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जगन्नाथ रथ मेले में उमड़ी भीड़, मांदर से लेकर महंगे तोते तक चर्चा में

रांची  भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के साथ शुरू हुआ 10 दिवसीय रथ मेला इन दिनों रांचीवासियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां आस्था के साथ झारखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत, खरीदारी, स्वादिष्ट व्यंजन औऱ आधुनिक मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिल…

जगन्नाथ रथ मेले में उमड़ी भीड़, मांदर से लेकर महंगे तोते तक चर्चा में

रांची
 भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के साथ शुरू हुआ 10 दिवसीय रथ मेला इन दिनों रांचीवासियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।

यहां आस्था के साथ झारखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत, खरीदारी, स्वादिष्ट व्यंजन औऱ आधुनिक मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। हर दिन हजारों लोग रथ दर्शन के साथ मेले का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।

मेले में बच्चों के लिए 360 डिग्री झूला, ट्रेंपोलीन, जंपिंग जोन और मौत का कुआं सबसे बड़े आकर्षण बने हुए हैं। इन झूलों का आनंद लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। वहीं खिलौनों और घरेलू सामान की दुकानों पर भी खरीदारी की भीड़ उमड़ रही है।

35 हजार रुपये तक का मिल रहा तोता
इस बार मेले में पक्षियों और पालतू जानवरों की दुकानें भी लोगों का ध्यान खींच रही हैं। यहां बड़ा तोता 3 हजार से 35 हजार रुपये तक में बिक रहा है, जबकि छोटा तोता 500 से 600 रुपये प्रति पीस उपलब्ध है। वहीं ललमुनिया पक्षी 250 से 300 रुपये प्रति जोड़ा की कीमत पर बेचा जा रहा है।

आदिवासी संस्कृति की झलक, मांदर-नगाड़े की गूंज
मेले की सबसे खास पहचाल आदिवासी संस्कृति से जुड़ा बाजार बना हुआ है। यहां मांदर, नगाड़ा, ढोल, तीर-धनुष, फरसा, दौली, कुदाल, कुमनी (बांस से बनी मछली पकड़ने की जाल), जाल और पैईला जैसी पारंपरिक वस्तुएं बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

मंडल नायक के नगाड़ा स्टॉल पर गूंजती पारंपरिक धुनें मेले के माहौल को और जीवंत बना रही हैं। लोग मांदर और नगाड़े की थाप पर रुककर वीडियो बना रहे हां और इन पलों को अपने मोबाइल में कैद कर रहे हैं।

बसिया से मांदर बेचने आए एक व्यापारी ने बताया कि एक मांदर बनाने में करीब 72 घंटे की मेहनत लगती है। वे इस बार 4000 का किराया देकर 17 मांदर लेकर मेले में पहुंचे हैं।

उन्होंने बताया कि बसिया से रांची आने में लगभग चार हजार रुपये का खर्च हुआ, जबकि दुकान लगाने के लिए प्रतिदिन 400 रुपये किराया देना पड़ रहा है। इसके अलावा ठेकेदार द्वारा अलग से शुल्क भी लिया जा रहा है।

वहीं मेले में महिलाओं के लिए रसोई के घरेलू सामान, कपड़े, श्रृंगार सामग्री और सजावटी वस्तुओं की भी बड़ी संख्या में दुकानें लगी हैं। वहीं चाउमीन, गोलगप्पा, चाट, मिठाई और अन्य व्यंजनों के स्टाल पर लोगों की भीड़ लगातार बनी रही।

सस्ते से लेकर मंहगे तक की सामानों की लिस्टः
    साड़ी – 99 से 150 रुपये तक
    पैर पोछना – 100 रुपये में चार पीस
    मोर पंख – 10 रुपये
    मोर पंखा – 60 से 80 रुपये तक
    छाता – 100 रुपये
    गमछा – 50 से 100 रुपये तक
    चकला-बेलन – 100 से 150 रुपये तक
    मछली पकड़ने की बंशी – 100 से 250 रुपये तक
    मछली का जाल – 800 से 1000 रुपये तक
    छोटा मांदर – 3000 रुपये
    बड़ा मांदर – 4000 रुपये
    नगाड़ा – 3500 रुपये
    तीर-धनुष (सेट) – 500 रुपये
    फरसा – 450–500 रुपये
    दौली – 400 रुपये
    कुमनी (बांस की मछली पकड़ने की जाल) – 250 रुपये से शुरू

महिलाओं और फूड लवर्स के लिए भी खास आकर्षण
महिलाओं के लिए रसोई के घरेलू सामान, कपड़े, श्रृंगार सामग्री और सजावटी वस्तुओं की दर्जनों दुकानें लगी हैं। वहीं चाउमीन, गोलगप्पा, चाट, मिठाई और अन्य व्यंजनों के स्टॉल पर सुबह से रात तक भीड़ बनी हुई है।
मौर पूजा में उमड़ रही श्रद्धा

रथ मेला के दौरान मौर पूजा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग मौर की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर उसे मेले में स्थापित कर रहे हैं। मालाकार श्रद्धालुओं से पूजा करवा रहे हैं और लोग श्रद्धापूर्वक दक्षिणा अर्पित कर रहे हैं। मेले के कई स्थानों पर मौर पूजा का आयोजन हो रहा है।

महंगे टेंडर का असर दुकानों में दिखा
मिठाई व्यापारियों ने बताया कि अधिकांश मिठाइयां 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही हैं, लेकिन हर साल दुकान लगाने की लागत बढ़ती जा रही है। इस बार 25 फीट जगह के लिए करीब 77 हजार रुपये तक शुल्क देना पड़ा। पिछली बार इतनी ही जगह के लिए 75 हजार थे।

 

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