Tarun Tejpal Case: यौन उत्पीड़न केस में 10 साल की कैद, 5 लाख रुपये जुर्माना भी भरना होगा

 मुंबई तरुण तेजपाल केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोषी पाए गए पूर्व तहलका एडिटर-इन-चीफ की सजा का ऐलान कर दिया है. सजा तय करने से पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. बेंच ने कहा कि तेजपाल के खिलाफ बाद में किसी और दुर्व्यवहार की रिपोर्ट सामने नहीं आई और दोनों पक्ष अपनी…

Tarun Tejpal Case: यौन उत्पीड़न केस में 10 साल की कैद, 5 लाख रुपये जुर्माना भी भरना होगा

 मुंबई

तरुण तेजपाल केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोषी पाए गए पूर्व तहलका एडिटर-इन-चीफ की सजा का ऐलान कर दिया है. सजा तय करने से पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. बेंच ने कहा कि तेजपाल के खिलाफ बाद में किसी और दुर्व्यवहार की रिपोर्ट सामने नहीं आई और दोनों पक्ष अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं. इसके बाद कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं के तहत तेजपाल को सजा सुनाई। 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को दोषी पाया था. कोर्ट ने गोवा की ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को बरी कर दिया गया था. इसके बाद सजा की अवधि को लेकर सुनवाई हुई और अब अदालत ने दो धाराओं के तहत 10-10 साल की कठोर कैद, जबकि एक अन्य धारा के तहत 3 साल की सजा सुनाई है। 

तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट ने पाया दोषी
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोवा की ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को बरी कर दिया गया था. यह मामला 13 साल से अदालत में चल रहा था और अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद सजा का ऐलान किया गया है। 

जब SG ने बोला अमिताभ बच्चन का डायलॉग
पिंक फिल्म में अमिताभ बच्चन ने वकील का किरदार निभाया था और उसमें तीन महिलाओं के लिए केस लड़ते हुए नजर आए थे. फिल्म में उनका एक डायलॉग भी बहुत फेमस हुआ था, जिसमें रिश्ते में महिला की मर्जी की जरूरत पर जोर देते हुए वह कहते हैं- नो मींस नो. बॉम्बे हाईकोर्ट में आज की सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने भी यही बात दोहराई।

SG मेहता की दमदार दलील
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सजा में नरमी बरते जाने की तरुण तेजपाल की अपील का सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया और कहा, 'यह जानते हुए कि पीड़िता उनकी बेटी की उम्र की है, उन्होंने यह अपराध किया… वह उसके लिए पिता समान हैं, उन्हें ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी… पीड़िता के विरोध के बावजूद दो दिन तक लगातार इन्होंने ये किया… इस अदालत को समाज में एक साफ संदेश देना चाहिए कि जब एक लड़की न बोलती है तो उसका मतलब न होता है. A No Means No.'

तरुण तेजपाल ने की सजा में नरमी बरती जाने की अपील
तरुण तेजपाल ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट से अपील की कि मेरी उम्र को देखते हुए सजा में नरमी बरती जाए. तरुण तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने कोर्ट से अपील की है कि उनके मुवक्किल के साथ नरमी बरती जाए और सजा सुनाते वक्त इस बात का ख्याल रखें कि यह 13 साल पुराना मामला है. एडवोकेट पोंडा ने यह भी अपील की है कि 8 हफ्तों के बाद सजा का आदेश सुनाया जाए, ताकि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें. उन्होंने कहा कि तरुण तेजपाल के खिलाफ कोई और एफआईआर या केस दर्ज नहीं है। 

तरुण तेजपाल ने कहा, 'मेरी उम्र अब 62 साल हो गई है और मुझे लगता है कि मैं पीड़ित हूं. मेरी पत्नी है और इसके अलावा मेरे पास कहने के लिए कुछ खास नहीं है. मैं बस यही कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं. कृप्या मेरे लिए नरमी रखें. बाकी तथ्य रिकॉर्ड में दर्ज हैं। 

सेशन कोर्ट ने 2021 में कर दिया था बरी
साल 2021 में गोवा की मपुसा कोर्ट की स्पेशल जज क्षमा जोशी ने तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न मामले के सभी आरोपों से बरी कर दिया था. कोर्ट ने माना था कि इन आरोपों को साबित करने के लिए पीड़िता की तरफ से जो सबूत पेश किए गए वह तरुण तेजपाल के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं करते हैं. निचली अदालत ने कहा, 'रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर विचार करने के बाद हमें लगता है कि आरोपी को संदेह का लाभ दिया जा सकता है क्योंकि जो आरोप लगाए गए उनकी पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं और शिकायतकर्ता के बयानों में भी फेरबदल है। 

सेशन कोर्ट के इस फैसले का राज्य सरकार और स्टेट सीआईडी ने विरोध किया और हाईकोर्ट में अपील की. अपील में कहा गया कि सेशन कोर्ट ने सबूतों की जांच के बजाय घटना के बाद पीड़िता के व्यवहार, रिएक्शन और उनके बैकग्राउंड का आकलन किया. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने तरुण तेजपाल के खिलाफ ठीक से ट्रायल करने के बजाय पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया. राज्य सरकार ने सेशन कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए कि कोर्ट ने उन माफी के मैसेज की जांच क्यों नहीं की, जो कंपनी में पीड़िता की शिकायत के बाद तरुण तेजपाल ने उन्हें भेजे थे। 

महिला कर्मी ने तेजपाल पर लगाए थे आरोप
यह मामला 2013 में सामने आया था. तहलका के तत्कालीन एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल पर उनकी एक महिला सहकर्मी ने गोवा के एक होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. तेजपाल ने आरोपों से इनकार किया था. मामले में लंबी सुनवाई के बाद 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। 

ट्रायल कोर्ट के आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
गोवा सरकार ने इसके बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट ने मामले के सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों पर दोबारा विचार किया और अब निचली अदालत का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया है. तेजपाल की तरफ से पहले ही कहा जा चुके हैं कि हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. उन्होंने इस मामले में एक याचिका भी दाखिल की है। 

 

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