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प्रशासन पूरी तैयारी के साथ किसानों की सहायता के लिए तत्पर रहे

भोपाल  बलराम कृषि महोत्सव-2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को झाबुआ में बलराम कृषि महोत्सव के अंतर्गत ऑनलाइन किसानों से चर्चा की। उन्होने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उल्लेखनीय है कि "कृषक कल्याण…

प्रशासन पूरी तैयारी के साथ किसानों की सहायता के लिए तत्पर रहे

भोपाल 

बलराम कृषि महोत्सव-2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को झाबुआ में बलराम कृषि महोत्सव के अंतर्गत ऑनलाइन किसानों से चर्चा की। उन्होने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उल्लेखनीय है कि "कृषक कल्याण वर्ष" के अंतर्गत प्रदेश में "बलराम कृषि महोत्सव-2026 मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर से इसकी शुरूआत की। अगला बलराम कृषि महोत्सव 21 जुलाई को आलीराजपुर में, 23 जुलाई को बड़वानी, 25 जुलाई को खरगौन में, 27 जुलाई को बुरहानपुर में और 30 जुलाई को खण्डवा में आयोजित किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। ऐसी स्थिति में उन्होंने प्रशासन को पूरी तैयारी के साथ किसानों की सहायता के लिए तत्पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि किसानों को तीन लाख रुपये तक का कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को मात्र पांच रुपये में बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं तथा डेयरी विकास के लिए 40 लाख रुपये तक की योजना में 33 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण के सिद्धांतों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाएं। केंद्र और राज्य सरकार किसान हितों की रक्षा तथा कृषि विकास के लिए हर संभव सहयोग देने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के "प्राकृतिक खेती" के विजन को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत झाबुआ जिले में 50 कृषि सखियों का चयन किया गया है। जिले में वर्तमान में लगभग 3,125 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है तथा किसानों की प्राकृतिक खेती का प्रमाणीकरण भी कराया गया है।

उन्होंने कहा कि "एक जिला-एक उत्पाद" योजना के माध्यम से कड़कनाथ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में जिले में कड़कनाथ पालन से एक हजार से अधिक नए हितग्राही जोड़े गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन किसानों की नियमित आय का मजबूत आधार बन सकता है। पशुपालन विभाग की हितग्राहीमूलक योजनाओं के माध्यम से डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन सहित अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि जिले में 760 से अधिक तालाबों का विकास किया गया है, जिनमें लगभग तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य पालन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नगदी फसल के रूप में कपास उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। खरीफ-2026 में अब तक जिले में 23 हजार 230 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बोवनी हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के 19 हजार 888 हेक्टेयर की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि धार जिले के बदनावर स्थित पीएम मित्रा पार्क से झाबुआ के कपास उत्पादक किसानों को "खेत से कारखाने" तक की सुविधा मिलेगी, जिससे किसानों की आय, रोजगार एवं औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

झाबुआ का टमाटर बना प्रदेश की पहचान

मुख्यमंत्री ने पेटलावद में स्थापित टमाटर प्रसंस्करण इकाई का उल्लेख करते हुए कहा कि जिले में 2,812 हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की खेती की जा रही है तथा लगभग 1.68 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। यहां टमाटर उत्पादक किसानों का क्लस्टर विकसित किया गया है तथा टमाटर सॉस और केचअप का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा 12 सोलर ड्रायर यूनिट स्थापित कर टमाटर का डिहाइड्रेशन भी किया जा रहा है। झाबुआ का टमाटर राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा तथा दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पूर्ण होने पर लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा तथा करीब 50 हजार किसानों को लाभ मिलेगा। इससे जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता एवं कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो सकेगा।

महोत्सव की गतिविधियां

बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीजों, नवीन कृषि यंत्रों, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण तथा शासन की किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है जिससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं समृद्ध बन सके।

महोत्सव में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले उत्कृष्ट किसानों का सम्मान भी किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरण, कृषि यंत्रों एवं उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन तथा किसानों को तकनीकी साहित्य भी उपलब्ध कराया जा रहा है। महोत्सव में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, कृषि अभियांत्रिकी तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है। किसानों को विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों से सीधे संवाद का और अपनी समस्याओं के समाधान किया जा रहा है। साथ ही उन्हें नवीन तकनीकों एवं बाजार आधारित कृषि मॉडल की जानकारी भी मिलेगी।

किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं, ऑनलाइन कृषि परामर्श, मौसम आधारित खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई, उन्नत कृषि यंत्रों तथा आधुनिक कृषि प्रबंधन प्रणालियों की जानकारी मिल रही है। किसानों को बदलती जलवायु के अनुरूप खेती की नई पद्धतियों एवं जोखिम प्रबंधन के उपायों से भी अवगत कराया जा रहा है।

13 नवम्बर तक होंगे आयोजन

कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, एमएसएमई, राजस्व, ऊर्जा सहित 16 विभागों को एक मंच पर लाकर किसानों के समग्र विकास का अभियान है। किसानों की आय बढ़ाने के लिये रोडमैप तैयार किया गया है। यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने, प्रसंस्करण, विपणन और रोजगार से जोड़ने का व्यापक अभियान है। प्रदेश के सभी जिलों में आगामी 13 नवम्बर तक अनेक आयोजन होंगे और खेती-किसानी पर आधारित गतिविधियां आयोजित की जायेंगी।

6 प्रमुख कृषि संकल्प

बलराम कृषि महोत्सव में कृषि विभाग के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, सहकारिता, कृषि अभियांत्रिकी, ग्रामीण विकास तथा अन्य संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी है।

महोत्सव के माध्यम से किसानों को 6 प्रमुख कृषि संकल्पों से जोड़ा गया है –

  •              प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा।
  •              जल संरक्षण एवं "हर खेत को पानी" की दिशा में प्रयास।
  •              कृषि यंत्रीकरण एवं आधुनिक तकनीकों का विस्तार।
  •              फसल विविधीकरण एवं मूल्य संवर्धन।
  •              किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहन।
  •              शासन की किसान कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ किसानों तक पहुंचाना।
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