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बांकीपुर सीट पर BJP के दो बड़े विवाद, पहले टिकट बदला अब नए उम्मीदवार के बायोडाटा पर सवाल

 पटना बिहार की सबसे हॉट और बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है. चुनावी मैदान में कदम फूंक-फूंक कर रख रही बीजेपी अपने ही फैसलों के चलते विपक्ष के निशाने पर आ गई है।  पहले 24 घंटे के…

बांकीपुर सीट पर BJP के दो बड़े विवाद, पहले टिकट बदला अब नए उम्मीदवार के बायोडाटा पर सवाल

 पटना

बिहार की सबसे हॉट और बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है. चुनावी मैदान में कदम फूंक-फूंक कर रख रही बीजेपी अपने ही फैसलों के चलते विपक्ष के निशाने पर आ गई है। 

पहले 24 घंटे के भीतर अपना तय उम्मीदवार बदलना और उसके तुरंत बाद नए उम्मीदवार के जारी हुए 'बायोडाटा' में बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद, बीजेपी की रणनीति पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

बीजेपी ने जैसे ही बांकीपुर से अपने नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के नाम का ऐलान किया, वैसे ही पार्टी की ओर से उनका एक बायोडाटा मीडिया में जारी किया गया. इस आधिकारिक दस्तावेज में नीरज कुमार सिन्हा की जन्मतिथि 1 जुलाई 1994 बताई गई थी. लेकिन इसी बायोडाटा में नीचे लिखा था कि उन्होंने साल 2006 में बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता लेकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 

इस डिटेल ने तुरंत सबका ध्यान खींच लिया. गणित के हिसाब से अगर नीरज का जन्म 1994 में हुआ और उन्होंने 2006 में पार्टी जॉइन की, तो उस वक्त उनकी उम्र महज 12 साल रही होगी. सोशल मीडिया और राजनीतिक हल्कों में यह सवाल तैरने लगा कि आखिर 12 साल का कोई बच्चा बीजेपी का प्राथमिक सदस्य कैसे बन सकता है?

गलती का अहसास होते ही BJP ने जारी किया 'संशोधित' बायोडाटा
विवाद और चर्चाएं बढ़ती देख बीजेपी ने कुछ ही देर बाद नीरज कुमार सिन्हा का एक नया 'संशोधित' बायोडाटा जारी किया. इस नए दस्तावेज में उनकी जन्मतिथि तो 1 जुलाई 1994 ही रही, लेकिन साल 2006 में बीजेपी जॉइन करने वाले उस पूरे हिस्से (रेफरेंस) को ही हटा दिया गया. संशोधित बायोडाटा में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि उन्होंने पार्टी कब जॉइन की थी. हालांकि, इस पूरे 'बायोडाटा मिसमैनेजमेंट' पर बीजेपी की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। 

दो अलग-अलग बायो-डेटा डॉक्यूमेंट जारी होना अब उपचुनाव में चर्चा का नया विषय बन गया है. यह विवाद इसलिए और ज्यादा तूल पकड़ रहा है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले बीजेपी ने अपने मूल उम्मीदवार अभिषेक बंटी का टिकट काट दिया था, जबकि बंटी अपना नामांकन पत्र भी दाखिल कर चुके थे. हालांकि, अभिषेक बंटी ने उम्मीदवारी वापस लेने के पीछे 'व्यक्तिगत कारणों' का हवाला दिया है। 

अभिषेक बंटी का टिकट क्यों कटा?
लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक, असली कहानी कुछ और है. अभिषेक बंटी के पिता का नाम चारा घोटाले  से जुड़े एक मामले में दोषी के तौर पर सामने आया था. इसके अलावा उनके नामांकन पत्र में दी गई कुछ जानकारियों को लेकर भी तकनीकी पेंच फंस रहा था. प्रशांत किशोर की पार्टी की एंट्री के बाद बीजेपी इस सुरक्षित सीट पर कोई भी कानूनी या नैतिक जोखिम नहीं लेना चाहती थी, इसलिए आनन-फानन में उम्मीदवार बदलने का फैसला किया गया। 

बांकीपुर सीट को पिछले कई दशकों से बीजेपी का सबसे सुरक्षित किला माना जाता रहा है. लेकिन इस बार के उपचुनाव में 'जन सुराज' के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है.  यहां 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे और 3 अगस्त को नतीजे घोषित किए जाएंगे। 

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