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मध्यप्रदेश में UCC बिल पास, CM का बड़ा दावा- 76% मुस्लिम महिलाओं का मिला समर्थन, सदन में लगे ‘जय श्रीराम’ के नारे

भोपाल  भारी हंगामे के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पास हो गया. इससे पहले विधेयक पेश होते ही पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा घमासान छिड़ गया. एक तरफ जहां विपक्ष इसे प्रवर समिति यानि सलेक्ट कमेटी (Select Committee) में भेजने की मांग को लेकर वेल में उतरकर लगातार नारेबाजी करता…

मध्यप्रदेश में UCC बिल पास, CM का बड़ा दावा- 76% मुस्लिम महिलाओं का मिला समर्थन, सदन में लगे ‘जय श्रीराम’ के नारे

भोपाल 

भारी हंगामे के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पास हो गया. इससे पहले विधेयक पेश होते ही पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा घमासान छिड़ गया. एक तरफ जहां विपक्ष इसे प्रवर समिति यानि सलेक्ट कमेटी (Select Committee) में भेजने की मांग को लेकर वेल में उतरकर लगातार नारेबाजी करता रहा, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सत्ता पक्ष के विधायकों ने 'जय श्री राम' के नारे लगाकर पलटवार किया. हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब अलग-अलग मजहबी तौल-कांटा नहीं होगा और प्रदेश राम से रहीम तक तथा एंथोनी से अकबर तक एक ही संविधान से चलेगा. CM ने दावा किया कि 76% मुस्लिम बहनों और 40% मुस्लिम भाइयों ने UCC समर्थन किया है.  विपक्ष के भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। 

 सीएम बोले- अलग-अलग मजहबी कानून नहीं चल सकते
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने यूसीसी बिल को जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया. हंगामे के बीच ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मोर्चा संभाला और सदन में 'जय श्री राम' के नारे लगवाए. उन्होंने कहा कि विपक्ष को मुस्लिम तुष्टिकरण बंद करना चाहिए.मुख्यमंत्री ने कड़े तेवरों में कहा, "आज के बाद मध्यप्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी. गोवा, उत्तराखंड और असम के बाद मध्यप्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा जहां यूसीसी लागू होगा. उन्होंने कहा- देश में अलग-अलग मजहबी कानून नहीं चल सकते, सभी नागरिक एक ही कानून से तौले जाएंगे. विपक्ष बताए कि हम अपने दो बेटों को अलग-अलग दृष्टिकोण से क्यों देखते हैं?" इसके साथ ही बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हिंदू, हिंदुस्तानी और आदिवासियों की विरोधी है। 

सीएम यादव ने कहा, "राम से रहीम तक, रविंद्र से रॉबिन तक, अमर से एंथोनी और अकबर तक, देश एक संविधान से चले।" उन्होंने दावा किया कि समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मध्यप्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी और राज्य गोवा, उत्तराखंड और असम के बाद इस दिशा में कदम बढ़ाने वाले चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा।

विपक्ष पर हुए हमलावर
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इन लोगों के खाने के दांत अलग हैं और दिखाने के अलग। जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी। उनके वक्तव्य के दौरान विपक्ष का हंगामा जारी रहा, लेकिन मुख्यमंत्री ने सरकार का पक्ष विस्तार से सदन के सामने रख रहें हैं। सीएम मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में अलग-अलग मजहबी तौल कांटा नहीं होगा। सब एक ही बाट से तौले जाएंगे। इस दौरान सीएम ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष बताएं कि हम अपने दो बेटों को अलग-अलग दृष्टिकोण से क्यों देखते हैं?

समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पर सदन में वक्तव्य देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को सुझाव देने के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तुष्टिकरण और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करती रही है तथा देश की जनता की पीठ में खंजर घोंपने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के बाद मध्य प्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता लागू होने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेसियों के "दांत खाने के और, दिखाने के और हैं।" अब कांग्रेस का पाखंड और दोहरा चरित्र नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान का रत्तीभर भी सम्मान करती है तो उसे इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए। उनका आरोप था कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति करते हुए हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से काम करती रही है। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान कांग्रेस विधायक "चंदा चोरों" और "गद्दी छोड़ो" के नारे लगाते रहे।

'मुस्लिम वर्ग को टारगेट करने की साजिश: आरिफ मसूद
इससे पहले कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसमें कई विसंगतियां होने का दावा किया. उन्होंने कहा कि संविधान का आर्टिकल 29 अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का अधिकार देता है.मसूद ने तर्क दिया, "यूसीसी लाकर एक वर्ग विशेष को टारगेट किया जा रहा है. पति-पत्नी के आपसी विवाद को सिविल के बजाय क्रिमिनल में लाया जा रहा है. जब अनुसूचित जनजातियों (ST) को यूसीसी से बाहर या राहत दी गई है, तो मुस्लिम वर्ग को भी वही राहत मिलनी चाहिए. सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों है? इस बिल को गहन अध्ययन के लिए प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए। 

10 लाख लोगों की राय से बना बिल: कैलाश विजयवर्गीय
आरिफ मसूद के आरोपों का जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर (Point of Order) उठाया. उन्होंने कहा कि यह बिल किसी बंद कमरे में तैयार नहीं किया गया है, बल्कि सरकार ने हर शहर में जाकर करीब 10 लाख लोगों का जनमत संग्रह किया है. 'एक देश, एक विधान' हमारा संकल्प रहा है और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए ही इसे लाया गया है.वहीं, मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि कांग्रेस के पास तर्कों की कमी है और वह केवल इस महत्वपूर्ण चर्चा से भागने की कोशिश कर रही है। 

यूसीसी नहीं ओबीसी आरक्षण की जरुरत है: उमंग सिंघार

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया. सिंघार ने कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी विधेयक की प्रति सदस्यों को कम से कम दो दिन पहले दी जानी चाहिए, जो इस मामले में नहीं हुआ. उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य को अभी 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण बिल की सख्त जरूरत है, न कि यूसीसी की.इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि सामान्यतः कार्यमंत्रणा समिति की बैठक के बाद ही ऐसे बिल लाए जाते हैं और इसी परंपरा का पालन किया गया है. विशेष परिस्थितियों में सरकार तत्काल बिल प्रस्तुत कर सकती है। 

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया. सिंघार ने कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी विधेयक की प्रति सदस्यों को कम से कम दो दिन पहले दी जानी चाहिए, जो इस मामले में नहीं हुआ. उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य को अभी 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण बिल की सख्त जरूरत है, न कि यूसीसी की.इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि सामान्यतः कार्यमंत्रणा समिति की बैठक के बाद ही ऐसे बिल लाए जाते हैं और इसी परंपरा का पालन किया गया है. विशेष परिस्थितियों में सरकार तत्काल बिल प्रस्तुत कर सकती है। 

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया. सिंघार ने कहा कि नियमों के अनुसार किसी भी विधेयक की प्रति सदस्यों को कम से कम दो दिन पहले दी जानी चाहिए, जो इस मामले में नहीं हुआ. उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य को अभी 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण बिल की सख्त जरूरत है, न कि यूसीसी की.इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि सामान्यतः कार्यमंत्रणा समिति की बैठक के बाद ही ऐसे बिल लाए जाते हैं और इसी परंपरा का पालन किया गया है. विशेष परिस्थितियों में सरकार तत्काल बिल प्रस्तुत कर सकती है। 

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