रांची
आम आदमी के किरदार को कागज पर उकेरने वाले महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की आज जयंती है। बच्चों से लेकर बुर्जुग तक शायद ही कोई ऐसा होगा जो मुंशी प्रेमचंद की कहानियों से ओतप्रोत नहीं हुआ होगा।
ये कथाकार वर्षों पहले भी प्रासंगिक थे और वर्तमान समय में भी इनकी प्रासंगिकता बनी हुई है। रांची विश्वविद्यालय में हिंदी विषय में शोधार्थियों की पहली पसंद मुंशी प्रेमचंद हैं और यूजी और पीजी के कोर्स में भी इनकी कहानियों को पढ़ाया जाता है।
बचपन में छात्रों ने ईदगाह से लेकर बड़े होने वाले स्नातक के विद्यार्थियों ने गोदान और गबन जैसी कहानियों से रूबरू हुए हैं। रांची विवि में मुंशी प्रेमचंद पर आठ से अधिक डि लिट हो चुके हैं और 50 से अधिक शोध हो चुके हैं।
रांची विवि में 50 से अधिक शोध और आठ डी. लिट
हिंदी साहित्य में प्रेमचंद जैसा कोई कथाकार नहीं रहा और यही वजह है कि अन्य साहित्यकारों की तुलना में शोधार्थी मुंशी प्रेमचंद पर अधिक शोध करना पसंद करते हैं। जिसका सबसे बड़ा परिणाम है कि अब तक रांची विवि में मुंशी प्रेमचंद पर आठ डी. लिट हो चुके हैं और 50 से अधिक शोध।
प्रेमचंद से जुड़े विषयों पर काम करने वाले और प्रसिद्ध साहित्यकार कमल किशोर गोयनका ने भी 1984 में रांची विवि के हिंदी विभाग के डा. वचनदेव कुमार के देखरेख में डी. लिट किया था। जिसका विषय था। प्रेमचंद का जीवन।
हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. हीरानंद प्रसाद ने बताया कि शोधार्थियों की पहली पसंद हैं मुंशी प्रेमचंद। इन्हीं से जुड़े साहित्य और इनकी लिखी किताबों पर विद्यार्थी सबसे अधिक शोध करना पसंद करते हैं।
नौंवी से यूजी और पीजी कोर्स में भी पढ़ाये जाते हैं मुंशी प्रेमचंद
केवल शोध तक ही नहीं बल्कि नौंवी से लेकर पीजी तक की पढ़ाई में मुंशी प्रेमचंद के कहानियों को शामिल किया गया है। निचली और उच्च कक्षाएं और इसके अलावा कई राज्यों के बोर्डों (जैसे यूपी बोर्ड, बिहार बोर्ड, झारखंड बोर्ड आदि) की छठी से आठवीं व 12वीं कक्षा की सहायक हिंदी पुस्तकों में भी उनकी कहानियां जैसे ईदगाह, पंच परमेश्वर, और बूढ़ी काकी शामिल रहती हैं।
कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर बीए और एमए की हिंदी साहित्य डिग्री कक्षाओं में उनके उपन्यास जैसे गोदान, गबन, और निर्मला विशेष अध्ययन के रूप में पढ़ाए जाते हैं। रांची विवि के पीजी के तीसरे सेमेस्टर में गोदान और गबन कहानियों और यूजी में भी सेमेस्टर थ्री में मुंशी प्रेमचंद की कहानियों को पढ़ाया जाता है।
मुंशी प्रेमचंद की कुछ प्रमुख कहानियां
उन्होंने अपने जीवनकाल में 300 से अधिक कहानियां लिखीं, जो समाज, गरीबों और किसानों के जीवन पर आधारित हैं। ईदगाह, बड़े भाई साहब, कफन, नमक का दारोगा, पंच परमेश्वर, दो बैलों की कथा, पूस की रात, मंत्र, गबन, गोदान, बूढ़ी काकी – बुजुर्गों के प्रति उपेक्षा और संवेदना की कहानी। बड़े घर की बेटी, ठाकुर का कुआं, सवा सेर गेहूं, आत्माराम सहित कई कहानियां शामिल हैं।
स्कूली पाठ्यक्रम से लेकर उच्च शिक्षा तक में अध्ययन
मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं का दायरा सिर्फ शोध तक सीमित नहीं है, यह स्कूली शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम की रीढ़ है।
- स्कूली स्तर: विभिन्न राज्यों के बोर्डों (जैसे झारखंड, बिहार, यूपी बोर्ड आदि) की छठी से आठवीं व 12वीं कक्षा की हिंदी पुस्तकों में 'ईदगाह', 'पंच परमेश्वर', और 'बूढ़ी काकी' जैसी प्रसिद्ध कहानियां पढ़ाई जाती हैं।
- ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन (BA & MA): कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर बीए और एमए की कक्षाओं में उनके उपन्यास विशेष अध्ययन के रूप में शामिल हैं।
- रांची विवि का पाठ्यक्रम: रांची विश्वविद्यालय के पीजी (PG) के तीसरे सेमेस्टर में 'गोदान' और 'गबन' उपन्यासों के साथ-साथ यूजी (UG) के सेमेस्टर 3 में भी उनकी विशेष कहानियों को पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है।
















