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MP में वन विभाग का बड़ा एक्शन! 589.63 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त, अब होगा सागौन का पुनर्वनीकरण

589.63 हैक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त, सागौन रूट-शूट से होगा पुनर्वनीकरण अतिक्रमणकारियों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी भोपाल  धार वन मंडल ने वन भूमि संरक्षण एवं अतिक्रमण नियंत्रण अभियान के तहत जनवरी से मई 2026 के बीच कड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 589.63 हैक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। यह कार्रवाई…

MP में वन विभाग का बड़ा एक्शन! 589.63 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त, अब होगा सागौन का पुनर्वनीकरण

589.63 हैक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त, सागौन रूट-शूट से होगा पुनर्वनीकरण अतिक्रमणकारियों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी

भोपाल 

धार वन मंडल ने वन भूमि संरक्षण एवं अतिक्रमण नियंत्रण अभियान के तहत जनवरी से मई 2026 के बीच कड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 589.63 हैक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। यह कार्रवाई वन विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन, पुलिस, ग्राम वन समितियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से 7 वन परिक्षेत्रों में का गई।

विभागीय कार्रवाई में वन परिक्षेत्र धार में 100.55 हैक्टेयर, धामनोद में 35.10हैक्टेयर, मांडव में 50.78 हैक्टेयर, सरदारपुर में 50.62 हैक्टेयर, टांडा में 93.76 हैक्टेयर, बाग में 202.82 हैक्टेयर तथा कुक्षी में 56.00 हैक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। धार वन मंडल में कुल 589.63 हैक्टेयर वन भूमि पुनः वन विभाग के संरक्षण में लाई गई। अभियान का उद्देश्य वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर उसका पुनर्वनीकरण करते हुए प्राकृतिक वन संपदा का संरक्षण एवं संवर्धन करना है। अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि पर सागौन रूट-शूट की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अधिकारियों एवं मैदानी कर्मचारियों को वैज्ञानिक पद्धति से सागौन रूट-शूट रोपण, पौध संरक्षण एवं रखरखाव का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न करें। वन भूमि सार्वजनिक एवं प्राकृतिक संपदा है, जिसका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। वन मंडल अधिकारी विजयानंथम टी.आर. ने चेतावनी दी है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति वन भूमि पर अतिक्रमण करता है अथवा ऐसा करने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा अन्य प्रासंगिक वैधानिक प्रावधानों के तहत आपराधिक प्रकरण वन विभाग के साथ पुलिस में भी एफआईआर भी दर्ज कराई जायेगी।

 

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