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तकनीक से बदलेगी स्वास्थ्य व्यवस्था! डिप्टी CM शुक्ल बोले- नागरिकों को मिले तेज, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण इलाज

तकनीक के प्रभावी उपयोग से नागरिकों को बेहतर, त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं: उप मुख्यमंत्री शुक्ल हेल्थ प्रोफेशनल और हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन का कार्य समय से पूर्ण कर डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को करें मजबूत आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की प्रगति की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में…

तकनीक से बदलेगी स्वास्थ्य व्यवस्था! डिप्टी CM शुक्ल बोले- नागरिकों को मिले तेज, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण इलाज

तकनीक के प्रभावी उपयोग से नागरिकों को बेहतर, त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

हेल्थ प्रोफेशनल और हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन का कार्य समय से पूर्ण कर डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को करें मजबूत
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की प्रगति की समीक्षा की

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अंतर्गत संचालित प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर तक रहने वाले प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से नागरिकों को बेहतर, त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा आभा आईडी, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री और हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किया जाए। बैठक में सीईओ आयुष्मान अरविंद कुमार शाह सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में एकीकृत एवं परस्पर जुड़ा हुआ डिजिटल स्वास्थ्य इको सिस्टम विकसित करना है। इसके माध्यम से नागरिकों को विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान आभा आईडी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से प्राप्त एवं साझा कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सकों, नर्सों, आयुष चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का पंजीयन तेजी से कराया जाए। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल सेवाओं के उपयोग को बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से मरीज, चिकित्सक, प्रयोगशाला, फार्मेसी, अस्पताल और बीमा सेवाओं के बीच स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का सुरक्षित एवं निर्बाध आदान-प्रदान संभव होगा। इससे उपचार की निरंतरता, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी।

सीईओ आयुष्मान शाह ने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 5.86 करोड़ एबीएचए आईडी बनाई जा चुकी हैं। साथ ही लगभग 20 हजार स्वास्थ्य संस्थान हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में पंजीकृत किए गए हैं तथा लगभग 18 हजार स्वास्थ्य पेशेवर हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं।

हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से स्वास्थ्य पेशेवरों की डिजिटल पहचान

सीईओ आयुष्मान शाह ने बताया कि हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री के अंतर्गत चिकित्सक, नर्स, दंत चिकित्सक, आयुष चिकित्सक तथा अन्य लाइसेंसधारी स्वास्थ्य पेशेवरों का सत्यापित डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक पंजीकृत स्वास्थ्य पेशेवर को विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान की जाती है। इससे डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित प्रमाणीकरण, टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार तथा विश्वसनीय डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।

हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री से स्वास्थ्य संस्थानों का एकीकरण

हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री के अंतर्गत शासकीय एवं निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं, फार्मेसियों, इमेजिंग सेंटर और वेलनेस सेंटर का पंजीयन किया जा रहा है। प्रत्येक संस्थान को विशिष्ट हेल्थ फैसिलिटी आईडी प्रदान की जाती है। इससे संस्थानों की जानकारी का मानकीकरण होगा तथा उन्हें एबीएचए, स्कैन एंड शेयर एवं नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा सकेगा।

स्कैन एंड शेयर से आसान एवं पेपरलेस ओपीडी पंजीयन

समीक्षा में स्कैन एंड शेयर पहल की प्रगति की भी जानकारी दी गई। प्रदेश में वर्तमान में 533 स्वास्थ्य संस्थानों में स्कैन एंड शेयर सुविधा सक्रिय है। इसके माध्यम से अब तक 1 करोड़ 7 लाख 70 हजार 164 से अधिक ओपीडी पंजीयन टोकन जारी किए जा चुके हैं। स्कैन एंड शेयर सुविधा के अंतर्गत मरीज अस्पताल पहुंचकर एबीएचए एप अथवा अन्य एबीडीएम सक्षम एप के माध्यम से अस्पताल का क्यूआर कोड स्कैन करता है। मरीज की सहमति से उसकी मूलभूत जानकारी अस्पताल के डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित रूप से साझा होती है और उसे डिजिटल ओपीडी टोकन प्राप्त हो जाता है। इससे मरीजों को लंबी पंजीयन कतारों से राहत मिलती है तथा कागजरहित और त्वरित पंजीयन की सुविधा उपलब्ध होती है।

 

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