,

पारंपरिक संगीत, नृत्य और लोककलाओं के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मिला बढ़ावा

भोपाल  भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता-2026 के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय, केंद्र सरकार द्वारा गुरुवार को रवींद्र भवन, भोपाल में ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव-2026 आयोजित किया गया। ब्रिक्स सांस्कृतिक कार्य समूह की तीसरी बैठक के दूसरे दिन आयोजित इस महोत्सव में ब्रिक्स सदस्य एवं शामिल देशों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से विभिन्न देशों की समृद्ध…

पारंपरिक संगीत, नृत्य और लोककलाओं के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मिला बढ़ावा

भोपाल 

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता-2026 के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय, केंद्र सरकार द्वारा गुरुवार को रवींद्र भवन, भोपाल में ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव-2026 आयोजित किया गया। ब्रिक्स सांस्कृतिक कार्य समूह की तीसरी बैठक के दूसरे दिन आयोजित इस महोत्सव में ब्रिक्स सदस्य एवं शामिल देशों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से विभिन्न देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी सहयोग की भावना को सशक्त बनाया।

महोत्सव का आयोजन “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना पर आधारित था, जो सार्वभौमिक शांति, सद्भाव और सामूहिक कल्याण के भारत के सभ्यतागत दर्शन को अभिव्यक्त करता है। यह आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता-2026 की थीम “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण” के अनुरूप विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-जन के आपसी संबंधों को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिभागी देशों की सांस्कृतिक परेड के साथ हुआ। इसमें बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूसी संघ, संयुक्त अरब अमीरात और मेजबान भारत के सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडलों ने शामिल होकर वैश्विक एकता और सांस्कृतिक सौहार्द का परिचय दिया।

बेलारूस के गेनाडी त्सितोविच नेशनल एकेडमिक लोक कॉयर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ बेलारूस के कलाकारों ने पारंपरिक बेलारूसी लोकगीतों और हास्य लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी।

ब्राजील की ओर से एफ्रो-ब्राजीलियाई सांस्कृतिक परंपरा ‘कैपोएरा’ का प्रदर्शन किया गया। इस प्रस्तुति में मार्शल आर्ट, नृत्य, संगीत और एक्रोबैटिक कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिला।इंडोनेशिया के कलाकारों ने पारंपरिक बालीनीज स्वागत नृत्य ‘पुष्पांजलि’ प्रस्तुत किया। इसके साथ ही प्रंबनन मंदिर से प्रेरित प्रसिद्ध जावानीस नृत्य-नाटिका “द लीजेंड ऑफ रोरो जोंगरांग” का मंचन किया।

रूसी संघ के नेशनल एकेडमिक लोक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्केस्ट्रा ऑफ रूस के एकल कलाकारों ने बालालाइका, बायान, ऑल्टो डोमरा और कॉन्ट्राबास बालालाइका जैसे पारंपरिक रूसी वाद्ययंत्रों पर संगीतमय प्रस्तुति दी।संयुक्त अरब अमीरात के प्रसिद्ध संगीतकार सैफ अल-अली ने समकालीन प्रभावों के साथ अमीराती और अरब संगीत परंपराओं की प्रस्तुति दी।भारत की ओर से “मारू रंग – राजस्थान की विरासत” कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इसमें घूमर, चरी, कालबेलिया और भवाई जैसे लोकनृत्यों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम का समापन ग्रैंड फिनाले के साथ हुआ, जिसमें सभी देशों के कलाकार एक मंच पर आए और सांस्कृतिक एकता, आपसी सम्मान और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया। इस अवसर पर कला और संस्कृति के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ बनाने और विभिन्न देशों के लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को और मजबूत करने की ब्रिक्स देशों की प्रतिबद्धता भी रेखांकित हुई।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports