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Punjab News: सतलुज पुल पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक, 10 दिनों में मरम्मत की उठी मांग

माछीवाड़ा साहिब/चंडीगढ़. मालवा और दोआबा को जोड़ने वाले सतलुज दरिया पर बने शहीद भगत सिंह यादगारी पुल की स्लैब धंस गई है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने इस पुल पर बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। इसके बाद लोगों में पुल की जल्द मरम्मत करवाने की मांग तेज हो गई है और…

Punjab News: सतलुज पुल पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक, 10 दिनों में मरम्मत की उठी मांग

माछीवाड़ा साहिब/चंडीगढ़.

मालवा और दोआबा को जोड़ने वाले सतलुज दरिया पर बने शहीद भगत सिंह यादगारी पुल की स्लैब धंस गई है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने इस पुल पर बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। इसके बाद लोगों में पुल की जल्द मरम्मत करवाने की मांग तेज हो गई है और प्रशासन के खिलाफ रोष भी बढ़ता जा रहा है।

भारतीय किसान यूनियनों, ट्रक ऑपरेटरों, खन्ना-नवांशहर मार्ग पर स्थित ढाबा संचालकों और दुकानदारों की एक बैठक हुई, जिसमें प्रशासन से पुल की तुरंत मरम्मत करवाने की मांग की गई। साथ ही सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई कि यदि इस दौरान कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। भारतीय किसान मजदूर यूनियन के प्रधान दिलबाग सिंह ने बताया कि सतलुज नदी पर बना यह पुल वर्ष 2006 में शुरू हुआ था और पिछले करीब 20 वर्षों में इसकी स्लैब कम से कम 7 बार धंस चुकी है, जिसकी पहले कई बार मरम्मत भी की गई। उन्होंने कहा कि इस बार पुल की स्लैब धंसे हुए करीब डेढ़ साल से अधिक (लगभग पौने दो साल) हो चुके हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसकी मरम्मत करने की बजाय केवल बड़े गार्डर लगाकर कारों की आवाजाही चालू रखी है, जबकि भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारी गार्डर लगाए जाने से सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को हो रही है जिनकी जमीन नदी के दोनों ओर है। उनके ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, कृषि उपकरण और गन्ने से भरे वाहन पुल से नहीं गुजर पा रहे, जिससे खेती का काम प्रभावित हो रहा है।

हजारों वाहन लंबा रास्ता तय करने को मजबूर 
वहीं ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि उनके हजारों वाहन अब रोपड़ और लुधियाना होते हुए लंबा रास्ता तय करने को मजबूर हैं, जिससे रोजाना लाखों रुपये का अतिरिक्त डीजल खर्च हो रहा है और उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर खन्ना-नवांशहर मार्ग के दुकानदारों और ढाबा संचालकों ने कहा कि पुल बंद होने के बाद इस सड़क पर यातायात काफी कम हो गया है, जिससे उनके कारोबार पर भी बुरा असर पड़ा है। उन्होंने सरकार से जल्द पुल की मरम्मत कर लोगों को राहत देने की मांग की। पुल के दोनों ओर खड़े यात्रियों ने भी प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बसें पुल पार नहीं कर पा रही हैं, जिसके कारण उन्हें बारिश और तेज धूप में पैदल पुल पार करना पड़ रहा है और भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में फैसला लिया गया कि नवांशहर के डिप्टी कमिश्नर से मिलकर पुल की तत्काल मरम्मत की मांग की जाएगी। यदि प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो किसान यूनियनें, ट्रक ऑपरेटर, दुकानदार और स्थानीय लोग मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

50 फीट लंबी धंसी स्लैब की मरम्मत का इंतजार, पौने दो साल बीते
सतलुज नदी पर बने शहीद भगत सिंह यादगारी पुल की स्लैब की अब तक 6 से 7 बार मरम्मत की जा चुकी है। पहले प्रशासन कुछ महीनों के भीतर इसकी मरम्मत करवा देता था, लेकिन इस बार केवल करीब 50 फीट लंबी स्लैब का हिस्सा धंसा हुआ है, जिसकी मरम्मत के लिए भी लगभग पौने दो साल बीत चुके हैं। शुरुआत में प्रशासन ने धंसे हिस्से के आसपास बैरिकेड लगाकर बाकी पुल से यातायात जारी रखा था, लेकिन अब बड़े वाहनों को रोकने के लिए स्थायी गार्डर लगा दिए गए हैं। इसके बाद लोगों की परेशानियां और प्रशासन के प्रति नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।

ट्रक ऑपरेटरों ने यहां तक कहा कि यदि लोक निर्माण विभाग के पास फंड की कमी है तो वे पुल से गुजरने के लिए टोल या टैक्स देने को भी तैयार हैं, लेकिन पुल की जल्द मरम्मत कराई जाए। उनका कहना है कि प्रत्येक ट्रक पर रोजाना 3,000 से 3,500 रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा है, जिससे हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। इसलिए सरकार को लोगों की परेशानी को देखते हुए जल्द से जल्द पुल की मरम्मत करवानी चाहिए।

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