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मान्यता दस्तावेजों में कमी पड़ी भारी, हरियाणा के 1107 स्कूल एमआईएस ब्लॉक

गुरुग्राम गुरुग्राम में निजी स्कूलों की मान्यता और आरटीई दाखिलों को लेकर शुरू हुई सख्ती का असर गुरुग्राम में दिखाई देने लगा है। गुरुग्राम के 99 निजी स्कूल शिक्षा विभाग की कार्रवाई की जद में आ गए हैं। ये निजी स्कूल अगले आदेश तक शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के दायरे से बाहर हो गए हैं।…

मान्यता दस्तावेजों में कमी पड़ी भारी, हरियाणा के 1107 स्कूल एमआईएस ब्लॉक

गुरुग्राम
गुरुग्राम में निजी स्कूलों की मान्यता और आरटीई दाखिलों को लेकर शुरू हुई सख्ती का असर गुरुग्राम में दिखाई देने लगा है। गुरुग्राम के 99 निजी स्कूल शिक्षा विभाग की कार्रवाई की जद में आ गए हैं। ये निजी स्कूल अगले आदेश तक शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के दायरे से बाहर हो गए हैं।

इनमें कई ऐसे स्कूल भी शामिल हैं, जिन्हें शहर के बड़े और चर्चित निजी स्कूलों में गिना जाता है। शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों का मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) एक्सेस बंद कर दिया है। इसका मतलब है कि फिलहाल ये स्कूल आरटीई के तहत दाखिले की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

लिस्ट में कौन-कौन से स्कूल शामिल
विभागीय पोर्टल पर कोई नया काम भी नहीं कर सकेंगे। जिन प्रमुख स्कूलों के नाम सूची में सामने आए हैं, उनमें इंपीरियल हेरिटेज स्कूल धनकोट, जीडी गोयनका सिग्नेचर स्कूल सोहना रोड और नारायणा ई-टेक्नो स्कूल सेक्टर-49 समेत कई स्कूल शामिल हैं। विभाग का कहना है कि दस्तावेज और मान्यता संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही इन स्कूलों को दोबारा एमआईएस से जोड़ा जाएगा।

पूरे प्रदेश में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई केवल गुरुग्राम तक सीमित नहीं है। पूरे हरियाणा के 22 जिलों में कुल 1107 निजी स्कूलों को एमआईएस से ब्लॉक किया गया है। सबसे अधिक 162 स्कूल कैथल में कार्रवाई की जद में आए हैं। इसके बाद गुरुग्राम में 99, हिसार में 98, पानीपत में 92, भिवानी में 76, फरीदाबाद में 70, जींद में 67, रोहतक में 63, करनाल में 57, यमुनानगर में 51 और सोनीपत में 45 स्कूलों पर कार्रवाई हुई है। वहीं महेंद्रगढ़ में 33, पलवल में 30, झज्जर में 28, चरखी दादरी में 23, कुरुक्षेत्र में 22, अंबाला में 20, रेवाड़ी और सिरसा में 16-16, नूंह में 15, पंचकूला में 14 और फतेहाबाद में सबसे कम 10 स्कूलों का एमआईएस एक्सेस बंद किया गया है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन स्कूलों ने अभी तक मान्यता, भूमि, भवन, सुरक्षा या अन्य जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं किए हैं, उन्हें पहले सभी कमियां दूर करनी होंगी। इसके बाद ही उनके मामलों की समीक्षा होगी। तब तक इन स्कूलों की आरटीई प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित रहेगी। विभाग पहले भी कई बार इन स्कूलों को नोटिस जारी कर चुका था। करीब 413 स्कूलों को अतिरिक्त समय भी दिया गया, लेकिन संतोषजनक दस्तावेज नहीं मिलने पर उन्हें भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। विभाग अब आगे की प्रक्रिया के तहत ऐसे स्कूलों के खिलाफ और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

इस तरह असर पड़ेगा
● एमआईएस ब्लॉक होने से 99 निजी स्कूलों की सुविधाओं पर रोक लगेगी।

● दाखिलों से लेकर विभागीय कामकाज तक प्रभावित होने से दिक्कत होगी।

● आरटीई के प्रवेश अटकेंगे, विभागीय ऑनलाइन प्रक्रियाएं भी प्रभावित होंगी।

● मान्यता की खामियों का खामियाजा भुगतेंगे स्कूल, कई काम ठप हो जाएंगे।

● मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम बंद होने से नए सत्र की तैयारी पर असर पड़ेगा।

● बच्चों के नए दाखिले और विभागीय मंजूरियों पर भी पूरी तरह रोक रहेगी।

अस्थायी मान्यता नहीं
145 स्कूलों को डीईईओ से मंजूरी मिलने के बावजूद अस्थायी मान्यता न होने के कारण एमआईएस से ब्लॉक कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि अब केवल वहीं स्कूल एमआईएस और यू-डाइस से जुड़ पा रहे हैं, जिनकी मान्यता और दस्तावेज पूरी तरह सही हैं।

विभाग की जांच में कई गड़बड़ियां आईं सामने
जांच में कई ऐसे संस्थान भी सामने आए जो कागजों पर स्कूल और जमीन पर कोचिंग सेंटर या डमी स्कूल की तरह चल रहे थे। इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों का बोर्ड में रजिस्ट्रेशन किसी दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूल से कराया जाता था, जबकि नियमित पढ़ाई किसी और जगह होती थी। विभाग का मानना है कि डिजिटल सत्यापन शुरू होने के बाद ऐसे मामलों की पहचान आसान हुई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई स्कूल हरियाणा स्कूल शिक्षा नियम, 2003 के तहत तय मानकों पर खरे नहीं उतर सके। कहीं पर्याप्त जमीन नहीं मिली, कहीं भवन और सुरक्षा व्यवस्था अधूरी थी तो कई स्कूल मकानों और दुकानों में सीमित कमरों के साथ संचालित होते पाए गए।

इसलिए कार्रवाई हुई
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सभी स्कूल एक जैसी वजह से कार्रवाई की जद में नहीं आए। 693 स्कूल ऐसे थे, जिन्होंने आरटीई सत्र की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। 269 स्कूलों के आवेदन जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (डीईईओ) ने जांच के बाद खारिज कर दिए।

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