दिल्ली नर्सिंग काउंसिल की जांच में सरोज अस्पताल की बड़ी लापरवाही उजागर, कार्रवाई तय

नई दिल्ली रोहिणी के सरोज सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की जांच में नर्सिंग स्टाफ के रजिस्ट्रेशन की नियुक्ति में बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। दिल्ली नर्सिंग काउंसिल (DNC) ने जांच के बाद अस्पताल प्रबंधन और 120 नर्सों पर जुर्माना लगाने के साथ अस्पताल के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। यह जांच दिल्ली…

दिल्ली नर्सिंग काउंसिल की जांच में सरोज अस्पताल की बड़ी लापरवाही उजागर, कार्रवाई तय

नई दिल्ली
रोहिणी के सरोज सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की जांच में नर्सिंग स्टाफ के रजिस्ट्रेशन की नियुक्ति में बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। दिल्ली नर्सिंग काउंसिल (DNC) ने जांच के बाद अस्पताल प्रबंधन और 120 नर्सों पर जुर्माना लगाने के साथ अस्पताल के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। यह जांच दिल्ली हाई कोर्ट के 3 फरवरी के आदेश पर गठित सब कमेटी और रिव्यू कमेटी ने की। मामला मार्च 2018 में गार्गी मीणा के इलाज से जुड़ा है। शिकायतकर्ता उत्तम चंद मीणा की शिकायत के बाद अस्पताल के नर्सिंग रिकॉर्ड की जांच कराई गई।

DNC ने 31 मार्च 2018 तक के 245 नर्सिंग कर्मचारियों के रिकॉर्ड और रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट्स की जांच की। जांच में सामने आया कि इनमें से केवल 114 नर्सों का DNC में वैलिड रजिस्ट्रेशन था। 120 नर्सें दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड थीं, लेकिन उन्होंने दिल्ली में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। इसके अलावा 6 लोग ऐसे मिले, जिनका किसी भी राज्य की नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रेशन नहीं था। जांच में यह भी पाया गया कि 4 ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन और 1 नर्सिंग ऐड को नर्सिंग स्टाफ के रूप में तैनात किया गया था।

सरोज अस्पताल की जांच में मिली गड़बड़ियां

  • DNC की रिव्यू कमेटी ने 11 जून 2026 को इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हुए माना कि अस्पताल ने DNC अधिनियम, 1997 की धारा 17 का उल्लंघन किया है।
  • काउंसिल ने बिना DNC रजिस्ट्रेशन के काम कर रही 120 नर्सों पर 2-2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
  • अस्पताल प्रबंधन पर भी प्रत्येक ऐसी नर्स के लिए 2-2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
  • सभी संबंधित पक्षों को चेतावनी पत्र भी जारी किए जाएंगे। DNC ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) को अस्पताल के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश भी भेजी है।
  • आदेश में कहा गया है कि संबंधित पक्ष 10 दिन के भीतर अपना पक्ष रख सकते हैं। यदि जुर्माना जमा नहीं किया गया या जवाब नहीं दिया गया तो उनके खिलाफ आगे की आपराधिक कार्रवाई बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के शुरू कर दी जाएगी।

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