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जौरासी घाटी में फिर कैमरे के पोल को वाहन ने मारी टक्कर, कैमरे का एंगल बदला, बड़ा हादसा टला

जौरासी घाटी में फिर कैमरे के पोल को वाहन ने मारी टक्कर, कैमरे का एंगल बदला, बड़ा हादसा टला दो दिन में दूसरी घटना, हाईवे पर दुर्घटनाओं की निगरानी के लिए लगाए गए पीटीजेड कैमरे बार-बार हो रहे क्षतिग्रस्त भितरवार/ आँतरी  नेशनल हाईवे-44 पर जौरासी वन चौकी के सामने दुर्घटनाओं की निगरानी के लिए लगाए…

जौरासी घाटी में फिर कैमरे के पोल को वाहन ने मारी टक्कर, कैमरे का एंगल बदला, बड़ा हादसा टला

जौरासी घाटी में फिर कैमरे के पोल को वाहन ने मारी टक्कर, कैमरे का एंगल बदला, बड़ा हादसा टला

दो दिन में दूसरी घटना, हाईवे पर दुर्घटनाओं की निगरानी के लिए लगाए गए पीटीजेड कैमरे बार-बार हो रहे क्षतिग्रस्त

भितरवार/ आँतरी
 नेशनल हाईवे-44 पर जौरासी वन चौकी के सामने दुर्घटनाओं की निगरानी के लिए लगाए गए हाई-रेजोल्यूशन पीटीजेड कैमरे के पोल को बीते रोज शनिवार को एक बार फिर किसी अज्ञात भारी वाहन ने टक्कर मार दी। टक्कर से पोल झुक गया और कैमरे का एंगल बदल गया। हालांकि इस बार कैमरा और सोलर प्लेट सुरक्षित रहे। सूचना मिलते ही संबंधित कंपनी के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर पोल को सीधा कर कैमरे का एंगल ठीक कर दिया है।

गौरतलब है कि गुरुवार को भी इसी स्थान पर एक भारी वाहन की टक्कर से कैमरे का पोल, सोलर प्लेट और कैमरा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके बाद कंपनी ने नया पोल स्थापित किया था, लेकिन दो दिन के भीतर ही दोबारा हुई घटना ने हाईवे पर बेलगाम वाहनों की रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जौरासी घाटी ग्वालियर-डबरा मार्ग का सबसे संवेदनशील और दुर्घटना संभावित क्षेत्र माना जाता है। पिछले एक सप्ताह से यहां लगभग प्रतिदिन सड़क हादसे हो रहे हैं। दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और उनके कारणों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने जौरासी के लगभग चार किलोमीटर क्षेत्र में चार हाई-रेजोल्यूशन पीटीजेड कैमरे लगाए हैं, जिनसे वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। करीब एक वर्ष पहले जौरासी घाटी से दतिया टोल तक आईआरवी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बुलेट और पीटीजेड जूम कैमरे लगाए गए थे। सिकरौदा चौराहे से दतिया टोल तक गुजरने वाले वाहनों की स्पीड की निगरानी दतिया टोल प्लाजा से की जाती है। हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा ओवरस्पीड और ओवरलोड वाहनों की जानकारी परिवहन विभाग को भेजी जाती है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से वाहन चालकों पर इसका अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है।

राहगीर मानवेंद्र शर्मा का कहना है कि कैमरे लगने से दुर्घटनाओं की रिकॉर्डिंग उपलब्ध हो जाती है, जिससे जांच में मदद मिलती है और वाहनों की रफ्तार पर भी कुछ हद तक नियंत्रण हुआ है।
वहीं कंपनी के टेक्नीशियन आशीष सिंह ने बताया कि रात में किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से पोल झुक गया था, जिससे कैमरे का एंगल बदल गया था। लेकिन अब उसे ठीक कर दिया गया है।

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