Delhi HC का बड़ा फैसला, छात्रों के प्रदर्शन की NIA जांच वाली PIL खारिज, कहा- यह हमारा अधिकार क्षेत्र नहीं

नई दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में हुए 'संसद चलो' आंदोलन की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी मामले की जांच एनआईए को सौंपनी है या नहीं,…

Delhi HC का बड़ा फैसला, छात्रों के प्रदर्शन की NIA जांच वाली PIL खारिज, कहा- यह हमारा अधिकार क्षेत्र नहीं

नई दिल्ली

दिल्ली उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में हुए 'संसद चलो' आंदोलन की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी मामले की जांच एनआईए को सौंपनी है या नहीं, यह तय करना पूरी तरह से केंद्र सरकार का काम है और इसमें न्यायपालिका दखल नहीं दे सकती। 

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने सुनाया. याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल ने अदालत में गुहार लगाई थी कि इस विरोध प्रदर्शन के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र हो सकता है, इसलिए इसकी जांच किसी विशेष एजेंसी से कराई जाए. लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि कानूनन इस तरह के मामलों में सीधे अदालत आदेश नहीं दे सकती। 

अदालत की कार्यवाही के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उन्हें पता भी है कि एनआईए अधिनियम की धारा 6 के तहत प्रक्रिया कैसे काम करती है? कोर्ट ने कहा कि एनआईए कोई सामान्य पूछताछ करने वाली एजेंसी नहीं है, बल्कि यह एक पेशेवर जांच एजेंसी है. इसके लिए सबसे पहले एक औपचारिक एफआईआर होनी चाहिए, जिसके बाद राज्य सरकार के जरिए रिपोर्ट केंद्र सरकार के पास जाती है. यदि केंद्र सरकार को लगता है कि मामला गंभीर है, तो वह खुद इस पर फैसला ले सकती है। 

सॉलिसिटर जनरल का पक्ष और कोर्ट की दो टूक
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला सार्वजनिक कानून से जुड़ा हुआ है. इस पर कोर्ट ने सरकार को पूरी छूट देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार को लगता है कि जांच एनआईए को सौंपी जानी चाहिए, तो कानून में पहले से ही पूरा तंत्र मौजूद है और सरकार अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से फैसला ले सकती है. कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि हम सरकार की शक्तियों में किसी भी तरह की दखलअंदाजी नहीं कर रहे हैं, लेकिन अदालत खुद अपनी तरफ से यह संतुष्टि दर्ज नहीं कर सकती कि यह मामला एनआईए को ही सौंपा जाए। 

याचिका हुई वापस
याचिकाकर्ता के वकील बारुण कुमार सिन्हा ने दलील दी कि इस आंदोलन के पीछे कई छुपे हुए कारण और विदेशी फंडिंग से जुड़ी बातें हो सकती हैं, इसलिए मामले की गहराई तक जाने के लिए विशेष जांच दल या एनआईए जैसी एजेंसी की जरूरत है. हालांकि, अदालत के तीखे सवालों और कानूनी प्रावधानों की स्पष्टता को देखते हुए अंत में याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली। 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports