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पेपर लीक मामले में बायोमेट्रिक सुपरवाइजर समेत तीन आरोपी गिरफ्तार हुए

पटना बिहार में सरकारी भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले ने शिक्षा और भर्ती व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों में पटना का 25 वर्षीय राज समदर्शी उर्फ राजा, वैशाली का 21 वर्षीय अभिषेक कुमार और वैशाली…

पेपर लीक मामले में बायोमेट्रिक सुपरवाइजर समेत तीन आरोपी गिरफ्तार हुए

पटना
बिहार में सरकारी भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले ने शिक्षा और भर्ती व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों में पटना का 25 वर्षीय राज समदर्शी उर्फ राजा, वैशाली का 21 वर्षीय अभिषेक कुमार और वैशाली का ही 28 वर्षीय बायोमेट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार शामिल है.

मामला बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) की हवलदार इंस्ट्रक्टर परीक्षा से जुड़ा है. अधिकारियों के मुताबिक, यह परीक्षा 5 अगस्त को प्रस्तावित थी, लेकिन कथित पेपर लीक की जांच सामने आने के बाद इसे अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है. इस फैसले से परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में भी हलचल मच गई है.

आर्थिक अपराध इकाई की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि राज समदर्शी बुधवार को हाजीपुर केंद्र पर आयोजित होमगार्ड सर्विस इंस्ट्रक्टर परीक्षा में शामिल होने वाला है. इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे हिरासत में लिया. पूछताछ के दौरान राज ने कथित तौर पर अभिषेक कुमार की भूमिका के बारे में जानकारी दी.

पूछताछ में खुला कनेक्शन, बायोमेट्रिक सुपरवाइजर पर भी आरोप
जांच में पुलिस के सामने एक और अहम कड़ी सामने आई. EOU के मुताबिक, आरोप है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र के उत्तर बायोमेट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार के जरिए राज समदर्शी तक पहुंचाए गए थे. नितेश वैशाली का रहने वाला है और परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़ी जिम्मेदारी निभाता था. उसकी गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.

पुलिस पूछताछ में राज समदर्शी ने कथित तौर पर यह भी दावा किया कि इसी तरह का तरीका इस साल अप्रैल में आयोजित असिस्टेंट इलेक्शन डेवलपमेंट ऑफिसर (AEDO) परीक्षा के दौरान भी अपनाया गया था. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या दोनों परीक्षाओं में एक ही नेटवर्क सक्रिय था या इनके पीछे अलग-अलग लोग थे.

EOU ने मामले में आर्थिक अपराध थाने में गुरुवार को केस दर्ज किया. आरोपियों के खिलाफ बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम की धारा 10 और 11(1) के तहत कार्रवाई की गई है. FIR में चार अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं. ऐसे में जांच का दायरा अब तीन गिरफ्तार आरोपियों से आगे बढ़ गया है.

मोबाइल फोन ने खोले राज, एडमिट कार्ड और आंसर शीट बरामद
जांचकर्ताओं ने राज समदर्शी और अभिषेक कुमार के मोबाइल फोन जब्त किए थे. इन मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को परीक्षा से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले. इनमें एडमिट कार्ड और आंसर शीट भी शामिल हैं. बरामद सामग्री ने जांच एजेंसी को कथित पेपर लीक के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण सुराग दिए हैं.

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा से जुड़े दस्तावेज आरोपियों तक कैसे पहुंचे, प्रश्नपत्र के उत्तर किस स्तर पर उपलब्ध कराए गए और इस पूरी कथित व्यवस्था में कितने लोग शामिल थे. खास तौर पर बायोमेट्रिक सुपरवाइजर की भूमिका की जांच अहम मानी जा रही है, क्योंकि पुलिस का आरोप है कि उसके जरिए उत्तर राज समदर्शी तक भेजे गए.

मामले में चार अन्य लोगों का नाम FIR में दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों की नजर अब उन लोगों पर भी है. साथ ही अप्रैल में हुई AEDO परीक्षा को लेकर राज के दावे की भी जांच की जा रही है. अगर दोनों मामलों के बीच कोई कनेक्शन सामने आता है, तो बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क की बड़ी तस्वीर सामने आ सकती है.

5 अगस्त की परीक्षा टली, अभ्यर्थियों पर भी असर
पेपर लीक के आरोपों के बीच BPSSC की हवलदार इंस्ट्रक्टर परीक्षा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है. यह परीक्षा 5 अगस्त को होनी थी. परीक्षा टाले जाने के बाद अब अभ्यर्थियों को नई तारीख का इंतजार करना होगा. आयोग की ओर से आगे की तारीख और परीक्षा कार्यक्रम को लेकर अलग से सूचना जारी की जाएगी.

फिलहाल, EOU गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और जब्त मोबाइल फोन तथा परीक्षा संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा रही है. जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर प्रश्नपत्र के उत्तर कितने अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए थे और इसके बदले किसी तरह का लेन-देन हुआ था या नहीं.

बिहार में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले भी पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं. ऐसे में इस मामले में बायोमेट्रिक सिस्टम से जुड़े व्यक्ति की कथित भूमिका सामने आने से परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं. अब जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होगा कि इस कथित पेपर लीक के पीछे कितने लोग थे और इसका नेटवर्क कितना बड़ा था.

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