चंडीगढ़
हरियाणा में किसानों को सब्सिडी वाले उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
अब किसान उर्वरक खरीदने से पहले उसकी डिजिटल बुकिंग कर सकेंगे। सरकार ने इस नई व्यवस्था के पायलट प्रोजेक्ट के लिए महेंद्रगढ़ और कैथल जिलों का चयन किया है। दोनों जिलों में सफल परीक्षण के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में लागू करने पर विचार किया जाएगा।
यह निर्णय मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को खाद की उपलब्धता की पहले से जानकारी देना, अनावश्यक भागदौड़ कम करना और उर्वरकों की मांग के आधार पर आपूर्ति की वैज्ञानिक योजना तैयार करना है।
नई व्यवस्था में किसान मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी उर्वरक आवश्यकता की अग्रिम जानकारी देंगे। किसान अपनी पसंद का अधिकृत बिक्री केंद्र भी चुन सकेंगे। बुकिंग स्वीकृत होने के बाद क्यूआर कोड या टोकन के माध्यम से निर्धारित केंद्र से उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार के अनुसार, किसान द्वारा घोषित फसल और खेती के क्षेत्र के आधार पर उर्वरक की अनुशंसित मात्रा का आकलन किया जाएगा। किसान निर्धारित मानकों के अनुसार अनुशंसित मात्रा अथवा उससे कम मात्रा के लिए आवेदन कर सकेंगे।
प्रमाणीकरण के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाइसी या ओटीपी की सुविधा होगी। डिजिटल साधनों तक पहुंच नहीं रखने वाले किसानों के लिए कामन सर्विस सेंटर, सहकारी समितियां, अधिकृत विक्रेता, विभागीय उप-डिपो और कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ से जुड़ेगा किसान रजिस्ट्री का डेटा
बैठक में ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर उपलब्ध सत्यापित किसानों की खेती संबंधी जानकारी को किसान रजिस्ट्री से जोड़ने के प्रस्तावित तंत्र की भी समीक्षा की गई। इसके तहत फसल सीजन के दौरान किसान अपनी खेती की भूमि का विवरण दर्ज करेंगे और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े पोर्टल पर संबंधित भूमि का चयन करेंगे।
सत्यापन के बाद किसान, भूमि, फसल सीजन और स्वामित्व संबंधी जानकारी सुरक्षित डिजिटल माध्यम से किसान रजिस्ट्री को उपलब्ध कराई जाएगी। पंजीकरण पूरा होने पर पात्र किसान को विशिष्ट किसान पहचान नंबर जारी किया जाएगा, जिसे उसके खेती संबंधी रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। फसल या खेती की स्थिति बदलने पर रिकॉर्ड को प्रत्येक सीजन में अपडेट किया जा सकेगा।
















