CJP प्रदर्शन पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, 2500 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान, बड़ा एक्शन संभव

नई दिल्ली  NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन के खत्‍म होने के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे हैं. सरकार और संगठन में बातचीत के बाद भी गतिरोध बना हुआ है. CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने साफ कहा है कि अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान…

CJP प्रदर्शन पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, 2500 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान, बड़ा एक्शन संभव

नई दिल्ली

 NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन के खत्‍म होने के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे हैं. सरकार और संगठन में बातचीत के बाद भी गतिरोध बना हुआ है. CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने साफ कहा है कि अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो सरकार के साथ आगे की बैठकों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. आशुतोष रांका ने कहा कि शुक्रवार को हुई बैठक में मुआवजे और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सरकार की तरफ से सकारात्मक जवाब मिला था. इन दोनों मुद्दों पर सिद्धांत रूप से सहमति बनी थी और उन्हें उम्मीद है कि इन पर सरकार की तरफ से लिखित जवाब भी मिलेगा. लेकिन संगठन की सबसे अहम मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है. सीजेपी के प्रतिनिधियों ने 24 जुलाई को ही साफ कर दिया था कि जब तक धर्मेंद प्रधान का इस्‍तीफा नहीं होगा, विरोध-प्रदर्शन यूं ही जारी रहेगा। 

आशुतोष रांका ने कहा कि अगर सरकार पहले से तय कर चुकी है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, तो हमें साफ बता दे. फिर इस तरह की बैठकों का कोई मतलब नहीं है. उसके बाद हम अपनी आगे की रणनीति पर काम करेंगे. अगर सरकार इसी रुख पर कायम रही तो हमें भी कड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. NTA अधिकारियों को बर्खास्त किए जाने पर क्या बोले आशुतोष रांका? रांका ने सरकार द्वारा NTA के 47 अधिकारियों को हटाए जाने के फैसले पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इस फैसले की पूरी जानकारी देखने के बाद ही टिप्पणी की जाएगी, लेकिन इससे आंदोलन की मुख्य मांग नहीं बदलती. उनके मुताबिक, परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और NEET पेपर लीक के बाद छात्रों की आत्महत्या जैसे मामलों की अंतिम जवाबदेही देश के शिक्षा मंत्री की है, इसलिए उन्हें इस्तीफा देना ही होगा। 

सरकार को सौंपी मांग
सीजेपी प्रवक्ता ने बताया कि CJP प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को अपनी मांगों का विस्तृत चार्टर भी सौंप दिया है, जिसमें एग्जाम सिस्टम में सुधार से जुड़े कई प्रस्ताव शामिल हैं. संगठन का कहना है कि सरकार अगर इन सुधारों पर गंभीरता से काम करती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से कोई समझौता नहीं होगा. इस बीच जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना लगातार जारी है. छात्र डटे हुए हैं और संगठन ने संकेत दिए हैं कि सरकार के अगले रुख के आधार पर आंदोलन की नई रणनीति तय की जाएगी। 

CJP प्रोटेस्ट पर बड़ा खुलासा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने डेरा जमा रखा है. सरकार से अब तक सीजेपी की बात नहीं बन पाई है. आज तीसरे दौर की वार्ता है. इस बीच जंतर-मंतर पर 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद जंतर-मंतर पर लगाए गए दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) ने पिछले तीन दिनों में विरोध स्थल पर क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले 2500 से अधिक लोगों की पहचान की है। 

बदमाशों ने पुलिस अफसरों पर चाकू से हमला किया
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीजेपी आंदोलन के दौरान हुई झड़पों के बाद निगरानी बढ़ाने के लिए एफआरएस को तैनात किया गया था. इसने 21 जुलाई से 23 जुलाई के बीच ऐसे 2,500 से अधिक लोगों का पता लगाया. पुलिस का आरोप है कि भीड़ में शामिल बदमाशों ने सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया और चाकू-अन्य धारदार हथियारों से हमले किए। 

