दो हार के बाद दतिया में BJP बदलेगी रणनीति, नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर मंथन; आशुतोष तिवारी का नाम आगे

भोपाल  उप चुनाव में मिली हार के बाद प्रदेश भाजपा अब नया प्लान लेकर दतिया में उतरने की तैयारी कर रही है। प्लान में बहुत कुछ तय कर लिया है, जिसकी घोषणा होनी बाकी है। नए प्लान के साथ ही दो प्रमुख नेताओं की नई भूमिकाएं भी सामने आ सकती हैं। दतिया उपचुनाव में प्रत्याशी…

दो हार के बाद दतिया में BJP बदलेगी रणनीति, नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर मंथन; आशुतोष तिवारी का नाम आगे

भोपाल
 उप चुनाव में मिली हार के बाद प्रदेश भाजपा अब नया प्लान लेकर दतिया में उतरने की तैयारी कर रही है। प्लान में बहुत कुछ तय कर लिया है, जिसकी घोषणा होनी बाकी है। नए प्लान के साथ ही दो प्रमुख नेताओं की नई भूमिकाएं भी सामने आ सकती हैं। दतिया उपचुनाव में प्रत्याशी रहे आशुतोष तिवारी को जहां बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है वहीं नरोत्तम मिश्रा की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। दतिया में उनके योगदान और प्रभुत्व को पार्टी नकार नहीं पा रही।

दतिया में हार की जिम्मेदारी तय होनी बाकी, तब तक भाजपा जारी नहीं करेगी नया प्लान

बीजेपी के नए प्लान का सबसे बड़ा हिस्सा दतिया जिले की नई कार्यकारिणी है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि कार्यकारिणी को एक ही बार में जारी किया जाए या फिर इसकी टुकड़ों में घोषणा की जाए। चूंकि दतिया में हार की जिम्मेदारी तय होनी बाकी है, तब तक भाजपा नया प्लान जारी नहीं करेगी।

कांग्रेस 2028 में तीसरी जीत के लिए अभी से कर रही तैयारी
उधर उप चुनाव जीत चुकी कांग्रेस 2028 के चुनाव में भी जीत को बरकरार रखने की तैयारी में है। कांग्रेस यह सीट किसी हाल में खोना नहीं चाहेगी। चूंकि घनश्याम सिंह मजबूत प्रत्याशी थे, जो विधायक बन चुके हैं। वे दतिया में अपनी स्वीकारोक्ति बढ़ाएंगे। वहीं भाजपा को इन दो साल में जमीनी स्तर पर जन विश्वास जीतना होगा।

भाजपा की हार का अंतर बढ़कर 5604
भाजपा ने 6 मंडलों के 46 शक्ति केंद्रों पर पूरा जोर लगाया। लेकिन चुनाव परिणाम के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि, 2023 में भाजपा पूरे नगर पालिका क्षेत्र में 2691 वोटों से पीछे रही थी।

लेकिन 2026 के उपचुनाव के आंकड़े बताते हैं कि नगर मंडल में भाजपा की हार का अंतर बढ़कर 5604 हो गया है। भाजपा के लिए शहर के अंतर में 2913 वोटों का और नुकसान हुआ, जो उपचुनाव में हार का सबसे बड़ा कारण बना।

नए जिलाध्यक्ष के लिए आशुतोष और घनश्याम के नाम
दतिया में नए जिलाध्यक्ष की दौड़ में पूर्व विधायक घनश्याम पिरोनिया और हाल ही में चुनाव हारे आशुतोष तिवारी के नाम चर्चा में हैं। घनश्याम पिरोनिया दलित वर्ग से आते हैं। आजाद समाज पार्टी के दलित वोटरों को साधने के लिए भाजपा उन्हें जिलाध्यक्ष बना सकती है।

वहीं, यदि पार्टी नरोत्तम के खिलाफ कड़ा संदेश देना चाहती है तो आशुतोष तिवारी को जिलाध्यक्ष बनाकर उन्हें मजबूत नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर सकती है।

तय की जाएगी जिम्मेदारी
चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट बीजेपी हाईकमान को सौंपी जाएगी. रिपोर्ट के आधार पर सभी की जिम्मेदारी तय की जाएगी. जिम्मेदारी तय करने के फैसले से कयास लगाए जा रहे हैं कि जिम्मेदार नेताओं पर पार्टी एक्शन भी ले सकती है। 

नरोत्तम मिश्रा का बार-बार हो रहा जिक्र
दरअसल, दतिया में हार के कारणों की जब भी चर्चा होती है, बार बार पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सामने आता है. दतिया में नरोत्तम मिश्रा काफी मजबूत नेता माने जाते हैं. वर्षों से उनका इस सीट पर दबदबा रहा है. इस बीच जब उन्हें टिकट न देकर पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ रहे आशुतोष मिश्रा को मैदान में उतारा तो नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में खासा नाराजगी दिखी. नरोत्तम खुद पार्टी के इस फैसले से भावुक हो गए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि उनके समर्थकों की नाराजगी भी बीजेपी की हार का कारण हो सकती है। 

नया चेहरा लाने पर बीजेपी को हुआ नुकसान?
दतिया सीट पर उपचुनाव में 6 बार के विधायक नरोत्तम मिश्रा की जगह नए चेहरे को उम्मीदवार बनाने का BJP का फैसला सफल नहीं रहा. कांग्रेस ने यह सीट बरकरार रखी. कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने सोमवार को BJP के आशुतोष तिवारी को 6016 मतों से हराया.  राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, BJP की हार केवल एक विधानसभा सीट का नुकसान नहीं है बल्कि यह मध्य प्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए भी बड़ा झटका है। 

दतिया में बीजेपी की ये 3 अहम चुनौतियां

अभी तय करना होगा, दतिया का चेहरा:

भाजपा दतिया में काफी कुछ बदलना चाहती है इसके लिए कई मोर्चों पर काम करने की योजना है। अगले कुछ ही दिनों में दतिया में वह चेहरा घोषित हो सकता है, जो भविष्य में दतिया सीट का चेहरा हो। यूं कहें कि जिले में भाजपा को जिताने वाला हो।
सर्वमान्य मुखिया की तलाश:

नए प्लान में भाजपा प्रत्याशी रहे आशुतोष तिवारी को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। यह उनकी इच्छा पर भी निर्भर होगा। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, दतिया में जो हालात हैं, उसे देखकर ऐसा चेहरा नहीं थोप सकते, जो जमीनी पकड़ व सर्वमान्य श्रेणी से बाहर हो।

नरोत्तम पर स्थिति स्पष्ट नहीं:
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा भाजपा के कद्दावर नेताओं में एक हैं। दतिया में भाजपा को मजबूती देने में उनकी मेहनत को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में अभी नरोत्तम की भूमिका तय करनी होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आगामी चुनावों में इसके फायदे कम, नुकसान ज्यादा हो सकते हैं।

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