Bullet Train Project पर बढ़ेगा ब्याज का बोझ? जापान के Interest Rate फैसले के बाद उठे बड़े सवाल

नई दिल्‍ली  जापान का केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ जापान (BOJ)  अपनी मौद्रिक नीति बैठक में ब्‍याज दरों को लेकर महत्‍वपूर्ण ऐलान करेगा.  ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि जिस तरह से महंगाई में इजाफा हो रहा है, उससे  ब्‍याज दरों में बढोतरी हो सकती है. जून में बैंक ने ब्‍याज दर बढ़ाई थी. विश्‍लेषकों का…

Bullet Train Project पर बढ़ेगा ब्याज का बोझ? जापान के Interest Rate फैसले के बाद उठे बड़े सवाल

नई दिल्‍ली
 जापान का केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ जापान (BOJ)  अपनी मौद्रिक नीति बैठक में ब्‍याज दरों को लेकर महत्‍वपूर्ण ऐलान करेगा.  ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि जिस तरह से महंगाई में इजाफा हो रहा है, उससे  ब्‍याज दरों में बढोतरी हो सकती है. जून में बैंक ने ब्‍याज दर बढ़ाई थी. विश्‍लेषकों का कहना है कि मौद्रिक नीति के ऐलान में भी आगे ब्‍याज दर बढ़ाने के संकेत मिल सकते हैं. जापान ने भारत को अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए लोन दिया है. ऐसे में सवाल यह है कि अगर भविष्‍य में जापान अपने रेपो रेट बढ़ाता है तो क्‍या बुलेट ट्रेन के लिए मिले जापानी लोन की ब्‍याज दरों में भी इजाफा हो जाएगा। 

जापान ने भारत को अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट के लिए 88 हजार करोड़ रुपये कर्ज दिया है. यह लोन जैपनीज इंटरनैशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के जरिए मिला है. 0.1 फीसदी की मामूली ब्याज दर पर मिले इस लोन को 50 सालों में चुकाना है. बुलेट ट्रेन के लिए मिला यह लोन फिक्‍स्‍ड है. यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुलेट ट्रेन के लिए जो पैसा लाए हैं, उस पर जापान के ब्‍याज दर बढ़ाने का कोई असर नहीं होगा. बुलेट ट्रेन के लिए मिले लोन में 15 साल का ग्रेस पीरियड शामिल है. इसका मतलब है कि लोन मिलने के शुरुआती 15 वर्षों तक भारत को कोई मूलधन (Principal Amount) नहीं लौटाना है. ग्रेस पीरियड खत्म होने के बाद यानी 16वें साल से भारत सरकार इस लोन की किश्तों का भुगतान शुरू करेगी। 

कमजोर मुद्रा और युद्ध से दबाव में है जापानी अर्थ्‍व्‍यवस्‍था
पश्चिम एशिया में जारी जंग और अपनी मुद्रा येन के कमजोर होने से जापान की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि बोओजे के गवर्नर काजुओ उएदा के सामने दोहरी चुनौती है. एक ओर उन्हें सख्त रुख (Hawkish Communication) अपनाकर येन में गिरावट पर दांव लगाने वाले निवेशकों को संदेश देना है, वहीं दूसरी ओर उन्हें सरकार को नाराज भी नहीं करना है. जापान की वर्तमान सरकार मौद्रिक नीति को और सख्त करने के पक्ष में नहीं है। 

केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरें कितनी तेजी से और कब बढ़ाई जाएंगी, इस पर स्पष्ट संकेत देने से बच सकता है. बैंक को फिलहाल यह देखना चाहता है कि ईंधन की कीमतों में उछाल के कारण उत्पादक मूल्य (Producer Prices) में हुई बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था और महंगाई पर कितना पड़ता है. इसका स्‍पष्‍ट पता चलने के बाद ही बैंक ऑफ जापान अपने पत्‍ते खोलेगा। 

 

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