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झारखंड के कृषि उत्पादों को मिला डिजिटल बाजार, सेतु सेल से किसानों की बढ़ी आय

रांची  कृषि उत्पादों की दृष्टि से झारखंड देश में अग्रणी राज्यों में शामिल किया जा सकता है। यहां उपजी सब्जियाें की खपत झारखंड ही नहीं दूसरे राज्यों में भी है और विदेशों तक का सफर यहां के कृषि उत्पादों ने पूरा किया है। जाहिर सी बात है कि इनकी मांग बढ़ रही है और बाजार…

झारखंड के कृषि उत्पादों को मिला डिजिटल बाजार, सेतु सेल से किसानों की बढ़ी आय

रांची
 कृषि उत्पादों की दृष्टि से झारखंड देश में अग्रणी राज्यों में शामिल किया जा सकता है। यहां उपजी सब्जियाें की खपत झारखंड ही नहीं दूसरे राज्यों में भी है और विदेशों तक का सफर यहां के कृषि उत्पादों ने पूरा किया है।

जाहिर सी बात है कि इनकी मांग बढ़ रही है और बाजार भी। आधुनिक बाजार की चुनौतियों का सामना करने के झारखंड की किसान दीदियां तैयार हो चुकी हैं और उनकी इस तैयारी मूर्त रूप दिया है सेतु योजना ने। सेतु सेल का गठन होने के बाद इससे नित्य नए लोग जुड़ रहे हैं और किसानों को भी लाभ हो रहा है।

सेतु (स्केलिंग एंड इनेबलिंग फार ट्रेड अपलिफ्टमेंट – एसईटीयू) स्कीम के माध्यम से किसानों को कृषि उत्पादों को तैयार करने की नई विधियां बताई गई हैं और उन्हें यह भी जानकारी दी गई है कि कैसे उत्पादों को बेहतर ढंग से सजाया और परोसा जा सकता है।

इसका लाभ मिलना शुरू हो गया हैं।झारखंड में फिलहाल आधा दर्जन से अधिक एप पर झारखंड के किसानों के उत्पाद उपलब्ध हैं और इसके माध्यम से उन्हें नियमित भुगतान भी प्राप्त हाे जा रहा है।

कई ऐसे एप नेटवर्क हैं जो किसान दीदियाें को हर सोमवार को भुगतान कर देते हैं। किसान दीदियों ने इन वैश्विक कंपनियों के संपर्क से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादों की पैकेजिंग करने का तरीका सीखा है और अब उन्हें इसकी पूरी कीमत भी प्राप्त हो रही है।

बड़ी चुनौती उत्पादन नहीं, बाजार है
झारखंड की हजारों ग्रामीण महिला किसान, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और ग्रामीण उद्यमी वर्षों से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करते रहे हैं। जंगली शहद, मसाले, फल, सब्जियां, अंडे, हस्तशिल्प और अन्य कृषि उत्पाद। लेकिन एक चुनौती हमेशा उनके सामने खड़ी रही – विश्वसनीय और लाभकारी बाजार तक पहुंच।

सीमित बाजार संपर्क, बिचौलियों पर निर्भरता, कम कीमत, भुगतान में देरी और खरीदारों की कमी ने उनकी मेहनत का वास्तविक मूल्य मिलने से रोके रखा। परिणामस्वरूप, अच्छे उत्पाद होने के बावजूद अधिकांश ग्रामीण उद्यम अपने अगले स्तर तक नहीं पहुंच पाए।

सेतु के शुरू होने के बाद से कई आयाम जुड़े
पिछले वर्ष अगस्त 2025 में जएसएलपीएस के सीईओ अनन्य मित्तल के नतृत्व में गठित सेतु सेले ने ग्रामीणों के उत्पादों को बाजार प्रणाली से जोड़ने में सफलता हासिल की है और जिन महिला किसानों की पहुंचे सिर्फ हाट-बाजार तक थी उन्हें डिजिटल माध्यम से देश-विदेश के बड़े नेटवर्कों से जोड़ दिया गया है।

आज सेतु सेल के माध्यम से ग्रामीण उत्पादक नियमित रूप से आपूर्ति कर रहे हैं और संगठित रिटेल चेन को अंडे, ताजी सब्जियां, कृषि उत्पाद, किराना एवं खाद्य उत्पाद, और महिला उद्यमियों द्वारा निर्मित वैल्यू एडेड उत्पाद बड़े मार्केटिंग गुरुओं के माध्यम से घर-घर पहुंच रहे हैं।

इन प्लेटफार्म पर दिखने और बिकने लगे हैं झारखंडी उत्पाद
झारखंड में सेतु सेल के माध्यम से किसान दीदियों के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का जिम्मा जेएसएलपीएस ने उठाया है। एग्रीजोन, किसान से, अपना मार्ट, यूज मी, एग्री अर्जुना, आमराई आदि आधा दर्जन से अधिक एप पर झारखंड की किसान दीदियों के स्तर से तैयार उत्पादों की बिक्री हो रही है।

यहां झारखंड की फल सब्जियों से लेकर अंडे तक मिलते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इनके माध्यम से किसान दीदियों को समय पर भुगतान भी हो जा रहा है।

    जब बाजार सुलभ, पारदर्शी और समावेशी होते हैं, तब वे केवल उत्पाद नहीं बेचते, बल्कि आजीविका बदलते हैं। सेतु सेल का उद्देश्य यही है कि ग्रामीण उत्पादकों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिले और वे स्थायी बाजारों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। इस तरह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
    -अनन्य मित्तल, सीईओ, जेएसएलपीएस।

 

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