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एम्स-आईजीआईएमएस की रिपोर्ट: हर महीने सैकड़ों बच्चे हड्डी और मांसपेशियों के दर्द से परेशान

पटना स्कूल बस्ते का बढ़ता वजन और मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों की हड्डियों और मांसपेशियों पर असर डाल रहा है। एम्स पटना और आईजीआईएमएस के चिकित्सकों की रिपोर्ट के अनुसार, इससे बच्चों में गर्दन, पीठ, कंधे और कमर दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अस्थि एवं जोड़ सप्ताह के अवसर पर जारी…

एम्स-आईजीआईएमएस की रिपोर्ट: हर महीने सैकड़ों बच्चे हड्डी और मांसपेशियों के दर्द से परेशान

पटना
स्कूल बस्ते का बढ़ता वजन और मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों की हड्डियों और मांसपेशियों पर असर डाल रहा है। एम्स पटना और आईजीआईएमएस के चिकित्सकों की रिपोर्ट के अनुसार, इससे बच्चों में गर्दन, पीठ, कंधे और कमर दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अस्थि एवं जोड़ सप्ताह के अवसर पर जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में कमी भी इस समस्या को बढ़ाने वाली बड़ी वजह बन रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एम्स पटना के हड्डी रोग विभाग के ओपीडी में हर महीने करीब 300 बच्चे गर्दन, पीठ, कंधे और कमर दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं, आईजीआईएमएस के हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में भी हर महीने लगभग 350 बच्चे गर्दन और कंधे के दर्द से परेशान होकर इलाज कराने आते हैं। इन बच्चों की उम्र आठ से 13 वर्ष के बीच है। बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमूल्य कुमार सिंह ने बताया कि बच्चे के वजन का अधिकतम 10 प्रतिशत ही उसके बैग का वजन होना चाहिए, लेकिन अधिकांश बच्चे इससे अधिक वजन का बस्ता ढो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर पांच में से दो बच्चे भारी बैग के कारण रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी का सामना कर रहे हैं। एलएनजेपी हड्डी अस्पताल के निदेशक डॉ. राकेश चौधरी ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में यह समस्या बढ़ी है।

130 बच्चों पर सर्वे
आईजीआईएमएस के हड्डी रोग विभाग ने तीन अगस्त को केबी बेली रोड में 10 से 13 वर्ष आयु वर्ग के 130 बच्चों पर सर्वे किया। इसमें 90 बच्चों ने गर्दन और कमर दर्द की शिकायत बताई। चिकित्सकों के अनुसार, इनमें से अधिकांश बच्चे प्रतिदिन छह से सात घंटे मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही वे पार्क में कम जाते हैं, धूप में कम निकलते हैं और उनकी दिनचर्या से खेलकूद लगभग गायब हो गया है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें
● ओपीडी में हर महीने करीब 300 बच्चे गर्दन और पीठ दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे

● अस्थि एवं जोड़ सप्ताह के अवसर पर जारी की गई रिपोर्ट

● भारी बस्ता उठाने से बच्चे आगे की ओर झुककर चलने लगते हैं।

● गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ता है।

● बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से जल्दी थक जाते हैं।

● कई बच्चे घंटों मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं।

● मोबाइल चलाते समय अधिकांश बच्चे झुककर बैठते हैं।

चिकित्सकों की सलाह
● बच्चे केवल उसी दिन की आवश्यक किताबें और कॉपियां लेकर स्कूल जाएं।

● स्कूलों में किताबें और नोटबुक रखने की व्यवस्था हो।

● नियमित स्ट्रेचिंग और हल्की कसरत कराई जाए।

● बैग की पट्टियां चौड़ी और गद्देदार हों।

● बैग में कमर पर बांधने वाली पट्टी हो, ताकि रीढ़ पर दबाव कम पड़े।

● बच्चों को दोनों कंधों पर बैग टांगने की आदत डालें।

● मोबाइल पर गेम और रील देखने की आदत नियंत्रित की जाए।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
झुककर लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने से गर्दन दर्द बढ़ रहा है। कई बच्चे बैग एक ही कंधे पर टांगते हैं, जिससे कंधों और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। -डॉ. सुदीप कुमार प्रोफेसर, हड्डी रोग विभाग, एम्स, पटना

2. मोबाइल का अधिक इस्तेमाल, खेल गतिविधियों की कमी, धूप में कम निकलना और भारी बस्ता बच्चों में गर्दन, कमर और पीठ दर्द के प्रमुख कारण बन रहे हैं। हर दिन आठ से 10 बच्चे हड्डी और मांसपेशियों के दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। -डॉ. रितेश रुनु, प्रोफेसर, हड्डी रोग विभाग, आईजीआईएमएस

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