जंतर-मंतर पर विरोध स्थल के आस-पास मुख्य एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर FRS की चार यूनिट लगाई गई हैं. ये दिल्ली पुलिस के डेटाबेस से जुड़ी हुई हैं. पुलिस अधिकारी इस सिस्टम की रियल-टाइम निगरानी कर रहे हैं इससे वे किसी भी वॉन्टेड अपराधी या आदतन अपराधी की पहचान तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं, जिनकी जानकारी पहले से ही पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद है। 

दिल्ली हिंसा मामले में 15 एफआईआर
यह नई जानकारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा की जांच के बीच सामने आई है. दिल्ली पुलिस ने बताया कि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद लगाया गया था, जब प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प हुई थी. अब तक दिल्ली पुलिस ने हिंसा के सिलसिले में 15 FIR दर्ज की हैं और पुलिसकर्मियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में कथित तौर पर शामिल लोगों की जांच जारी है। 

जंतर-मंतर पर क्यों हो रहा प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रोटेस्ट नीट पेपर लीक के विरोध में हो रहा है. जंतर-मंतर पर हजारों छात्र जुटे हैं. इसकी अगुवाई अभिजीत दिपके की सीजेपी कर रही है. जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी शिक्षा प्रणाली में अधिक जवाबदेही और सुधार की मांग को लेकर उतरे हैं. ये सभी एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 

20 जुलाई को क्या हुआ था?
जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान था. यह विरोध-प्रदर्शन तब और तेज हो गया, जब 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समर्थित प्रदर्शनकारियों को ‘संसद चलो’ के आह्वान के तहत संसद की ओर मार्च करते समय दिल्ली पुलिस ने रोक दिया. इसके बाद हुई झड़पों में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इसमें कई प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी घायल हो गए. हिंसा के बाद कई FIR दर्ज की गईं। 

CJP का पुलिस पर गंभीर आरोप
सीजेपी जंतर-मंतर प्रदर्शन लाइव: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलन से जुड़े आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. रांका ने कहा कि उनकी टीम जल्द ही उन पुलिसकर्मियों की सूची दिल्ली पुलिस को सौंपेगी, जिन पर प्रदर्शनकारी छात्रों और स्वयंसेवकों के साथ कथित मारपीट का आरोप है. उन्होंने दावा किया कि कुछ पुलिसकर्मियों ने छात्रों के सिर फोड़े, स्वयंसेवकों को सड़कों पर घसीटा, उनकी पसलियां तोड़ीं और छोटी बच्चियों को थप्पड़ मारे. रांका ने कहा कि इन पुलिसकर्मियों की पहचान फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) से नहीं, बल्कि आम लोगों की मदद से की जाएगी और इसके बाद सूची सार्वजनिक की जाएगी। 

 CJP को आने वाले दिनों में दमन बढ़ने की आशंका
सीजेपी जंतर-मंतर प्रदर्शन लाइव: कॉक्रोच जनता पार्टी को अंदेशा है कि आने वालों दिनों में जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन से निपटने के लिए अधिक दमनात्‍मक कार्रवाई की जा सकती है. सीजपी के सौरव दास ने X पर पोस्‍ट शेयर कर कहा, ‘इस बात को लेकर चिंताएं हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति कहीं अधिक कठोर दमनात्मक कार्रवाई की ओर बढ़ सकती है. लेकिन केवल पुलिस बल पर निर्भर रहने के बजाय, आशंका है कि अधिकारी किराए पर लाए गए लोगों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो प्रदर्शनकारियों का भेष धारण कर जंतर-मंतर और आसपास के प्रदर्शन स्थलों पर हिंसा भड़काने की कोशिश करें. इससे झड़प, भगदड़ या अन्य अप्रिय घटनाएं हो सकती हैं. बाद में ऐसी घटनाओं को बड़े पैमाने पर सुरक्षा कार्रवाई और गिरफ्तारियों को उचित ठहराने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। 

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