,

धारा 306 पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, ‘सिर्फ पैसे मांगने से नहीं बनता आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला’

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल उधार दिए पैसे वापस मांगना, लगातार भुगतान का दबाव बनाना या लेन-देन को लेकर तकाजा करना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने नहीं था।  कुलवीर सिंह उर्फ कुलबीर सिंह और…

धारा 306 पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, ‘सिर्फ पैसे मांगने से नहीं बनता आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला’

चंडीगढ़ 

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल उधार दिए पैसे वापस मांगना, लगातार भुगतान का दबाव बनाना या लेन-देन को लेकर तकाजा करना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने नहीं था। 

कुलवीर सिंह उर्फ कुलबीर सिंह और राजवीर कौर की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी सभी कानूनी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।

2016 में एक ही परिवार के चार लोगों ने की थी आत्महत्या

मामला सितंबर 2016 का है। जालंधर जिले के भोगपुर थाना क्षेत्र में अनिल अग्रवाल, उनकी पत्नी रजनी अग्रवाल और उनके दो बच्चों अभिषेक व राशि ने घर में सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली थी।

पुलिस को मौके से एक पन्ने का सुसाइड नोट मिला था। इसमें याचिकाकर्ताओं समेत 8 लोगों के नाम और मोबाइल नंबर लिखे थे। आरोप था कि मृतक परिवार ने इन लोगों से पैसे उधार लिए थे। परिवार का दावा था कि मूल रकम से अधिक और ब्याज समेत भुगतान करने के बावजूद आरोपियों की ओर से लगातार पैसों की मांग की जा रही थी।

सुसाइड नोट में रोजाना धमकाने और परिवार की महिलाओं को उठाकर ले जाने की धमकी देने के भी आरोप लगाए गए थे। इसी मानसिक दबाव के चलते परिवार ने आत्मघाती कदम उठाने की बात लिखी थी।

SIT जांच में नहीं मिला सीधा उकसावे का सबूत

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की थी। जांच के दौरान मृतक की बहन ने भी बयान दिया कि मानसिक तनाव के कारण उसने FIR दर्ज कराई थी और उसे मौत के सटीक कारणों की जानकारी नहीं थी।

SIT की विस्तृत जांच में आरोपियों की ओर से आत्महत्या के लिए सीधे उकसाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। जांच के बाद 5 आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई। इसके बावजूद कुलवीर सिंह और राजवीर कौर के खिलाफ IPC की धारा 306 के तहत चालान और सप्लीमेंट्री चालान अदालत में पेश किया गया। इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया।

कोर्ट ने कहा- सिर्फ कर्ज की वसूली को उकसावा नहीं मान सकते

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि IPC की धारा 306 के साथ धारा 107 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित करने के लिए प्रत्यक्ष उकसावे या किसी स्पष्ट कृत्य (Overt Act) और आरोपी की आपराधिक मंशा (Mens Rea) का होना जरूरी है।

कोर्ट के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति ने किसी को पैसे दिए हैं और वह अपनी रकम वापस मांगता है, तो सामान्य परिस्थितियों में वह अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है। केवल भुगतान के लिए फोन करना या रकम वापस करने का दबाव बनाना तब तक आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता, जब तक आरोपी की ओर से कोई स्पष्ट और तत्काल उकसाने वाला कृत्य सामने न आए।

सुसाइड नोट में नाम होना अकेले पर्याप्त नहीं

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुसाइड नोट में किसी व्यक्ति का नाम होना महत्वपूर्ण तथ्य हो सकता है, लेकिन केवल इसके आधार पर धारा 306 का अपराध साबित नहीं किया जा सकता। इसके लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं, जो यह दिखाएं कि आरोपी ने जानबूझकर मृतक को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया था।

FIR और पूरी कार्रवाई रद्द

हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप धारा 306 IPC के आवश्यक कानूनी तत्वों को पूरा नहीं करते। ऐसे में अदालत ने FIR नंबर 115/2016 और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ रद्द कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि प्रत्यक्ष और तत्काल उकसावे के अभाव में केवल कर्ज या भुगतान के विवाद को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला मानकर आपराधिक मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed