कौन बनाता है हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस? CJI के हाथ में पूरी ताकत या राज्य सरकार की भी होती है भूमिका?

नई दिल्ली  देश के सात हाईकोर्ट इस समय नियमित चीफ जस्टिस के बिना चल रहे हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कोलेजियम ने चार हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस नियुक्त करने के लिए चार नामों की सिफारिश की है. इनमें बॉम्बे, कलकत्ता, पटना और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट शामिल हैं. कोलेजियम…

कौन बनाता है हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस? CJI के हाथ में पूरी ताकत या राज्य सरकार की भी होती है भूमिका?

नई दिल्ली

 देश के सात हाईकोर्ट इस समय नियमित चीफ जस्टिस के बिना चल रहे हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कोलेजियम ने चार हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस नियुक्त करने के लिए चार नामों की सिफारिश की है. इनमें बॉम्बे, कलकत्ता, पटना और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट शामिल हैं. कोलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है. बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस जस्टिस रवींद्र वी. घुगे को कलकत्ता हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने का प्रस्ताव है. दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को नियमित चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। 

यहां बड़ा सवाल यह है कि आखिर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति होती कैसे है? क्या इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका होती है? क्या मुख्यमंत्री या राज्यपाल किसी नाम को रोक सकते हैं? और क्या पूरी प्रक्रिया सीधे सीजेआई के हाथ में होती है?पहले समझिए, हाईकोर्ट के CJ की नियुक्ति कौन करता है। 

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत होती है. नियुक्ति का अंतिम अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है. यानी तकनीकी तौर पर चीफ जस्टिस की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं. लेकिन, राष्ट्रपति किसी नाम का अपने स्तर पर चयन नहीं करते. नामो के चयन का काम कोलेजियम व्यवस्था करती है. यही वजह है कि व्यवहार में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम सबसे अहम भूमिका निभाता है. यहां एक बात समझना जरूरी है. सीजेआई अकेले किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का नाम तय नहीं करते. नाम पर फैसला सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम करता है. मौजूदा वक्त में कोलेजियम में चीज जस्टिस और उनके बाद कुछ सीनियर जज शामिल होते हैं। 
चीफ जस्टिस का नाम कहां से आता है?

हाईकोर्ट के सामान्य जज की नियुक्ति और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया में बड़ा अंतर है. हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव संबंधित हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपने दो वरिष्ठतम जजों से सलाह लेकर तैयार करते हैं. इसके बाद यह प्रस्ताव राज्य सरकार और राज्यपाल की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के पास पहुंचता है. फिर सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम केंद्र सरकार के जरिए राष्ट्रपति तक नाम भेजता है. फिर राष्ट्रपति हाईकोर्ट में जजों को नियुक्त करते हैं। 

लेकिन किसी हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने के मामले में संबंधित हाईकोर्ट का कोलेजियम किसी व्यक्ति को चीफ जस्टिस बनाने का अंतिम फैसला नहीं करता. इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम करता है. यही कारण है कि देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस बनाने के लिए अक्सर दूसरे हाईकोर्ट के वरिष्ठ जजों के नाम सामने आते हैं। 
अपने हाईकोर्ट का जज वहीं का चीफ जस्टिस नहीं बनता?

इसके पीछे न्यायपालिका में लंबे समय से चली आ रही एक परंपरा है. आमतौर पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर उसी हाईकोर्ट के बजाय दूसरे हाईकोर्ट के जज को नियुक्त करने की कोशिश की जाती है. इसका उद्देश्य जूडिशियरी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को मजबूत करना है. माना जाता है कि किसी जज को उसके मूल हाईकोर्ट से बाहर चीफ जस्टिस बनाना स्थानीय प्रभाव और संभावित हितों के टकराव को कम करता है. मौजूदा सिफारिशों में भी इसका उदाहरण दिखाई देता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी के नाम की बॉम्बे हाईकोर्ट के लिए सिफारिश हुई है. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। 

कोलकाता हाईकोर्ट के लिए भी जीफ जस्टिस की नियुक्ति हुई है.
राज्य सरकार की भूमिका क्या होती है?

इन नियुक्तियों में राज्य सरकार की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं होती. लेकिन राज्य सरकार के पास किसी नाम को अपनी पसंद से तय करने की शक्ति भी नहीं होती. हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल की भूमिका होती है. प्रस्ताव पर राज्य के संवैधानिक अधिकारियों के विचार लिए जाते हैं. इसके बाद मामला केंद्र सरकार के जरिए आगे बढ़ता है. केंद्रीय कानून मंत्रालय भी प्रस्ताव की जांच करता है. उपलब्ध रिपोर्ट और अन्य इनपुट पर विचार किया जाता है. इसके बाद पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के पास भेजा जाता है और सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम उस पर विचार करता है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि राज्य सरकार की कोई भूमिका ही नहीं है. लेकिन, यह भी कहना गलत होगा कि मुख्यमंत्री या राज्य सरकार किसी व्यक्ति को अपनी पसंद से हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बना सकती है। 
क्या राज्य सरकार किसी नाम को रोक सकती है?

राज्य सरकार या राज्य के संवैधानिक अधिकारी प्रक्रिया में अपनी राय दे सकते हैं. किसी प्रस्ताव पर आपत्ति या इनपुट भी सामने आ सकता है. लेकिन अंतिम नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया न्यायपालिका और केंद्र के स्तर से होकर गुजरती है. सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की सिफारिश इस पूरी व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण है. सरकार के पास सिफारिश पर विचार करने और सुझाव देने की भूमिका है. नियुक्ति का अंतिम आदेश राष्ट्रपति जारी करते हैं। 

तो क्या सीजेआई के हाथ में पूरी ताकत होती है?
इसका सीधा जवाब है- नहीं. सीजेआई बेहद महत्वपूर्ण भूमिका में होते हैं. लेकिन वह अकेले फैसला नहीं करते. सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम सामूहिक रूप से नाम पर विचार करता है. मौजूदा व्यवस्था में हाईकोर्ट से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. इसके बाद सिफारिश केंद्र सरकार के पास जाती है. सरकार प्रक्रिया पूरी करती है. अंत में राष्ट्रपति नियुक्ति का आदेश जारी करते हैं. इस तरह कोलेजियम नाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है, केंद्र सरकार प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है और राष्ट्रपति नियुक्ति की संवैधानिक कार्रवाई पूरी करते हैं। 

हाईकोर्ट के दूसरे जजों की नियुक्ति कैसे होती है?
हाईकोर्ट के सामान्य जजों की नियुक्ति में प्रक्रिया कुछ अलग है. सबसे पहले संबंधित हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस अपने दो वरिष्ठतम जजों के साथ मिलकर नामों पर विचार करता है. इसके बाद प्रस्ताव राज्य और केंद्र के स्तर से गुजरता है. केंद्र सरकार प्रस्ताव की जांच करती है. फिर उसे सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम के सामने रखा जाता है. सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम नाम को स्वीकार कर सकता है, वापस भेज सकता है या किसी अन्य नाम पर विचार कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की सिफारिश के बाद मामला केंद्र सरकार के पास जाता है और राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं। 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports