिस के मुताबिक निशवंत कौर दोसांझ का परिवार पंजाब के जालंधर जिले के दोसांझ कलां गांव से जुड़ा बताया जाता है। वह ब्रिटिश कोलंबिया के ऐबट्सफोर्ड में रहती हैं और टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में कॉर्पोरल थीं। 32 वर्षीय गुरप्रीत सिंह पंजाब से ट्रक ड्राइवर के रूप में कनाडा गया था। बाद में जांच एजेंसियों ने उसका नाम अमेरिका के वांछित ड्रग तस्कर रायन वेडिंग के कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क से जोड़ा। अक्टूबर 2024 से वह टोरंटो जेल में बंद है और अमेरिका प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का सामना कर रहा है।
दोनों के बीच पहले से प्यार, जेल में देख फिर रिश्ते सक्रिय हुए ITO के मुताबिक गुरप्रीत के अक्टूबर 2024 में टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर पहुंचने से पहले से ही दोनों के बीच लंबे समय से निजी संबंध थे। गुरप्रीत के जेल पहुंचने के बाद निशवंत को पता चला तो उनके बीच का यह रिश्ता फिर से सक्रिय हो गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि निशवंत ने अपनी ड्यूटी उसी टावर और ब्लॉक में लगवा ली, जहां गुरप्रीत बंद था। अक्टूबर 2024 से 2025 तक दोनों के बीच लगातार निजी मुलाकातें होती रहीं।
सेल के बाहर ज्यादा समय, यहीं से बढ़ा शक पुलिस के अनुसार निशवंत अक्सर गुरप्रीत की सेल के आसपास जरूरत से ज्यादा समय बिताती थीं। जेल सुपरवाइजरों ने यह भी नोटिस किया कि वह गुरप्रीत से मिलने के बाद उसके पूर्व सेलमेट से भी मिलती थीं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इसी असामान्य गतिविधि के बाद दोनों पर निगरानी बढ़ाई गई।
जेल के फोन के अलावा कथित अवैध मोबाइल से भी संपर्क ITO के मुताबिक दोनों जेल के आधिकारिक फोन सिस्टम के अलावा गुरप्रीत के पास मौजूद कथित अवैध मोबाइल फोन के जरिए भी लगातार संपर्क में थे। जांच के दौरान गुरप्रीत की कई बातचीत इंटरसेप्ट कर मॉनिटर की गई। जांच दस्तावेजों में दावा किया गया है कि निशवंत ने एक सहकर्मी को बताया था कि गुरप्रीत ने उन्हें महंगे गिफ्ट दिए, कॉस्मेटिक सर्जरी के लिए पैसे दिए और विदेश यात्राओं का खर्च भी उठाया। जांच अधिकारी डिटेक्टिव कांस्टेबल एंटोनियो डी ओनोफ्रियो ने लिखा कि गुरप्रीत का निशवंत पर इतना प्रभाव था कि यह एक जेल अधिकारी और कैदी के रिश्ते के लिहाज से बेहद असामान्य था।
नंबर प्लेट से हत्या की साजिश तक में शामिल यॉर्क रीजनल पुलिस के मुताबिक जून 2025 में एक वरिष्ठ करेक्शनल अधिकारी की हत्या की साजिश रची गई। अधिकारी के घर पर मुंह ढके हमलावर ने हमला करने की कोशिश भी की। ITO में आरोप है कि गुरप्रीत ने जेल के बाहर मौजूद सहयोगियों के जरिए पूरी योजना बनाई, जबकि निशवंत ने कथित तौर पर 'इंटरनल फैसिलिटेटर' की भूमिका निभाई।
पुलिस का दावा है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो लेकर गुरप्रीत तक पहुंचाई। बाद में इसी जानकारी के आधार पर वाहन का रिकॉर्ड निकाला गया और अधिकारी के घर की पहचान की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी घटना के बाद प्रोजेक्ट साउथ जांच का दायरा बढ़ा।
निशवंत की नाराजगी का बदला लिया इस मामले में सार्वजनिक किए गए अदालत दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गुरप्रीत सिंह की वरिष्ठ जेल अधिकारी से क्या रंजिश थी। हालांकि पुलिस का दावा है कि निशवंत दोसांझ की उस अधिकारी से नाराजगी थी और उसी के बाद कथित साजिश रची गई।
जांच में और भी कई नाम 563 पन्नों के ITO में निशवंत और गुरप्रीत के अलावा कई पुलिस अधिकारियों और सिविलियन के नाम भी जांच के दायरे में होने का उल्लेख है। एजेंसियां इनके बीच कथित संपर्क और सहयोग की भी जांच कर रही हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में पहले भी कंट्राबैंड और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं। इसी वजह से जेल पहले से जांच एजेंसियों की निगरानी में थी।
दोनों पक्षों का क्या कहना है:-
निशवंत के वकील बोले- जांच में सहयोग किया: निशवंत फरवरी से पेड लीव पर है। उसकी वकील किम स्कोफील्ड ने कहा कि उनकी क्लाइंट ने जांच में सहयोग किया और फोन सर्च के लिए अनलिमिटेड एक्सेस दिया। उन्होंने किसी भी क्रिमिनल या प्रोफेशनल मिसकंडक्ट से इनकार किया और कहा कि वह बेगुनाह है।
गुरप्रीत के वकील बोले- अभी आरोप तय नहीं हुए: इस मामले में गुरप्रीत सिंह के वकील ब्रायन ग्रीनस्पैन ने कहा कि 4 महीने बाद भी कोई चार्ज नहीं लगा। यह घटना जेल सुरक्षा और स्टाफ-इनमेट रिलेशनशिप की है। टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में पहले भी कंट्राबैंड और भ्रष्टाचार की शिकायतें आई हैं, ये पहला मामला नहीं है।
















